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नवरात्र में जन्मी बेटियां, परिवार में छाई खुशियां

Mon, 07 Oct 2019 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Oct 2019 12:03 AM IST
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Daughters born in Navratri, happiness in the family
शामली क्षेत्र के गांव लिलौन में नवरात्र में जन्मी बेटी को गोद में लिये बैठा अमित कश्यप। - फोटो : SHAMLI
शामली/कांधला। कभी बेटियों को कभी बोझ समझने वाली सोच बदल रही है। बेटियों को अब किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं माना जाता। जनपद में नवरात्र में हुई बेटियों को माता-पिता और अन्य परिजनों ने माता लक्ष्मी और दुर्गा का रूप बताते हुए खुशी मना रहे है। जनपद में लिंगानुपात के आंकड़े भी इस बात की गवाही दे रहे है। पिछले साल की तुलना में लिंगानुपात में सुधार आया है और लड़के-लड़कियों के बीच अंतर कम हुआ है। दुर्गा अष्टमी के दिन नवजात कन्याओं को लेकर अमर उजाला ने सरकारी और निजी अस्पतालों में जाकर उनके परिजनों से बात की तो उन्होंने कहा कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं होती।
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सीएचसी शामली में रविवार को सुबह करीब 10 बजे गांव कंडेला निवासी रीना पत्नी नीटू ने कन्या को जन्म दिया। बेटी के जन्म होते ही परिवार में खुशियां छा गई। कंडेला स्थित एक फैक्ट्री में मजदूरी करने वाले नीटू ने बताया कि उनके यहां पहली संतान के रूप में अष्टमी के दिन लक्ष्मी के रूप में बेटी आई है। वह बहुत खुश है। उनके लिए बेटे से भी बढ़कर बेटी है। वह बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाएंगे और उनकी हर इच्छा का ख्याल रखेंगे। दादी जगबीरी ने कहा कि वह पोती को पाकर बहुत खुश है।
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सीएचसी शामली में शनिवार को गांव लिलौन निवासी सुनीता पत्नी अमित कश्यप ने कन्या को जन्म दिया। उनके पहले से तीन बेटियां जिया(5), रिया (4) और सानवी(3) है। नवरात्र में चौथी बेटी मां दुर्गा के रूप में मिली है। उसे अब चार बेटियां है, इसके बाद भी वह बहुत खुश है। मजदूरी कर परिवार चलाने वाले अमित का कहना है लड़का-लड़की सब भगवान की कृपा से मिलते है। वे लड़का-लड़की में कोई भेद नहीं मानते। वे लड़कों की तरह ही अपनी बेटियों से प्यार दुलार करते है। बेटियों को किसी भी चीज की कमी नहीं होने देंगे और उनकी हर जरूरत का ख्याल रखकर पूरा करेंगे।
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कांधला सीएचसी में गांव गंगेरू निवासी कमलेश पत्नी अमित के यहां पर रविवार सुबह कन्या का जन्म होने से परिवार में खुशी का माहौल है। अमित मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करता है। उनके पहले से एक बेटा है। मां कमलेश ने बताया कि परिवार को पूरा करने के लिए एक बेटी की इच्छा थी, जो नवरात्र में मां दुर्गा ने पूरी कर दी। वह अपनी बेटी को एक खिलाड़ी बनाने का सपना संजोए हुए है। उसे उम्मीद है कि उसने जो सपना संजोया है, उसकी बेटी उसे पूरा कर दिखाएगी।
कांधला सीएचसी में गांव मखमूलपुर निवासी ममता पत्नी रामकिशन के यहां दो बेटों के बाद बेटी का जन्म होने पर सबके चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही है। रामकिशन मजदूरी करके अपने परिवार को पालते है। उन्होंने बताया कि उनकी इच्छा थी कि परिवार में एक बेटी का जन्म हो। भगवान ने उनकी सुनी और उनकी इच्छा पूरी ही नहीं की बल्कि नवरात्र में अष्टमी के दिन दुर्गा रूप में बेटी दी है। उन्हें गर्व है कि अब वे एक बेटी के भी पिता है। उन्होंने बेटी को अच्छी शिक्षा देकर अध्यापक बनाने का सपना संजोया है ताकि वह अपने ज्ञान से समाज को एक नई दिशा दे शके।
जनपद में लिंगापात में आया सुधार
जिले में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच का ही परिणाम है कि लिंगानुपात में सुधार आया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल जिले में एक हजार लड़कों के मुकाबले 880 लड़की का अनुपात था। इस साल एक हजार लड़कों पर 898 लड़कियां का अनुपात है।
नवरात्र में सीएचसी पर 28 कन्याओं ने जन्म लिया
शामली। सीएचसी शामली के आंकड़ों के मुताबिक नवरात्र के पहले दिन से लेकर दुर्गा अष्टमी तक यानि आठ दिन में 28 कन्याओं ने जन्म लिया है जबकि 43 लड़के पैदा हुए।

कोट
जनपद में लिंगानुपात में पिछले साल के मुकाबले सुधार आया है। इसकी वजह जहां लोगों की सोच में बदलाव में आ रहा है, वहीं शासन ने भी बेटियों को सशक्त बनाने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, कन्या सुमंगला जैसी कई योजनाएं चलाई है। इससे लड़कियों को आगे बढ़ने का मौका मिल सके। - डा. संजय भटनागर, सीएमओ।
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