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कीचड़ में तड़पकर दम तोड़ रहे गोवंश
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शामली। कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की सर्दी और अब बारिश में आश्रय स्थलों में रखे गए गोवंश की दुर्दशा हो रही है। कीचड़ और ठंड के बीच गोवंश तड़पकर मर रहे हैं। स्थाई गोशालाओं में तो व्यवस्था कुछ ठीक नजर आती हैं लेकिन अस्थाई आश्रय स्थलों में बदहाली है। बाबरी के आश्रय स्थल में गोवंशों की हालत बेहद खराब मिली।
जनपद में दो वृहद गो-संरक्षण केंद्र और 26 आश्रय स्थल हैं। इनमें 3511 गोवंशों को रखा गया है। इनमें से ज्यादातर वृद्ध एवं बीमार गोवंश हैं। गोवंशों को ओढ़ाने के लिए जूट के बोरे तक नहीं है। बीते करीब तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से आश्रय स्थलों में रखे गए पशुओं की और दुर्दशा हो रही है। शामली के पास बनत में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए शेड के चारों को टाट के पर्दे लगाए गए हैं। बारिश के मौसम में गोवंश खुले में घूमते नजर आए। यहां के कर्मचारियों ने बताया कि गोशाला में 272 पशु हैं। इनके चारे एवं ठंड से बचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं।
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मंगलवार को एक गोवंश की मौत
बाबरी। बाबरी में अस्थाई गोशाला में गोवंश कीचड़ में पड़े तड़प रहे हैं। इन्हें बारिश से बचाने के उपाय नहीं हैं। मंगलवार को एक गोवंश की मौत हो गई जबकि दो मरणासन्न पड़े थे। वहां मौजूद कर्मचारी किरण ने बताया कि गोशाला में करीब 140 गोवंश हैं। एक माह में करीब 8-10 गोवंश मर गए हैं। बड़े पशु छोटे पशुओ को चारा नहीं खाने देते, जिसके चलते पशु कमजोर हो जाते हैं। बड़े पशु छोटे पशुओं को टक्कर मारकर घायल कर देते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है।
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उधर, अलीपुर कला गोशाला में मुजफ्फरनगर के तितावी से कुछ किसान एक गाय को खेत से पकड़कर गोशाला में छोड़ने के लिए लाए तो कर्मचारियों ने मना कर दिया। बाद में किसानों ने बीडीओ थानाभवन से फोन पर बात कराई। इस पर कर्मचारियों ने गाय को गोशाला में रखा।
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नाकाफी हैं गोवंश को ठंड से बचाने के उपाय
थानाभवन/कैराना/कांधला: जलालाबाद देहात में संचालित गोशाला में करीब 80 गोवंश को रखा गया है। शेड के तीन ओर टाट के पर्दे लगे हुए हैं लेकिन एक ओर से सीधी हवा का सामना गोवंशों को करना पड़ता है। सर्दी से बचाव के लिए ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। हालत यह है कि एक तरफ से सीधी हवा गोवंश को लगती है। बारिश के मौसम में भी गोवंश खुले में घूमते रहते हैं।
कैराना स्थित देवी मंदिर तालाब रोड पर गोशाला में 50 गोवंश हैं। सभी गोवंश लिंटर के पक्के बरामदे के नीचे बने हुए हैं। सर्दी और बरसात से बचाव के लिए बरामदे के जंगलों के आगे तिरपाल डाला गया है। गोवंश की देखभाल करने वाले अमित ने बताया कि सभी गोवंश को हरा चारा व भूसा दिया जाता है। सर्दी से बचाने के लिए प्रत्येक गोवंश को शाम के समय 100 ग्राम गुड़ दिया जाता है।
कांधला में कैराना बाईपास स्थित गोविंद गोशाला में 70 गोवंश हैं। गोवंशों को पक्के हॉल में रखा गया है तथा सर्दी से बचाव के लिए तिरपाल लगाया गया है। ------------
इन्होंने कहा...
आश्रय स्थलों में रखे गए गोवंशों को सर्दी से बचाव के लिए पूरे इंतजाम हैं। जो पशु बीमार होता है उसका उपचार कराया जाता है। चारे आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जाती है। आश्रय स्थलों में रह रहे प्रत्येक पशु के लिए 30 रुपये प्रतिदिन दिया जा रहा है।
