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अंग्रेजों की खाई लाठियां, असहयोग आंदोलन में गए जेल, विदेशी कपड़ों की जलाई होली
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ऐसे थे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाशय आत्माराम धीमान
शराब की दुकान पर दिया धरना, नमक कानून का किया विरोध
मां तुझे प्रणाम लोगों
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। आजादी की जंग में संत विनोबा भावे के विशेष सहयोगी महाशय आत्माराम धीमान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर अंग्रेजों से लोहा लिया। अंग्रेजों के जुल्म भी उनकी हिम्मत तोड़ नहीं पाए।
थानाभवन कस्बे के मोहल्ला कांबोज निवासी महाशय आत्माराम धीमान का जन्म 1902 को बनवारी लाल धीमान के यहां हुआ था। वह जीवन के प्रारंभिक काल में ही स्वंतत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। 1920-1922 तक असहयोग आंदोलन में सक्रिय व अग्रणी नेतृत्व किया तथा जेल गए । 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व किया। विदेशी कपड़ों का बहिष्कार कर होली जलाई। शराब की दुकान पर धरना दिया। नमक कानून का विरोध कर सामूहिक रूप से नमक बनाया। अंग्रेजों की लाठियां खाईं, लंबे समय तक कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक सचिव के पद पर रहते हुए स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करते रहे।
स्वंतत्रता आंदोलन के चलते शादी न करने का प्रण लेकर ब्रह्मचर्य जीवन जीया। थानाभवन में छोटी रेल लाइन का क्रांतिकारियों के साथ रेलवे स्टेशन फूंकने में विशेष योगदान रहा। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लगभग छह माह जेल में बिताए। इसी दौरान घर की कुर्की हुई। इसी दौरान पिता बनवारी लाल धीमान की मृत्यु हो जाने पर अंग्रेज अफसर ने अंत्यष्टि में जाने के लिए माफी मांगने के लिए कहा परंतु उन्होंने इनकार कर दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1972 में उन्हें ताम्रपत्र भेंट किया। आत्माराम धीमान ने राष्ट्र निर्माण में भूदान यज्ञ में कार्य करने के लिए अपने प्रिय दत्तक पुत्र ओमप्रकाश गांधी को आचार्य विनोबा भावे के साथ भेज दिया। महाशय का 1987 में देहावसान हो गया।
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विश्वकर्मा समाज के ये रहे आंदोलनकारी
विश्वकर्मा समाज के सभ्रांत लोग भी अंग्रेजी सरकार के जुल्म सहते हुए जीवन भर लड़ते रहे। इनमें शामली की ज्ञानवती धीमान, हरी सिंह धीमान रायपुर थानाभवन, नंदकिशोर धीमान जानसठ, रामस्वरूप धीमान कन्हेड़ा तुगलकपुर, आत्माराम धीमान फलौदा रहमतपुर, आशाराम धीमान रामपुर मनिहारन, ओमप्रकार धीमान हरिद्वार, सूर्यप्रकाश धीमान मुजफ्फरनगर, ओमप्रकाश वर्मा थानाभवन आदि प्रमुख रहे।
निस्वार्थ भाव से किया काम
थानाभवन कस्बे के मूल निवासी महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाशय आत्माराम धीमान की प्रतिमा का कस्बे के मुख्य मार्ग पर अनावरण अमर शहीद भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह संधु द्वारा 26 जनवरी 2022 को किया गया। महाशय आत्माराम धीमान के पौत्र रविकांत धीमान बताते हैं कि उन्होंने आजादी के आंदोलन के बाद भारत सरकार द्वारा दी गई 30 बीघा भूमि का पट्टा और बस का परमिट लेने से इनकार कर दिया था।
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शराब की दुकान पर दिया धरना, नमक कानून का किया विरोध
मां तुझे प्रणाम लोगों
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। आजादी की जंग में संत विनोबा भावे के विशेष सहयोगी महाशय आत्माराम धीमान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर अंग्रेजों से लोहा लिया। अंग्रेजों के जुल्म भी उनकी हिम्मत तोड़ नहीं पाए।
थानाभवन कस्बे के मोहल्ला कांबोज निवासी महाशय आत्माराम धीमान का जन्म 1902 को बनवारी लाल धीमान के यहां हुआ था। वह जीवन के प्रारंभिक काल में ही स्वंतत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। 1920-1922 तक असहयोग आंदोलन में सक्रिय व अग्रणी नेतृत्व किया तथा जेल गए । 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व किया। विदेशी कपड़ों का बहिष्कार कर होली जलाई। शराब की दुकान पर धरना दिया। नमक कानून का विरोध कर सामूहिक रूप से नमक बनाया। अंग्रेजों की लाठियां खाईं, लंबे समय तक कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक सचिव के पद पर रहते हुए स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करते रहे।
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स्वंतत्रता आंदोलन के चलते शादी न करने का प्रण लेकर ब्रह्मचर्य जीवन जीया। थानाभवन में छोटी रेल लाइन का क्रांतिकारियों के साथ रेलवे स्टेशन फूंकने में विशेष योगदान रहा। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लगभग छह माह जेल में बिताए। इसी दौरान घर की कुर्की हुई। इसी दौरान पिता बनवारी लाल धीमान की मृत्यु हो जाने पर अंग्रेज अफसर ने अंत्यष्टि में जाने के लिए माफी मांगने के लिए कहा परंतु उन्होंने इनकार कर दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1972 में उन्हें ताम्रपत्र भेंट किया। आत्माराम धीमान ने राष्ट्र निर्माण में भूदान यज्ञ में कार्य करने के लिए अपने प्रिय दत्तक पुत्र ओमप्रकाश गांधी को आचार्य विनोबा भावे के साथ भेज दिया। महाशय का 1987 में देहावसान हो गया।
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विश्वकर्मा समाज के ये रहे आंदोलनकारी
विश्वकर्मा समाज के सभ्रांत लोग भी अंग्रेजी सरकार के जुल्म सहते हुए जीवन भर लड़ते रहे। इनमें शामली की ज्ञानवती धीमान, हरी सिंह धीमान रायपुर थानाभवन, नंदकिशोर धीमान जानसठ, रामस्वरूप धीमान कन्हेड़ा तुगलकपुर, आत्माराम धीमान फलौदा रहमतपुर, आशाराम धीमान रामपुर मनिहारन, ओमप्रकार धीमान हरिद्वार, सूर्यप्रकाश धीमान मुजफ्फरनगर, ओमप्रकाश वर्मा थानाभवन आदि प्रमुख रहे।
निस्वार्थ भाव से किया काम
थानाभवन कस्बे के मूल निवासी महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाशय आत्माराम धीमान की प्रतिमा का कस्बे के मुख्य मार्ग पर अनावरण अमर शहीद भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह संधु द्वारा 26 जनवरी 2022 को किया गया। महाशय आत्माराम धीमान के पौत्र रविकांत धीमान बताते हैं कि उन्होंने आजादी के आंदोलन के बाद भारत सरकार द्वारा दी गई 30 बीघा भूमि का पट्टा और बस का परमिट लेने से इनकार कर दिया था।