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सरकारी केंद्र खाली, बाजार में बिका धान
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Wed, 02 Nov 2016 11:26 PM IST
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चावल का कारोबार
- फोटो : िर्ुिररर
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शामली। बंपर धान उत्पादन होने के बावजूद सरकारी स्तर पर धान खरीद की उचित व्यवस्था नहीं हो सकी। सरकार समर्थित मूल्य भी बाजार से कम रहा, जिस कारण सरकारी क्रय केंद्रों पर एक दाना भी नहीं खरीदा जा सका। जबकि जिले के 70 प्रतिशत से ज्यादा धान की बिक्री हो चुकी है। अधिकांश किसान हरियाणा ले जाकर अपना धान बेच रहे हैं।
जिले में इस बार धान का रकबा करीब 20 हजार 548 हेक्टेयर रहा। धान खरीद के लिए खाद्य विभाग ने कैराना और थानाभवन में खरीद केंद्र खोला, जबकि पीसीएफ की ओर से इस्सोपुर खुरगान, ऊन, बाबरी और अम्बेहटा याकूबपुर (जलालाबाद) में धान खरीद केंद्र खोले। एक अक्तूबर से उक्त धान खरीद केंद्र खोले गए, मगर दो नवंबर तक इन केंद्रों पर एक दाना धान खरीद नहीं हुआ।
इसका कारण सरकार का समर्थित मूल्य कम बताया जा रहा है। सरकार ने सामान्य प्रजाति के धान का समर्थित मूल्य 1470 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान का मूल्य 1510 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया। वहीं, बाजार में सामान्य प्रजाति का धान 1600 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है। इसके चलते किसान सरकारी क्रय केंद्र के स्थान पर बाजार में धान बेचने को ज्यादा फायदेमंद समझ रहे हैं।
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गांव सुंदरनगर निवासी गुलाब सिंह ने बताया कि 60 बीघा में पीआर 14 प्रजाति का धान बोया था। एक महीना पूर्व उसने 1350 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से धान की बिक्री कर दी, जबकि अब इस वैरायटी का धान 1600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। खोड़समा गांव निवासी पंकज ने बताया कि उन्होंने 40 बीघा में 0121 प्रजाति का धन बोया था।
धान की पैदावार अच्छी रही, 15 दिन पूर्व ही उन्होंने हरियाणा ले जाकर धान बेच दिया। खोड़समा निवासी बिजेंद्र का कहना है कि उन्होंने 30 बीघा में 1121 प्रजाति का धान बोया था। 10 दिन पूर्व जब धान बेचा, तो 1800 से 1850 रुपये प्रति क्विंटल का रेट था, जबकि अब 2300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। किसानों का कहना है कि सरकारी स्तर पर धान खरीद की उपयुक्त व्यवस्था न होने के कारण ही हरियाणा ले जाकर धान बेचना पड़ता है।
अधिकांश धान की बिक्री हरियाणा में
जनपद के अधिकांश किसान धान की बिक्री करनाल (हरियाणा) की मंडी में कर रहे हैं। शामली में धान व्यापारी तो हैं, मगर मंडी नहीं है। साथ ही हरियाणा में धान का दाम भी यूपी से ज्यादा दिया जा रहा है। इसके अलावा धान की बुवाई के समय से ही हरियाणा के व्यापारियों ने शामली के किसानों से संपर्क साध लिया था, जिसके चलते अधिकांश किसान हरियाणा के व्यापारियों को ही धान बेच रहे हैं।
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जिले में इस बार धान का रकबा करीब 20 हजार 548 हेक्टेयर रहा। धान खरीद के लिए खाद्य विभाग ने कैराना और थानाभवन में खरीद केंद्र खोला, जबकि पीसीएफ की ओर से इस्सोपुर खुरगान, ऊन, बाबरी और अम्बेहटा याकूबपुर (जलालाबाद) में धान खरीद केंद्र खोले। एक अक्तूबर से उक्त धान खरीद केंद्र खोले गए, मगर दो नवंबर तक इन केंद्रों पर एक दाना धान खरीद नहीं हुआ।
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इसका कारण सरकार का समर्थित मूल्य कम बताया जा रहा है। सरकार ने सामान्य प्रजाति के धान का समर्थित मूल्य 1470 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान का मूल्य 1510 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया। वहीं, बाजार में सामान्य प्रजाति का धान 1600 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है। इसके चलते किसान सरकारी क्रय केंद्र के स्थान पर बाजार में धान बेचने को ज्यादा फायदेमंद समझ रहे हैं।
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गांव सुंदरनगर निवासी गुलाब सिंह ने बताया कि 60 बीघा में पीआर 14 प्रजाति का धान बोया था। एक महीना पूर्व उसने 1350 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से धान की बिक्री कर दी, जबकि अब इस वैरायटी का धान 1600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। खोड़समा गांव निवासी पंकज ने बताया कि उन्होंने 40 बीघा में 0121 प्रजाति का धन बोया था।
धान की पैदावार अच्छी रही, 15 दिन पूर्व ही उन्होंने हरियाणा ले जाकर धान बेच दिया। खोड़समा निवासी बिजेंद्र का कहना है कि उन्होंने 30 बीघा में 1121 प्रजाति का धान बोया था। 10 दिन पूर्व जब धान बेचा, तो 1800 से 1850 रुपये प्रति क्विंटल का रेट था, जबकि अब 2300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। किसानों का कहना है कि सरकारी स्तर पर धान खरीद की उपयुक्त व्यवस्था न होने के कारण ही हरियाणा ले जाकर धान बेचना पड़ता है।
अधिकांश धान की बिक्री हरियाणा में
जनपद के अधिकांश किसान धान की बिक्री करनाल (हरियाणा) की मंडी में कर रहे हैं। शामली में धान व्यापारी तो हैं, मगर मंडी नहीं है। साथ ही हरियाणा में धान का दाम भी यूपी से ज्यादा दिया जा रहा है। इसके अलावा धान की बुवाई के समय से ही हरियाणा के व्यापारियों ने शामली के किसानों से संपर्क साध लिया था, जिसके चलते अधिकांश किसान हरियाणा के व्यापारियों को ही धान बेच रहे हैं।