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Shamli News: अपने सपनों को समेटा और संभाल लिया घरबार

Sat, 14 Mar 2026 12:50 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sat, 14 Mar 2026 12:50 AM IST
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Embraced my dreams and took care of my home
शामली। पूर्व प्रधान बबली के पति विवेक उर्फ विक्की की हत्या के बाद बहावड़ी गांव एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 27 साल से चली आ रही चुनावी रंजिश में खून के छींटे पड़े तो कई परिवारों की खुशियां छीन गई। वर्ष 1999 से शुरू हुई इस रंजिश की आग में कई परिवार बिखर चुके हैं। परिवार का सहारा छिन गया तो बहन को अपने सपने समेटकर घर की जिम्मेदारी उठा ली। ग्रामीण कहते हैं कि वर्षों से चली आ रही इस दुश्मनी ने गांव का माहौल बिगाड़ दिया है। अब उन्हें सिर्फ एक ही उम्मीद है कि किसी तरह गांव में अमन और चैन लौट आए।
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भाई की हत्या के बाद बहन बनीं परिवार का सहारा
गांव निवासी करतार सिंह बताते हैं कि वर्ष 2000 में उनके बेटे बिल्लू की नलकूप पर सोते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बिल्लू की मौत के बाद पूरा परिवार संकट में आ गया। ऐसे में बिल्लू की बहन पिंकी ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई पिंकी ने आज तक शादी नहीं की और खुद खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। वह पहले कबड्डी की अच्छी खिलाड़ी थीं, लेकिन भाई की हत्या के बाद अपने सपने छोड़कर घर की जिम्मेदारी संभाल ली।
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एक के बाद एक हत्याओं ने तोड़ दिया परिवार
पति विवेक को खो चुकी पूर्व प्रधान बबली और उनकी बहन ऊमा बताती हैं कि उनके परिवार में यशपाल, सुरेश और विक्की समेत आधा दर्जन से अधिक लोगों की हत्या हो चुकी है। परिवार के लोग कहते हैं कि पहले सुरेश और विक्की खेती कर घर का खर्च चला रहे थे, लेकिन उनकी मौत के बाद अब घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा। डर का माहौल इतना है कि घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है।
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बेटे जेल में, पति की हो गई हत्या
बबली बताती हैं कि उनका बेटा सागर इलाहाबाद जेल में और दूसरा बेटा अजय लखनऊ जेल में सजा काट रहा है। परिवार को उम्मीद थी कि बेटे ही घर का सहारा बनेंगे, लेकिन अब दोनों जेल में हैं। पति विवेक की हत्या के बाद बबली अकेली पड़ गई है।

27 साल बाद भी नहीं मिटा भाई की मौत का दर्द
गांव के सतबीर कहते हैं कि 15 मार्च 1999 को उनके भाई रणवीर की घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रणवीर ही परिवार का सहारा थे और खेती-बाड़ी कर घर चलाते थे। उनकी मौत के बाद परिवार पर संकट टूट पड़ा। आज भी सतबीर उस दर्द को भूल नहीं पाए हैं। अब परिवार का सहारा भतीजा आशीष है, जो खेती-बाड़ी कर घर चला रहा है।

मासूम की हत्या का घाव आज भी ताजा
गांव के ब्रजपाल बताते हैं कि उनके परिवार का इस रंजिश से कोई लेनादेना नहीं था, लेकिन वर्ष 2000 में उनके डेढ़ साल के बेटे विशेष का घर के बाहर से अपहरण कर लिया गया। अगले दिन उसका शव घर के बाहर ही मिला। उस समय ब्रजपाल बाघा बॉर्डर पर सेना में तैनात थे। आज भी परिवार उस दर्दनाक घटना को याद कर सिहर उठते है।

चुनावी रंजिश का लंबा और खौफनाक इतिहास
बहावड़ी गांव में वर्षों से दो गुटों यशपाल सिंह और देवेंद्र पक्ष के बीच वर्चस्व की लड़ाई चली आ रही है। वर्ष 1999 में जितेंद्र की हत्या के बाद शुरू हुआ सिलसिला थमा नहीं। इसके बाद यशपाल, सुरेश मलिक, बिजेंद्र, धर्मेंद्र, देवेंद्र, तेजपाल, रणवीर और मासूम विशेष समेत कई लोगों की हत्या हो चुकी है। हाल ही में विवेक उर्फ विक्की की हत्या ने एक बार फिर गांव को दहला दिया है।


गांव में सिर्फ अमन-चैन चाहते हैं लोग
लगातार होती हत्याओं ने बहावड़ी गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीण खुलकर बोलने से डर रहे हैं। लोगों ने कहा कि अगर जल्द ही इस रंजिश पर लगाम नहीं लगी तो गांव में फिर बड़ा खूनी संघर्ष हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अब बहुत हो चुका। वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि गांव में शांति लौटे और आने वाली पीढ़ियां इस दुश्मनी की आग में न झुलसे।
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