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देश की खातिर पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया जाए
Wed, 27 Feb 2019 11:16 PM IST
NAVEEN GUPTA
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Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Wed, 27 Feb 2019 11:16 PM IST
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- फोटो : amarujala
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शामली के मोहल्ला रेलपार निवासी जाट रेजीमेंट के जवान प्रमेंद्र निर्वाल करीब 18 साल पहले जैसलमेर में बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हो गए थे। शहीद प्रमेंद्र के परिजनों को अपने लाडले को खोने का गम आज भी है, लेकिन इस बात के लिए गर्व भी है कि उनके भाई वतन की खातिर शहीद हुए है। उन्होंने सीमा पर तनाव के हालात बनने पर कहा कि पाकिस्तान को इस बार कड़ा सबक सिखाना चाहिए। इसके लिए चाहे आरपार की लड़ाई लड़नी पड़े तो भी कदम पीछे नहीं हटना चाहिए।
बुधवार को मोहल्ला रेलपार में अपने आवास पर बातचीत करते हुए 2001 में शहीद हुए प्रमेंद्र निर्वाल के बड़े भाई जितेंद्र ने कहा कि उनके छोटे भाई को शहीद हुए भले ही 18 साल बीत गए हो, लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें और उनके परिवार को जो घाव दिया है, वह अभी तक भरा नहीं है। प्रवेंद्र के शहीद होने के बाद वे भी सेना में भर्ती होकर दुश्मनों को सबक सिखाना चाहते थे। सेना के अधिकारियों के सामने उन्होंने यह इच्छा भी जताई थी, लेकिन उन्हें यह मौका नहीं मिल सका, जिसका उन्हें आज भी मलाल है। 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले की घटना का जिक्र करते हुए जितेंद्र निर्वाल ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों के कैंपों को नष्ट कर पुलवामा हमले को तो बदला ले लिया, लेकिन अब आतंकवाद का फन कुचलने के लिए उसके सरपरस्त पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाना चाहिए। देश की खातिर आरपार की लड़ाई होनी चाहिए। पाकिस्तान को उसकी औकात बताने का वक्त आ गया है। देश का हर नागरिक भारतीय सेना के साथ है। उन्होंने कहा कि पहली बार सरकार ने इस तरह का साहसिक कदम उठाकर पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दिया है। इस कार्रवाई के लिए वे भारतीय सेना को सेल्यूट करते है।
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बुधवार को मोहल्ला रेलपार में अपने आवास पर बातचीत करते हुए 2001 में शहीद हुए प्रमेंद्र निर्वाल के बड़े भाई जितेंद्र ने कहा कि उनके छोटे भाई को शहीद हुए भले ही 18 साल बीत गए हो, लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें और उनके परिवार को जो घाव दिया है, वह अभी तक भरा नहीं है। प्रवेंद्र के शहीद होने के बाद वे भी सेना में भर्ती होकर दुश्मनों को सबक सिखाना चाहते थे। सेना के अधिकारियों के सामने उन्होंने यह इच्छा भी जताई थी, लेकिन उन्हें यह मौका नहीं मिल सका, जिसका उन्हें आज भी मलाल है। 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले की घटना का जिक्र करते हुए जितेंद्र निर्वाल ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों के कैंपों को नष्ट कर पुलवामा हमले को तो बदला ले लिया, लेकिन अब आतंकवाद का फन कुचलने के लिए उसके सरपरस्त पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाना चाहिए। देश की खातिर आरपार की लड़ाई होनी चाहिए। पाकिस्तान को उसकी औकात बताने का वक्त आ गया है। देश का हर नागरिक भारतीय सेना के साथ है। उन्होंने कहा कि पहली बार सरकार ने इस तरह का साहसिक कदम उठाकर पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दिया है। इस कार्रवाई के लिए वे भारतीय सेना को सेल्यूट करते है।
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