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50 लाख खर्च करके भी नहीं मिला बरात घर का लाभ

Tue, 22 Sep 2020 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2020 12:12 AM IST
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Even after spending 50 lakhs, we did not get the benefit of marriage
जलालाबाद में अधूरा पड़ा बरातघर का निर्माण कार्य। - फोटो : SHAMLI
50 लाख खर्च करके भी नहीं मिला बरातघर का लाभ
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जलालाबाद। करीब 50 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद कस्बे में बरातघर का निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसका कस्बेवासियों को कोई लाभ नहीं मिला है। कई वर्षों से बरातघर अधर में ही लटका हुआ है।
जलालाबाद के वार्ड तीन मोहल्ला गंगानगर में जैन मंदिर रोड चौराहे पर एक सामुदायिक बरातघर का प्रस्ताव वर्ष 2015 में नगर पंचायत की बोर्ड बैठक में पूर्व चेयरपर्सन रमा अशरफ अली खान की अध्यक्षता में पारित हुआ था। राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि में इसका निर्माण कराया जाना तय हुआ था। टेंडर निकालकर पंजीकृत ठेकेदार को निर्माण का ठेका दे दिया गया था। बरातघर के निर्माण के लिए 90 लाख रुपये का स्टीमेट तैयार हुआ था और काम भी जोरशोर से शुरू कर दिया गया था। निर्माण पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च कर बरात घर के कमरे, हॉल, बाथरूम व बरात ठहरने का स्थान आदि बना दिए गए, लेकिन बरातघर में अभी काफी निर्माण कार्य शेष है। निर्माण कार्य कई वर्षों से अधर में ही लटका है। निर्माण कराने वाले ठेकेदार नदीम अहमद का कहना है कि अब निर्माण कार्य की लागत बढ़ गई है तथा वित्त आयोग से धनराशि नहीं मिल पाने के कारण बरातघर का निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
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बोले जिम्मेदार
वार्ड सभासद अर्जुन रावड़ा का कहना है कि यह बरातघर बोर्ड की पहली योजना में ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन बीच में धनराशि अवमुक्त न होने के कारण निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। पिछले सप्ताह बोर्ड में यह मुद्दा भी उठाया था, जिस पर इस को शीघ्र पूरा करने का प्रस्ताव पास किया गया है।
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सभासद राजेश सैनी का कहना है कि बरातघर तैयार हो जाने के बाद कस्बे की जनता को काफी सुविधा मिलेगी। इसलिए इस बार बोर्ड बैठक में इसको पूरा कराए जाने का प्रयास सभी ने किया है।
नगर पंचायत अध्यक्ष चौधरी अब्दुल गफ्फार का कहना है कि जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए बरातघर का अधूरा पड़ा निर्माण पूरा कराया जाएगा। किसी प्रकार से धनराशि की व्यवस्था की जाएगी।

इस बारे में अधिशासी अधिकारी विजय आनंद का कहना है कि कुछ निर्माण कार्य का भुगतान ठेकेदार को राज्य वित्त से कर दिया गया था, लेकिन राज्य वित्त में धनराशि न होने के कारण निर्माण कार्य बीच में ही रह गया है।
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