- डा. यशवंत सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
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जनपद में दो वृहद गो-संरक्षण केंद्र और 26 आश्रय स्थल हैं। इनमें 3511 गोवंशों को रखा गया है। इनमें से ज्यादातर वृद्ध एवं बीमार गोवंश हैं। गोवंशों को ओढ़ाने के लिए जूट के बोरे तक नहीं है। बीते करीब तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से आश्रय स्थलों में रखे गए पशुओं की और दुर्दशा हो रही है। शामली के पास बनत में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए शेड के चारों को टाट के पर्दे लगाए गए हैं। बारिश के मौसम में गोवंश खुले में घूमते नजर आए। यहां के कर्मचारियों ने बताया कि गोशाला में 272 पशु हैं। इनके चारे एवं ठंड से बचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं।
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मंगलवार को एक गोवंश की मौत
बाबरी। बाबरी में अस्थाई गोशाला में गोवंश कीचड़ में पड़े तड़प रहे हैं। इन्हें बारिश से बचाने के उपाय नहीं हैं। मंगलवार को एक गोवंश की मौत हो गई जबकि दो मरणासन्न पड़े थे। वहां मौजूद कर्मचारी किरण ने बताया कि गोशाला में करीब 140 गोवंश हैं। एक माह में करीब 8-10 गोवंश मर गए हैं। बड़े पशु छोटे पशुओ को चारा नहीं खाने देते, जिसके चलते पशु कमजोर हो जाते हैं। बड़े पशु छोटे पशुओं को टक्कर मारकर घायल कर देते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है।
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उधर, अलीपुर कला गोशाला में मुजफ्फरनगर के तितावी से कुछ किसान एक गाय को खेत से पकड़कर गोशाला में छोड़ने के लिए लाए तो कर्मचारियों ने मना कर दिया। बाद में किसानों ने बीडीओ थानाभवन से फोन पर बात कराई। इस पर कर्मचारियों ने गाय को गोशाला में रखा।
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नाकाफी हैं गोवंश को ठंड से बचाने के उपाय
थानाभवन/कैराना/कांधला: जलालाबाद देहात में संचालित गोशाला में करीब 80 गोवंश को रखा गया है। शेड के तीन ओर टाट के पर्दे लगे हुए हैं लेकिन एक ओर से सीधी हवा का सामना गोवंशों को करना पड़ता है। सर्दी से बचाव के लिए ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। हालत यह है कि एक तरफ से सीधी हवा गोवंश को लगती है। बारिश के मौसम में भी गोवंश खुले में घूमते रहते हैं।
कैराना स्थित देवी मंदिर तालाब रोड पर गोशाला में 50 गोवंश हैं। सभी गोवंश लिंटर के पक्के बरामदे के नीचे बने हुए हैं। सर्दी और बरसात से बचाव के लिए बरामदे के जंगलों के आगे तिरपाल डाला गया है। गोवंश की देखभाल करने वाले अमित ने बताया कि सभी गोवंश को हरा चारा व भूसा दिया जाता है। सर्दी से बचाने के लिए प्रत्येक गोवंश को शाम के समय 100 ग्राम गुड़ दिया जाता है।
कांधला में कैराना बाईपास स्थित गोविंद गोशाला में 70 गोवंश हैं। गोवंशों को पक्के हॉल में रखा गया है तथा सर्दी से बचाव के लिए तिरपाल लगाया गया है। ------------
इन्होंने कहा...
आश्रय स्थलों में रखे गए गोवंशों को सर्दी से बचाव के लिए पूरे इंतजाम हैं। जो पशु बीमार होता है उसका उपचार कराया जाता है। चारे आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जाती है। आश्रय स्थलों में रह रहे प्रत्येक पशु के लिए 30 रुपये प्रतिदिन दिया जा रहा है।
- डा. यशवंत सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।

थानाभवन क्षेत्र में जलालाबाद गोशाला- फोटो : SHAMLI

बाबरी क्षेत्र के रधुनाथपुर अस्थाई गोशाला में मृत पडा गोवंश- फोटो : SHAMLI

बाबरी क्षेत्र के रधुनाथपुर अस्थाई गोशाला में मरणासन्न हालते में पडे गोवंश- फोटो : SHAMLI