{"_id":"7694651bea1e6abff4704601dbf7860c","slug":"ganga-ram-boatman-fence-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीराम को केवट ने गंगा पार कराई ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीराम को केवट ने गंगा पार कराई
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Fri, 16 Oct 2015 01:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैराना। श्रीराम लीला कमेटी के तत्वावधान में गौशाला भवन में चल रही रामलीला में राम, लक्ष्मण और सीता के साथ मंत्री सुमंत अपनी सेना के साथ जा रहे हैं। राम उन्हें वापस लौटने को कहते हैं, लेकिन सुमंत नहीं मानते। रात्री में सभी वन में गंगा नदी के पास सोते हैं।
वहीं, गंगा पार कराने के लिए केवट से नाव में बैठाने को कहते है, लेकिन केवट नाव में बैठाने से पहले राम के पैर धोने की बात करते हैं। केवट राम के पैर धोकर सबको नाव से गंगा पार करा देते हैं। सुबह सुमंत जब अपनी सेना के साथ उठते हैं तो राम, लक्ष्मण और सीता को नहीं पाकर दुखी होते है। मंत्री सुमंत सेना के साथ अयोध्या लौटते है और राजा दशरथ को राम के वन में चले जाने के बारे में बताते हैं। दशरथ को श्रवण माता पिता के श्राप की याद आती है।
आज्ञा पाकर वन को रवाना हुए श्रीराम
जलालाबाद। गांधी चौक मैदान में चल रही पंचायती रामलीला कार्यक्रम में कैकेयी के साथ मंथरा का संवाद, कैकेयी के साथ महाराज दशरथ संवाद, कैकेयी ने महाराज से सौगंध याद दिलाकर दो वचनों में भरत को राजगद्दी तथा राम को 14 वर्ष का वनवास मांगा।
विज्ञापन
उधर, सुमंत राम को बुलाकर लाते हैं कि महाराज दशरथ हे राम हे राम की रट लगाए हुए हैं। राम आते हैं, तो कैकेयी ने कहा कि भरत को राजगद्दी और राम तुम वनवास जाओ। माता कौशल्या सुमित्रा से आज्ञा पाकर लक्ष्मण और सीता सहित राम वन को चले गए। उधर, कोप भवन में महाराज ने कहा सुमंत ने मेरी फुलवारी को वनों में घुमाकर गंगा स्नान कराकर वापस ले आना।
विज्ञापन
वहीं, गंगा पार कराने के लिए केवट से नाव में बैठाने को कहते है, लेकिन केवट नाव में बैठाने से पहले राम के पैर धोने की बात करते हैं। केवट राम के पैर धोकर सबको नाव से गंगा पार करा देते हैं। सुबह सुमंत जब अपनी सेना के साथ उठते हैं तो राम, लक्ष्मण और सीता को नहीं पाकर दुखी होते है। मंत्री सुमंत सेना के साथ अयोध्या लौटते है और राजा दशरथ को राम के वन में चले जाने के बारे में बताते हैं। दशरथ को श्रवण माता पिता के श्राप की याद आती है।
विज्ञापन
आज्ञा पाकर वन को रवाना हुए श्रीराम
जलालाबाद। गांधी चौक मैदान में चल रही पंचायती रामलीला कार्यक्रम में कैकेयी के साथ मंथरा का संवाद, कैकेयी के साथ महाराज दशरथ संवाद, कैकेयी ने महाराज से सौगंध याद दिलाकर दो वचनों में भरत को राजगद्दी तथा राम को 14 वर्ष का वनवास मांगा।
विज्ञापन
उधर, सुमंत राम को बुलाकर लाते हैं कि महाराज दशरथ हे राम हे राम की रट लगाए हुए हैं। राम आते हैं, तो कैकेयी ने कहा कि भरत को राजगद्दी और राम तुम वनवास जाओ। माता कौशल्या सुमित्रा से आज्ञा पाकर लक्ष्मण और सीता सहित राम वन को चले गए। उधर, कोप भवन में महाराज ने कहा सुमंत ने मेरी फुलवारी को वनों में घुमाकर गंगा स्नान कराकर वापस ले आना।