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-जिले के किसान सम्मान निधि नहीं, बकाया गन्ना भुगतान चाहते है।
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किसान सम्मान निधि नहीं, बकाया भुगतान चाहते हैं
शामली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों को किसान सम्मान निधि की आठवीं किस्त जारी कर दी गई है। जिले के किसानों का कहना है कि उन्हें किसान सम्मान निधि नहीं, बल्कि कोरोना संक्रमण काल में चीनी मिलों से गन्ना पेराई सत्र का संपूर्ण बकाया गन्ना भुगतान चाहते हैं।
किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक का कहना है कि कोरोना के इस संकटकाल में यह किस्त किसानों के लिए राहत का काम करेगी। हालांकि किसानों को फसलों के सही दाम और समय पर गन्ने का भुगतान हों, तो किसान की हालत अवश्य सुधरेगी। उनका कहना है कि जिले में 841 करोड़ रुपये गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर है। ऐसे में किसान को उसका पैसा नहीं मिल पा रहा है। तो किसान सम्मान निधि के इस पैसे से उसका क्या भला होगा। जिले के डांगरौड गांव निवासी राजन जावला ने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना नहीं, बल्कि किसानों को गन्ने का भुगतान करने के लिए सरकार को चीनी मिलों पर दबाव बनाना होगा।
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शामली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों को किसान सम्मान निधि की आठवीं किस्त जारी कर दी गई है। जिले के किसानों का कहना है कि उन्हें किसान सम्मान निधि नहीं, बल्कि कोरोना संक्रमण काल में चीनी मिलों से गन्ना पेराई सत्र का संपूर्ण बकाया गन्ना भुगतान चाहते हैं।
किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक का कहना है कि कोरोना के इस संकटकाल में यह किस्त किसानों के लिए राहत का काम करेगी। हालांकि किसानों को फसलों के सही दाम और समय पर गन्ने का भुगतान हों, तो किसान की हालत अवश्य सुधरेगी। उनका कहना है कि जिले में 841 करोड़ रुपये गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर है। ऐसे में किसान को उसका पैसा नहीं मिल पा रहा है। तो किसान सम्मान निधि के इस पैसे से उसका क्या भला होगा। जिले के डांगरौड गांव निवासी राजन जावला ने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना नहीं, बल्कि किसानों को गन्ने का भुगतान करने के लिए सरकार को चीनी मिलों पर दबाव बनाना होगा।
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