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दहशत नहीं फैलाते मदरसे
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 04 May 2017 12:06 AM IST
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Jalsa
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कैराना। हजरत मौलाना सैय्यद हबीबुल्ला मदनी ने कहा कि मदरसों में दीनी तालीम के साथ ही मुल्क की हिफाजत का पाठ पढ़ाया जाता है। जो लोग मदरसों को दहशतगर्दी का अड्डा बताते हैं, वह अपनी आंख खोल लें। क्योंकि इन मदरसों में दहशतगर्दी की नहीं, बल्कि दीन की तालीम दी जाती है।
मंगलवार रात कैराना में पानीपत रोड स्थित मदरसा इशाअतुल इस्लाम के 55वें सालाना जलसेे कोे संबोधित करते हुए मौलाना सैय्यद हबीबुल्ला मदनी ने कहा कि दीनी मदरसों की जैसी व्यवस्था यूपी में है, वैसी कहीं पर नहीं मिलती।
सऊदी अरब में भी इतने धार्मिक मदरसे नहीं है और न ही इतने हाफिज हैं। यह सब दीनी मदरसों की बरकत और उन प्रख्यात उलेमाओं की मेहनत है, जिन्होंने 1857 में मुल्क की हिफाजत के लिए अपनी जान तक कुरबान की और दीनी मदरसों की सुरक्षा की। इन धार्मिक मदरसों में सरकारी पैसा नहीं बल्कि गरीब मजदूर, किसानों का पैसा लगता है।
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दारूल उलूम देवबंद से आए मौलाना इसरार ने कहा कि जो अल्लाह का हो जाता है उसका इस्लाम पर चलना आसान हो जाता है। मौलाना मुशर्रफ ने कहा कि अगर ईमान पर जमे रहोगे तो तुम ही बुलंद रहोगे।
इस अवसर पर मदरसेे में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र मौलाना इसरार, मौलाना वसीम, मौलाना सादिक, मौलाना आदिल और मौलाना मआज को कुरआन शरीफ हिफ्ज करने पर दस्तारबंदी की गई। वहीं, मदरसा प्रबंध संचालक मौलाना बरकतुल्ला अमीनी को भी बेहतर कार्य के लिए मौलाना हबीबुल्ला मदनी ने उलेमाओं की मौजूदगी में दस्तारबंदी की। कार्यक्रम में हाफिज महमूद, मौलाना मुस्तकीम, मुफ्ती महताब, मौलाना गुलजार आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
इस दौरान मौलाना फुरकान, मुफ्ती नासिर, मुफ्ती तालिब, मौलाना तौहीद, मौलाना इकबाल, मौलाना वासिल, मौलाना इरफान साकिब कासमी, मौलाना इमरान, मौलाना मोहम्मद उमर, कारी अनीस, कारी असजद, मौलाना साजिद, मौलाना शौकीन और कारी शमीम आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में मास्टर समीउल्ला खान, डॉ. अजमतुल्ला खान, कारी साजिद, मौलाना आमिर, हाफिज सुफियान, इंतजार अंसारी, हाफिज सालिम आदि का विशेष सहयोेग रहा। संचालन कारी वाजिद ने किया। जलसे के समापन पर हजरत मौलाना सैय्यद हबीबुल्ला मदनी नेे देश और दुनिया में अमनो अमान के लिए दुआ कराई।
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मंगलवार रात कैराना में पानीपत रोड स्थित मदरसा इशाअतुल इस्लाम के 55वें सालाना जलसेे कोे संबोधित करते हुए मौलाना सैय्यद हबीबुल्ला मदनी ने कहा कि दीनी मदरसों की जैसी व्यवस्था यूपी में है, वैसी कहीं पर नहीं मिलती।
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सऊदी अरब में भी इतने धार्मिक मदरसे नहीं है और न ही इतने हाफिज हैं। यह सब दीनी मदरसों की बरकत और उन प्रख्यात उलेमाओं की मेहनत है, जिन्होंने 1857 में मुल्क की हिफाजत के लिए अपनी जान तक कुरबान की और दीनी मदरसों की सुरक्षा की। इन धार्मिक मदरसों में सरकारी पैसा नहीं बल्कि गरीब मजदूर, किसानों का पैसा लगता है।
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दारूल उलूम देवबंद से आए मौलाना इसरार ने कहा कि जो अल्लाह का हो जाता है उसका इस्लाम पर चलना आसान हो जाता है। मौलाना मुशर्रफ ने कहा कि अगर ईमान पर जमे रहोगे तो तुम ही बुलंद रहोगे।
इस अवसर पर मदरसेे में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र मौलाना इसरार, मौलाना वसीम, मौलाना सादिक, मौलाना आदिल और मौलाना मआज को कुरआन शरीफ हिफ्ज करने पर दस्तारबंदी की गई। वहीं, मदरसा प्रबंध संचालक मौलाना बरकतुल्ला अमीनी को भी बेहतर कार्य के लिए मौलाना हबीबुल्ला मदनी ने उलेमाओं की मौजूदगी में दस्तारबंदी की। कार्यक्रम में हाफिज महमूद, मौलाना मुस्तकीम, मुफ्ती महताब, मौलाना गुलजार आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
इस दौरान मौलाना फुरकान, मुफ्ती नासिर, मुफ्ती तालिब, मौलाना तौहीद, मौलाना इकबाल, मौलाना वासिल, मौलाना इरफान साकिब कासमी, मौलाना इमरान, मौलाना मोहम्मद उमर, कारी अनीस, कारी असजद, मौलाना साजिद, मौलाना शौकीन और कारी शमीम आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में मास्टर समीउल्ला खान, डॉ. अजमतुल्ला खान, कारी साजिद, मौलाना आमिर, हाफिज सुफियान, इंतजार अंसारी, हाफिज सालिम आदि का विशेष सहयोेग रहा। संचालन कारी वाजिद ने किया। जलसे के समापन पर हजरत मौलाना सैय्यद हबीबुल्ला मदनी नेे देश और दुनिया में अमनो अमान के लिए दुआ कराई।