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स्वास्थ्य केंद्रों की दुर्दशा पर विभाग मौन

Sun, 11 Feb 2018 11:28 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली Updated Sun, 11 Feb 2018 11:28 PM IST
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Department mute on the plight of health centers
झिंझाना के गांव पुरमाफी का जर्जर हालत में प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र। - फोटो : अमर उजाला
शामली के ऊन ब्लाक क्षेत्र की 75 ग्राम पंचायतों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से 32 स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले हुए हैं, लेकिन अधिकांश उपकेंद्रों की हालत खस्ता है। किसी उपकेंद्र को लोगों ने उपले रखने के लिए स्टोर बना दिया है, तो किसी के भवन की हालत जर्जर है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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विकास खंड ऊन में वर्ष 1957 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना हुई, जिसके बाद 11 गांवो में उपकेंद्र बनाए गये थे। बाद में इनकी संख्या 32 हो गई। सभी उपकेंद्रों पर एएनएम की नियुक्ति की गई हैं, लेकिन एएनएम वहां जाना पसंद नहीं करती हैं। विभाग की उदासीनता के चलते लोगों ने उपकेद्रों से खिड़की और दरवाजे तक उखाड़ लिए हैं और उपकेंद्र परिसर में पशुओं को बांधने के अलावा उपले पथाई का कार्य चल रहा है। फिलहाल गांव पुरमाफी, आमवाली, मंसूरा, सिकंदरपुर सहित 29 उपकेंद्र जीर्ण र्शीण अवस्था में है। जिनमें असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। गांव गागोर, कमालपुर और लपराना में किराए के भवन में स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हो रहे हैं, जो ठीक हालत में हैं।
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नशेड़ियों का अड्डा बना पुरमाफी का उपकेंद्र गांव पुरमाफी में स्वास्थ्य उपकेंद्र वर्ष 1971 में बनाया गया था। कुछ समय तक तो स्वास्थ्य कर्मी वहां आते रहे, लेकिन बाद में उक्त भवन बंद होने के चलते आवारा पशुओं, चोर और नशेड़ियों का अड्डा बन गया। विभाग से उसके रखरखाव के लिये प्रति वर्ष 10 हजार रुपये भी दिए जा रहे हैं। बावजूद उपकेंद्र भवन की रंगाई पुताई भी नहीं कराई गई है।
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शासन से नहीं आ रही धनराशि : हांडा ऊन चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार हांडा का कहना है कि ब्लाक क्षेत्र में सभी उपकेंद्रों के लिए 3.20 लाख रुपये प्रति वर्ष मरम्मत के आते हैं। जिनमें से 10-10 हजार रुपये प्रत्येक उपकेंद्र के रखरखाव को दिए जाते हैं। इन्हें खर्च करने की जिम्मेदारी उपकेंद्र पर नियुक्त एएनएम की होती है। विभाग से कोई चौकीदार भी नियुक्त नहीं किया गया है। भवन की मरम्मत के लिए बजट शासन से आया नहीं है। जिसके चलते मरम्मत नहीं हो पा रही है।
बोले ग्रामीण, कोई नहीं सुनता गांव पुरमाफी के राजकुमार शर्मा का कहना है कि लगभग 37 वर्ष पूर्व यहां उपकेंद्र बनाया गया था। लगभग एक साल तक तो डाक्टर यहां आते रहे, उसके बाद डाक्टर ने नियमित बैठना बंद कर दिया। यश कुमार, संदीप शर्मा, अंकित कपिल शर्मा, विवेक सरोहा, दीपक चौधरी आदि का कहना है कि गांव में स्वास्थ्य विभाग से एक महिला डाक्टर कभी कभार बच्चों को टीका लगाने गांव में आती है। गांव में रात के समय किसी को बुखार होने की स्थिति में कोई सुविधा स्वास्थ्य विभाग से नहीं मिल रही है। विषम परिस्थिति होने पर शामली या अन्य स्थान पर मरीज को लेकर जाना पड़ रहा है। लेकिन सैंटर में आज तक कोई अधिकारी नहीं आया है। इसके अलावा सेंटर में जाने वाले मुख्य रास्ते में भांग के पौधे उगे हुए हैं। नशेड़ी पूरे दिन वहीं बैठे रहते हैं। वहां जाने के लिये कीचड़ से होकर जाना पडे़गा। इसके अलावा ग्रामीणों ने उसके बराबर में उपले आदी बनाये हुए है। साथ ही खाद के गड्ढे बनाए हुए है। कई बार सीएमओ और जिलाधिकारी शिकायत भेजी, लेकिन स्वास्थ्य उपकेंद्र की हालत नहीं सुधरी। वहीं, ग्राम प्रधान बिजेंद्र सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से भवन की मरम्मत के लिए कई बार कहा गया, लेकिन हर बार बजट नहीं होना बता दिया जाता है।
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