फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Eid is a festival of love and harmony ....

Shamli News: प्यार और सद्भाव का त्योहार है ईद....

Thu, 11 Apr 2024 02:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2024 02:24 AM IST
विज्ञापन
Eid is a festival of love and harmony ....
शामली। आज ईद का त्योहार है। जिलेभर में ईद का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। यह त्योहार खुशियों भरा त्योहार होता है। ईद का त्योहार कब, क्यों मनाया जाता है, मुस्लिमों को कितनी राशि जकात और फितरे की देनी पड़ी है। इसको लेकर संवाददाता महबूब अली की रिपोर्ट...
विज्ञापन


मौलाना शौकीन, मौलाना कासिम बताते हैं कि रमजान माह की समाप्ति और शब्वाल माह की प्रथम तिथि को ईद-उल-फितर मनाई जाती है। ईद शब्द अरबी के ऊद से लिया गया है। ईद का शाब्दिक अर्थ है खुशी और ऊद का अर्थ बार-बार आने वाली। फिर बार-बार लौटकर आने वाले खुशी का यह त्योहार ईद है। इसमें बिना भेदभाव के सभी लोग खुशियां मनाते हैं। इस्लाम धर्म के हिजरी सन् के मुताबिक संपूर्ण एक माह को रमजान के रूप में मनाना निश्चित किया गया। यह संपूर्ण महीना आध्यात्मिक साधना से सुगंधित हो उठता है। जिस प्रकार हिन्दू धर्मावलंबियों में दीपावली, दशहरा, होली आदि त्योहार महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उसी प्रकार इस्लाम के अनुयायियों में ईद उल फितर और ईद उल जुहा पर्व का त्योहर सर्वोपरि है। यह दिन आशा, विश्वास, आस्था और उमंग का प्रतीक है। ईद का दिन प्रत्येक भारतीय के लिए खुशियों, प्रेम मोहब्बत, एकता का पैगाम लेकर आता है। यह दिन त्याग, दान, सेवा अपरिग्रह, संयम, समानता की भावना को उजागर करता है। इस दिन विशेष दो रकआत वाजिब ईद-उल-फितर के रूप में अदा की जाती हैं।
विज्ञापन








-कब मनाई गई पहली ईद
मौलाना कासिम के अनुसार इस्लाम में माना जाता है कि पहली ईद हजरत मुहम्मद पैगंबर ने सन 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनाई थी। यह कुछ-कुछ हिंदुओं के दीपावली की तरह है। जब भगवान राम के लंका विजय के बाद पहली बार दीपोत्सव की शुरुआत हुई थी, जो बाद में दीपावली के रूप में मनाया जाने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

.....


समय के साथ बदलता जा रहा ईद की घोषणा का तरीका
तब दिल्ली से लिखवाकर लाते थे

0 चांद का दीदार न होने पर कुछ लोग दिल्ली जाते थे। जामा मस्जिद के शाही इमाम अथवा दूसरे आलिम से चांद की तस्दीक होना लिखवाकर ले आते थे।

0 तब तक लोग शहर काजी या शाही इमाम के आवास पर जमा रहते थे। फिर चांद कमेटी की बैठक के बाद चांद के दीदार और ईद का ऐलान किया जाता था।

0 इतना होने में सुबह होने को आ जाती थी। ऐसे में पूरे शहर में लोगों को जानकारी देने के लिए नंगाड़ा रिक्शा में रखकर ऐलान कराया जाता था। आतिशबाजी होती थी।

0 तब ईद की तैयारियां शुरू होती थीं और लोग ईद का त्योहार मनाते थे। कुछ लोग तो चांद की जानकारी न मिलने पर रोजा तक रख लेते थे।

0 रमजान के चांद के लिए 3-4 लोगों की गवाही को मान लेते थे, लेकिन ईद के चांद के लिए 8 से 10 लोगों की गवाही और सूचना को मानते थे।


-अब फोन कर देता हैं सारे काम

0 पहले तो लोग खुद ही चांद देखने की कोशिस करते हैं, फिर चांद कमेटी की बैठक में दिल्ली, लखनऊ आदि स्थानों पर फोन से बात कर फैसला ले लेते हैं।

0 दूर-दराज के लोग भी फोन पर चांद के जानकारी के साथ ही मस्जिदों से ऐलान और ईद मनाने के लिए जबरदस्त आतिशबाजी शुरू कर देते है। नंगाड़े भी बजते हैं।

0 चांद के ऐलान के साथ ही ईद की तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं और घरों में त्योहार की खुशियां और चहल-पहल नजर आने लगती है।

0 लोग खुद भी फोन और एसएमएस करके ईद की बधाई देने का सिलसिला चालू कर देते हैं।

0 इसके साथ ही लोग ईद के मद्देनजर खरीदारी करने बाजार में पहुंच जाते हैं। आधी रात बाद तक बाजार गुलजार रहते हैं।





-जानिए.. जकात क्या है

मौलाना शादिक के अनुसार किसी भी व्यक्ति की आमदनी का 2.5 फीसदी हिस्सा किसी गरीब या जरूरतमंद को दिया जाता है, जिसे जकात कहते हैं। यानी अगर किसी मुसलमान के पास तमाम खर्च करने के बाद 100 रुपये बचते हैं तो उसमें से 2.5 रुपये किसी गरीब को देना जरूरी होता है।




-जानिए... फितरा क्या है

फितरा वो रकम होती है जो खाते-पीते, साधन संपन्न घरानों के लोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को देते हैं। ईद की नमाज से पहले इसका अदा करना जरूरी होता है। फितरे की रकम भी गरीबों, बेवाओं व यतीमों और सभी जरूरतमंदों को दी जाती है। इस बार फितरे के रूप में 45 रुपये तय किए गए हैं। लोगों को 45 रुपये के हिसाब से प्रत्येक सदस्य का फितरा देना होगा। हर व्यक्ति को फितरे के रूप में एक किलो 633 ग्राम गेंहू या इसके बाजार भाव के लिहाज से राशि देना होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed