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सात फरवरी से विद्यालय खोलने की अनुमति देने की उठी मांग
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शामली। वित्त विहीन प्रबंधक एवं शिक्षक महासभा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम डीआईओएस सरदार सिंह को ज्ञापन देकर विद्यालय खोलने की अनुमति देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर अनुमति नहीं दी जाती तो सात फरवरी को वे स्वयं विद्यालय संचालित करने को मजबूर होंगे।
बुधवार को डीआईओएस केे दिए ज्ञापन में विद्यालयों के प्रबंधक और शिक्षकों ने कहा कि कोरोना संक्रमण की दर में गिरावट आने के बाद भी विद्यालय बंद चल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा शून्य है, जिस कारण शिक्षा व्यवस्था घोर संकट से गुजर रही है। देश में सभी गतिविधियां कोविड गाइड लाइन से संचालित हो रही है, तो फिर विद्यालय संचालन क्यों नहीं हो सकता। प्रदेश में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक लगभग 80 प्रतिशत शिक्षा प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं के द्वारा दी जा रही है। विद्यालय बंद होने के कारण शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन मानदेय नहीं मिल रहा है। शिक्षकों ने बच्चों के भविष्य के लिए कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए विद्यालय संचालन की अनुमति देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर अनुमति नहीं मिलती तो सात फरवरी से जिले के सभी विद्यालय संचालित करने केे मजबूर होंगे। इस स्थिति में अगर शासन या प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई विद्यालय संचालकों के विरुद्ध की जाती है तो इन विद्यालयों कार्यरत सभी घटक विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने को बाध्य होंगे। इस अवसर पर देवेंद्र राणा, रामपाल जांगड़ा, महेंद्र शर्मा, सतेंद्र सिंह, इंद्रपाल बालियान, गुफरान अली, सतीश सिंघ्ज्ञल, पवन मान, विजय कुमार,तरूण भारद्वाज आदि मौजूद रहे।
सात फरवरी से विद्यालय नहीं खुले तो नोटा में करेंगे मतदान
शामली। उप्र मान्यता प्राप्त विद्यालय महासभा ने बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों में शासन द्वारा निरंतर बढ़ाए जा रहे अवकाश पर आक्रोश व्यक्त किया गया। बैठक में सात फरवरी से वार्षिक परीक्षाओं के संपन्न होने तक स्कूलों को निर्बाध खोले जाने की मांग की है। इसके बाद कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया।
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बुधवार को हनुमान चौक स्थित रेस्टोरेंट पर आयोजित बैठक में महासभा के प्रदेशाध्यक्ष रामप्रसाद शर्मा ने कहा कि उप्र में लगभग डेढ़ लाख मान्यता प्राप्त विद्यालय अपने सीमित संसाधनों से संचालित कर रहे हैं। मार्च 2020 से कोरोना की पहली लहर से कुछ समय को छोड़कर विद्यालय बंद चल रहा है। विद्यालयों के बार-बार बंद रहने से संचालकों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए सात फरवरी से निरंतर वार्षिक परीक्षाओं के संपन्न होने तक स्कूलों को निर्बाध खोले जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा न हुआ तो मान्यता प्राप्त विद्यालय अपने मत का प्रयोग नोटा में करने के लिए विवश हो जाएंगे। इसके बाद कलक्ट्रेट पहुंचकर महासभा के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम डीएम जसजीत कौर को ज्ञापन दिया गया। इस अवसर पर दिव्य प्रभाकर, मनोज धीमान, चेतन मुंजाल, सतीश शर्मा, अनुज गौतम, रकमपाल सैनी, रामपाल अग्रवाल, नीरज शर्मा आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को डीआईओएस केे दिए ज्ञापन में विद्यालयों के प्रबंधक और शिक्षकों ने कहा कि कोरोना संक्रमण की दर में गिरावट आने के बाद भी विद्यालय बंद चल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा शून्य है, जिस कारण शिक्षा व्यवस्था घोर संकट से गुजर रही है। देश में सभी गतिविधियां कोविड गाइड लाइन से संचालित हो रही है, तो फिर विद्यालय संचालन क्यों नहीं हो सकता। प्रदेश में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक लगभग 80 प्रतिशत शिक्षा प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं के द्वारा दी जा रही है। विद्यालय बंद होने के कारण शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन मानदेय नहीं मिल रहा है। शिक्षकों ने बच्चों के भविष्य के लिए कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए विद्यालय संचालन की अनुमति देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर अनुमति नहीं मिलती तो सात फरवरी से जिले के सभी विद्यालय संचालित करने केे मजबूर होंगे। इस स्थिति में अगर शासन या प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई विद्यालय संचालकों के विरुद्ध की जाती है तो इन विद्यालयों कार्यरत सभी घटक विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने को बाध्य होंगे। इस अवसर पर देवेंद्र राणा, रामपाल जांगड़ा, महेंद्र शर्मा, सतेंद्र सिंह, इंद्रपाल बालियान, गुफरान अली, सतीश सिंघ्ज्ञल, पवन मान, विजय कुमार,तरूण भारद्वाज आदि मौजूद रहे।
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सात फरवरी से विद्यालय नहीं खुले तो नोटा में करेंगे मतदान
शामली। उप्र मान्यता प्राप्त विद्यालय महासभा ने बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों में शासन द्वारा निरंतर बढ़ाए जा रहे अवकाश पर आक्रोश व्यक्त किया गया। बैठक में सात फरवरी से वार्षिक परीक्षाओं के संपन्न होने तक स्कूलों को निर्बाध खोले जाने की मांग की है। इसके बाद कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया।
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बुधवार को हनुमान चौक स्थित रेस्टोरेंट पर आयोजित बैठक में महासभा के प्रदेशाध्यक्ष रामप्रसाद शर्मा ने कहा कि उप्र में लगभग डेढ़ लाख मान्यता प्राप्त विद्यालय अपने सीमित संसाधनों से संचालित कर रहे हैं। मार्च 2020 से कोरोना की पहली लहर से कुछ समय को छोड़कर विद्यालय बंद चल रहा है। विद्यालयों के बार-बार बंद रहने से संचालकों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए सात फरवरी से निरंतर वार्षिक परीक्षाओं के संपन्न होने तक स्कूलों को निर्बाध खोले जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा न हुआ तो मान्यता प्राप्त विद्यालय अपने मत का प्रयोग नोटा में करने के लिए विवश हो जाएंगे। इसके बाद कलक्ट्रेट पहुंचकर महासभा के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम डीएम जसजीत कौर को ज्ञापन दिया गया। इस अवसर पर दिव्य प्रभाकर, मनोज धीमान, चेतन मुंजाल, सतीश शर्मा, अनुज गौतम, रकमपाल सैनी, रामपाल अग्रवाल, नीरज शर्मा आदि मौजूद रहे।