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Shamli News: कैराना में तलवार लेकर निकला काल, मेघनाद ने बंदी बनाया
Mon, 05 Oct 2026 12:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 05 Oct 2026 12:55 AM IST
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कैराना में निकाला गया काल जुलूस-वीडियो ग्रैब
कैराना। श्री रामलीला मंचन के बीच नगर में हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक पारंपरिक काल जुलूस निकाला गया। बाद में काल को मेघनाद ने बंदी बना लिया।
रविवार दोपहर दो बजे श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में कटहरा धर्मशाला से काल जुलूस निकाला गया। जुलूस में एक युवक को ऊपर से नीचे तक काले रंग में रंग दिया गया था जिसे काल का नाम दिया गया है। काल हाथ में लकड़ी की तलवार लेकर हजारों युवकों के पीछे दौड़ लगाता है। रामायण के अनुसार लंका पति राजा रावण अपने पुत्र मेघनाद को आदेश देते हैं कि काल को बंदी बनाकर कारागार में डाल दो।
शाम छह बजे चौक बाजार में काल और मेघनाथ के बीच युद्ध के दौरान मेघनाद काल को बंदी बना लेता है। रावण को अहंकार हो जाता है कि उसने काल को अपने वश में कर लिया है।
बाद में प्रभु श्री राम और रावण के युद्ध से पहले राम की सेना काल को मुक्त कर देती है इसके बाद राम के हाथों रावण का वद्य होता है काल जुलूस ने गोशाला, चौक बाजार, बेगमपुरा बाजार, सराफा बाजार, जोडिया कुआं, पुराना बाजार, मोहल्ला पट्टो वाला और मोहल्ला गुंबद में जमकर उत्पात मचाया। शाम 6 बजे मेघनाथ द्वारा काल को बंदी बनाने के बाद जुलूस का समापन हुआ।
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रविवार दोपहर दो बजे श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में कटहरा धर्मशाला से काल जुलूस निकाला गया। जुलूस में एक युवक को ऊपर से नीचे तक काले रंग में रंग दिया गया था जिसे काल का नाम दिया गया है। काल हाथ में लकड़ी की तलवार लेकर हजारों युवकों के पीछे दौड़ लगाता है। रामायण के अनुसार लंका पति राजा रावण अपने पुत्र मेघनाद को आदेश देते हैं कि काल को बंदी बनाकर कारागार में डाल दो।
शाम छह बजे चौक बाजार में काल और मेघनाथ के बीच युद्ध के दौरान मेघनाद काल को बंदी बना लेता है। रावण को अहंकार हो जाता है कि उसने काल को अपने वश में कर लिया है।
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बाद में प्रभु श्री राम और रावण के युद्ध से पहले राम की सेना काल को मुक्त कर देती है इसके बाद राम के हाथों रावण का वद्य होता है काल जुलूस ने गोशाला, चौक बाजार, बेगमपुरा बाजार, सराफा बाजार, जोडिया कुआं, पुराना बाजार, मोहल्ला पट्टो वाला और मोहल्ला गुंबद में जमकर उत्पात मचाया। शाम 6 बजे मेघनाथ द्वारा काल को बंदी बनाने के बाद जुलूस का समापन हुआ।
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