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गरीब बच्चों में ज्ञान का दीप जला रही गुलफशा
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Mar 2017 12:00 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोहरत पा चुकी मलाला की तरह ही जलालाबाद की गुलफशा खान भी तालीम का उजियारा फैलाने में जुटी हुई है। गरीब बच्चों को शिक्षित बनाने को उसने अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है। उसके प्रयास की हर कोई सराहना कर रहा है, तो सरकार से उसकी मदद की मांग भी की जा रही है।
कस्बा जलालाबाद के मोहल्ला मोहम्मदीगंज निवासी गुलफशा (21) ने करीब तीन साल से अपने मोहल्ले के गरीब बच्चों को शिक्षित बनाने का बीड़ा उठाया। वह खुद भी ग्रेजुएशन कर रही है। इस समय उसके पास लगभग 180 बच्चे निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिनका सभी खर्च वह खुद वहन करती है।
गुलफशा खान का कहना है कि मेरे आदर्श एपीजे अब्दुल कलाम हैं। उन्हीं से प्रेरणा लेकर वह समाज को प्रकाशमय करने की ठान चुकी है। हालांकि आर्थिक रुप से कमजोर होने की वजह से उसको परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। शुरुआत में तो परिवार का साथ भी नहीं मिला। परंतु अपनी धुन की पक्की गुलफशा ने परिवार और समाज की परवाह किए बगैर बच्चों को शिक्षा देने का कार्य जारी रखा।
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उसके इस मिशन में उसके भाई फारूख खान और बड़ी बहन जेनब का सहयोग रहा। वह उसके इस कार्य के लिए हमेशा उसका हौसला बढ़ाते रहे। गुलफशा खान गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए अपने पास से किताबें मुहैया कराती है, ताकि कोई भी गरीब शिक्षा से वंचित न रह जाए। एक ओर जहां सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापक हजारों रुपये वेतन लेकर भी सिर्फ कुर्सियों चटकाने में मशगूल रहते हैं, वहीं बिना किसी लालच के गुलफशा बच्चों को शिक्षा देकर अच्छा मुकाम हासिल कराना चाहती है।
कस्बा निवासी अवनीश, दीपक सैनी, अब्दुल गफ्फार, शेर जमा खां, सभासद नदीम खां, सभासद इस्तेखार अहमद, मुकेश शास्त्री आदि का कहना है कि गुलफशा का प्रयास प्रशंसनीय है। समाज के संपन्न लोगों को इस बेटी की हौसला अफजाई करनी चाहिए और सरकार को भी उसकी मदद करनी चाहिए।
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कस्बा जलालाबाद के मोहल्ला मोहम्मदीगंज निवासी गुलफशा (21) ने करीब तीन साल से अपने मोहल्ले के गरीब बच्चों को शिक्षित बनाने का बीड़ा उठाया। वह खुद भी ग्रेजुएशन कर रही है। इस समय उसके पास लगभग 180 बच्चे निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिनका सभी खर्च वह खुद वहन करती है।
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गुलफशा खान का कहना है कि मेरे आदर्श एपीजे अब्दुल कलाम हैं। उन्हीं से प्रेरणा लेकर वह समाज को प्रकाशमय करने की ठान चुकी है। हालांकि आर्थिक रुप से कमजोर होने की वजह से उसको परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। शुरुआत में तो परिवार का साथ भी नहीं मिला। परंतु अपनी धुन की पक्की गुलफशा ने परिवार और समाज की परवाह किए बगैर बच्चों को शिक्षा देने का कार्य जारी रखा।
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उसके इस मिशन में उसके भाई फारूख खान और बड़ी बहन जेनब का सहयोग रहा। वह उसके इस कार्य के लिए हमेशा उसका हौसला बढ़ाते रहे। गुलफशा खान गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए अपने पास से किताबें मुहैया कराती है, ताकि कोई भी गरीब शिक्षा से वंचित न रह जाए। एक ओर जहां सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापक हजारों रुपये वेतन लेकर भी सिर्फ कुर्सियों चटकाने में मशगूल रहते हैं, वहीं बिना किसी लालच के गुलफशा बच्चों को शिक्षा देकर अच्छा मुकाम हासिल कराना चाहती है।
कस्बा निवासी अवनीश, दीपक सैनी, अब्दुल गफ्फार, शेर जमा खां, सभासद नदीम खां, सभासद इस्तेखार अहमद, मुकेश शास्त्री आदि का कहना है कि गुलफशा का प्रयास प्रशंसनीय है। समाज के संपन्न लोगों को इस बेटी की हौसला अफजाई करनी चाहिए और सरकार को भी उसकी मदद करनी चाहिए।