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कृष्णा नदी को निर्मल बनाने की कवायद
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली।
Updated Wed, 27 Jun 2018 12:58 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। मृत प्राय हो चुकी कृष्णा नदी और काठा नाला के जीर्णोद्धार के लिए कवायद चल रही है। निर्मल हिंडन वन महोत्सव के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण कराया जाएगा। सवा लाख पौधे कृष्णा नदी और काठा नाला के किनारों पर लगाए जाएंगे। साथ ही इनके आसपास के गांवों में तालाबों की खोदाई का कार्य भी किया जाएगा।
यह कवायद मेरठ मंडलायुक्त डाक्टर प्रभात कुमार द्वारा तैयार कराए गए निर्मल हिंडन सम्मेलन के साथ प्रारंभ की गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक हुई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ ही ग्राम पंचायत सचिवों को पौधरोपण, तालाबों की खोदाई और नालों पर चैक डेम बनाकर जल प्रबंधन के बारे में प्रेरित किया गया। इस दौरान अपर जिलाधिकारी केबी सिंह ने कहा कि सघन वनीकरण में ग्राम प्रधान, सचिव, लेखपाल आदि भूमि का चिह्नीकरण करा लें। जुलाई में वर्षा ऋतु से पूर्व पौधरोपण कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पांच मीटर की दूरी पर पौधे लगाने पर कृष्णा नदी के किनारे बसे ग्रामों में अधिक से अधिक पौधे रोपित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही अतिक्रमण हटाओ अभियान भी सघन वनीकरण का हिस्सा है। कृष्णा नदी के किनारे ग्रामों में एक ग्राम एक तालाब की योजना है। तालाबों को पुनर्जीवन दिया जाएगा। इस दौरान जिला पंचायत राज अधिकारी अरुण कुमार अत्री, सहायक अभियंता दिनेश सिंघल, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी नीरजा सिंह, तहसीलदार अभयराज पांडेय, प्रोफेसर उमर सैफ आदि रहे।
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जिलेभर में तीन लाख पौधरोपण होगा
वन महोत्सव के तहत जिलेभर में करीब तीन लाख पौधरोपण किया जाना है, उसमें से करीब सवा लाख पौधे कृष्णा नदी और काठा नाला के आसपास तथा तालाबों के किनारों पर लगाए जाने का लक्ष्य दिया गया है। प्रोफेसर उमर सैफ ने बताया कि प्रथम चरण में कृष्णा नदी किनारे के पांच गांवों में प्राथमिकता के आधार पर पौधरोपण, तालाबों की खोदाई, नालों की सफाई, नालों पर चैक डेम बनाने की योजना है।
पौधरोपण के अलावा यह कार्य होंगे
1. तालाबों का चिह्नांकन एवं पुनर्जीवन का कार्य वर्षा ऋतु से पूर्व किया जाना है, जिसमें कृष्णा नदी के किनारे वाले गांवों में तालाबों की खोदाई होनी है।
2. प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नदी से जुड़े नालों में आसपास के गांवों से कचरा डालने से रोकना है। कचरा डालने वालों से जुर्माना वसूला जाएगा। नदी से जुड़े नगरीय क्षेत्र के नालों से प्रवाहित होने वाले कचरे को रोकना है, जिसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना बनाई जाएगी।
3. नदी किनारे भूमि चिह्नित करके बायो डायवर्सिटी पार्क की स्थापना कराई जाएगी, जिसमें पौधरोपण भी किया जाएगा।
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यह कवायद मेरठ मंडलायुक्त डाक्टर प्रभात कुमार द्वारा तैयार कराए गए निर्मल हिंडन सम्मेलन के साथ प्रारंभ की गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक हुई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ ही ग्राम पंचायत सचिवों को पौधरोपण, तालाबों की खोदाई और नालों पर चैक डेम बनाकर जल प्रबंधन के बारे में प्रेरित किया गया। इस दौरान अपर जिलाधिकारी केबी सिंह ने कहा कि सघन वनीकरण में ग्राम प्रधान, सचिव, लेखपाल आदि भूमि का चिह्नीकरण करा लें। जुलाई में वर्षा ऋतु से पूर्व पौधरोपण कराया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि पांच मीटर की दूरी पर पौधे लगाने पर कृष्णा नदी के किनारे बसे ग्रामों में अधिक से अधिक पौधे रोपित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही अतिक्रमण हटाओ अभियान भी सघन वनीकरण का हिस्सा है। कृष्णा नदी के किनारे ग्रामों में एक ग्राम एक तालाब की योजना है। तालाबों को पुनर्जीवन दिया जाएगा। इस दौरान जिला पंचायत राज अधिकारी अरुण कुमार अत्री, सहायक अभियंता दिनेश सिंघल, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी नीरजा सिंह, तहसीलदार अभयराज पांडेय, प्रोफेसर उमर सैफ आदि रहे।
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जिलेभर में तीन लाख पौधरोपण होगा
वन महोत्सव के तहत जिलेभर में करीब तीन लाख पौधरोपण किया जाना है, उसमें से करीब सवा लाख पौधे कृष्णा नदी और काठा नाला के आसपास तथा तालाबों के किनारों पर लगाए जाने का लक्ष्य दिया गया है। प्रोफेसर उमर सैफ ने बताया कि प्रथम चरण में कृष्णा नदी किनारे के पांच गांवों में प्राथमिकता के आधार पर पौधरोपण, तालाबों की खोदाई, नालों की सफाई, नालों पर चैक डेम बनाने की योजना है।
पौधरोपण के अलावा यह कार्य होंगे
1. तालाबों का चिह्नांकन एवं पुनर्जीवन का कार्य वर्षा ऋतु से पूर्व किया जाना है, जिसमें कृष्णा नदी के किनारे वाले गांवों में तालाबों की खोदाई होनी है।
2. प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नदी से जुड़े नालों में आसपास के गांवों से कचरा डालने से रोकना है। कचरा डालने वालों से जुर्माना वसूला जाएगा। नदी से जुड़े नगरीय क्षेत्र के नालों से प्रवाहित होने वाले कचरे को रोकना है, जिसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना बनाई जाएगी।
3. नदी किनारे भूमि चिह्नित करके बायो डायवर्सिटी पार्क की स्थापना कराई जाएगी, जिसमें पौधरोपण भी किया जाएगा।