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लड़कियों की शादी परिवार की मर्जी से ही होनी चाहिए
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
Updated Wed, 07 Feb 2018 11:36 PM IST
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शामली। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने सगोत्रीय विवाह और दो वयस्कों की शादी के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम कोर्ट का ऐसा कोई फैसला नहीं मानेंगे, जिससे सामाजिक एवं पारंपरिक व्यवस्था तार-तार होती हो।
बुधवार को बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत गांव भाज्जू में धर्मवीर के यहां हुए कार्यक्रम में पहुंचे, तो मीडियाकर्मियों ने उनसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खाप पंचायतों के रुख को लेकर प्रतिक्रिया ली। इस पर चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि लड़कियां अपनी मर्जी से शादी क्यों करेंगी, जब हमने पढ़ाई में पैसा खर्च कर लड़कियों को योग्य बनाया, तो उनकी शादी भी परिवार के सदस्यों की मर्जी से ही होनी चाहिए।
यदि लड़कियां अपने मन से ही शादी करेंगी, तो परिवार के लोगों की भूमिका ही क्या रह गई, ऐसे में लड़कियां पैदा ही क्यों की जाएंगी। कोर्ट का ऐसा कोई आदेश नहीं माना जाएगा, जिससे सामाजिक व्यवस्था को खतरा हो। ऐसा कोई आदेश नहीं मानेंगे, जिससे पारंपरिक व्यवस्था खराब हो। कोर्ट के ऐसे फैसलों का विरोध करते रहेंगे।
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गौरतलब है कि कोर्ट ने पूर्व में भी कई बार सगोत्रीय विवाह के संबंध में खाप पंचायतों के रुख पर आपत्ति जताई थी। सोमवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दो वयस्कों की शादी में खाप पंचायतें सामाजिक विवेक की ठेकेदार न बनें और न ही दो वयस्क की शादी में दखल किया जाना चाहिए।
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बुधवार को बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत गांव भाज्जू में धर्मवीर के यहां हुए कार्यक्रम में पहुंचे, तो मीडियाकर्मियों ने उनसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खाप पंचायतों के रुख को लेकर प्रतिक्रिया ली। इस पर चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि लड़कियां अपनी मर्जी से शादी क्यों करेंगी, जब हमने पढ़ाई में पैसा खर्च कर लड़कियों को योग्य बनाया, तो उनकी शादी भी परिवार के सदस्यों की मर्जी से ही होनी चाहिए।
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यदि लड़कियां अपने मन से ही शादी करेंगी, तो परिवार के लोगों की भूमिका ही क्या रह गई, ऐसे में लड़कियां पैदा ही क्यों की जाएंगी। कोर्ट का ऐसा कोई आदेश नहीं माना जाएगा, जिससे सामाजिक व्यवस्था को खतरा हो। ऐसा कोई आदेश नहीं मानेंगे, जिससे पारंपरिक व्यवस्था खराब हो। कोर्ट के ऐसे फैसलों का विरोध करते रहेंगे।
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गौरतलब है कि कोर्ट ने पूर्व में भी कई बार सगोत्रीय विवाह के संबंध में खाप पंचायतों के रुख पर आपत्ति जताई थी। सोमवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दो वयस्कों की शादी में खाप पंचायतें सामाजिक विवेक की ठेकेदार न बनें और न ही दो वयस्क की शादी में दखल किया जाना चाहिए।