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बेटियां हैं हमारी शान, रोशन कर रहीं जिले का नाम
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शामली। बेटियां हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। नए-नए कीर्तिमान बनाकर जनपद की बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर जिले का नाम रोशन कर रही हैं। बेटियों की सफलता पर माता-पिता ही नहीं पूरे जनपदवासियों को गर्व है। साथ ही अन्य बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं। सफलता का परचम लहराने वाली बेटियों का कहना है कि जो भी काम करें मन लगाकर करें। मेहनत और लगन से पढ़ाई करें तो सफलता अवश्य मिलती है।
दो बहनों ने पाया सफलता का मुकाम
शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी मोनिका सैनी एम्स दिल्ली में एंब्रोयोलोजिस्ट विभाग में साइंटिस्ट हैं। उनकी छोटी बहन पारुल सैनी दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। पिता मांगेराम सैनी राजस्व निरीक्षक और मां राजकुमारी सैनी गृहणी हैं। मोनिका ने बताया कि उसने शामली में हिंदू कन्या इंटर कालेज से 2004 में इंटर और इसके बाद आरके पीजी कालेज से ग्रेजुएशन किया। पोस्ट ग्रेजुएशन बायो टेक्नालॉजी से राजस्थान से और इसके बाद नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट करनाल से एनीमल बॉयो टेक्निकल विषय पर पीएचडी की। करीब डेढ़ साल से वह नई दिल्ली एम्स में साइंटिस्ट हैं। छोटी बहन पारूल ने इंटर हिंदी कन्या इंटर कालेज शामली से, ग्रेजुएशन वनस्थली विद्यापीठ जयपुर से और इसके बाद एमडी यूनिवर्सिटी रोहतक से एमफिल की। 2017 में नेट क्वालीफाई किया। जेआरएस में ऑल इंडिया में 126वीं रैंक पाई। अब वह दिल्ली विश्वविद्यालय में वेंकटेश्वर कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। दोनों बहनों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया।
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सेना में लेफ्टिनेंट बन देश सेवा कर रहीं प्रीति
गांव भैंसवाल निवासी प्रीति पंवार ने सेेना में लेफ्टिनेंट बनकर गांव और जिले का नाम रोशन किया है। पिता देवेंद्र कुमार बिजनेस करते हैं, जबकि मां इंदू चौधरी गृहणी हैं। मां और पिता अपनी बेटी की सफलता पर फूले नहीं समाते। उन्होंने बताया कि बेटी प्रीति ने ग्रेटर नोएडा से इंटर की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कालेज से ग्रेजुएशन करने के बाद एमबीए की एक साल पढ़ाई की। इसी दौरान उनका सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयन हो गया। एक साल की चेन्नई में ट्रेनिंग के बाद मार्च माह 2020 में पास आउट किया और अरुणाचल में तैनाती मिली। चार जून से वह लेफ्टिनेंट के पद पर कार्य करते हुए देश सेवा कर रही हैं।
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स्वीटी बनीं जिला पूर्ति अधिकारी
गांव बंतीखेड़ा निवासी स्वीटी चौधरी ने हाल ही में यूपी पीसीएस 2018 के घोषित परिणाम में जिला पूर्ति अधिकारी के पद पर चयनित हुई हैं। वर्तमान में वह बागपत में जिला दिव्यांग अधिकारी के पद पर तैनात हैं। स्वीटी के पिता का निधन 1991 में हो गया था। मां सीमा ने जिम्मेदारी संभाली और स्वीटी को पढ़ाकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मां के मार्गदर्शन में स्वीटी ने यह मुकाम हासिल किया। स्वीटी की बड़ी बहन रामपुर में शिक्षिका के पद पर कार्यरत है। बेटी की इस सफलता पर पूरे गांव को गर्व है।
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सीबीएसई के रिजल्ट में टॉप पर रहीं बेटियां
शामली। सीबीएसई 2020 के परीक्षा परिणाम में बेटियां जनपद में टॉप पर रही हैं। हाईस्कूल में सिल्वर बेल्स पब्लिक स्कूल शामली की अपूर्वा तायल जनपद टॉपर रहीं, जबकि इंटर में स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल की अनुष्का और सिल्वर बेल्स स्कूल के अभिनव गोयल टॉपर रहे हैं।
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अब बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं समझा जाता
समाज में पहले बेटा और बेटी में अंतर समझा जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। समाज की इस सोच में बड़ा परिवर्तन आया है। अब बेटा-बेटी एक समान की सोच पैदा हुई है। बेटियों को भी बेटों की तरह पढ़ाया जाता है। उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका दिया जा रहा है। यही कारण है कि बेटियां हर क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा रही है। - करुणा गुप्ता, समाज शास्त्री।
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दो बहनों ने पाया सफलता का मुकाम
शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी मोनिका सैनी एम्स दिल्ली में एंब्रोयोलोजिस्ट विभाग में साइंटिस्ट हैं। उनकी छोटी बहन पारुल सैनी दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। पिता मांगेराम सैनी राजस्व निरीक्षक और मां राजकुमारी सैनी गृहणी हैं। मोनिका ने बताया कि उसने शामली में हिंदू कन्या इंटर कालेज से 2004 में इंटर और इसके बाद आरके पीजी कालेज से ग्रेजुएशन किया। पोस्ट ग्रेजुएशन बायो टेक्नालॉजी से राजस्थान से और इसके बाद नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट करनाल से एनीमल बॉयो टेक्निकल विषय पर पीएचडी की। करीब डेढ़ साल से वह नई दिल्ली एम्स में साइंटिस्ट हैं। छोटी बहन पारूल ने इंटर हिंदी कन्या इंटर कालेज शामली से, ग्रेजुएशन वनस्थली विद्यापीठ जयपुर से और इसके बाद एमडी यूनिवर्सिटी रोहतक से एमफिल की। 2017 में नेट क्वालीफाई किया। जेआरएस में ऑल इंडिया में 126वीं रैंक पाई। अब वह दिल्ली विश्वविद्यालय में वेंकटेश्वर कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। दोनों बहनों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया।
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सेना में लेफ्टिनेंट बन देश सेवा कर रहीं प्रीति
गांव भैंसवाल निवासी प्रीति पंवार ने सेेना में लेफ्टिनेंट बनकर गांव और जिले का नाम रोशन किया है। पिता देवेंद्र कुमार बिजनेस करते हैं, जबकि मां इंदू चौधरी गृहणी हैं। मां और पिता अपनी बेटी की सफलता पर फूले नहीं समाते। उन्होंने बताया कि बेटी प्रीति ने ग्रेटर नोएडा से इंटर की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कालेज से ग्रेजुएशन करने के बाद एमबीए की एक साल पढ़ाई की। इसी दौरान उनका सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयन हो गया। एक साल की चेन्नई में ट्रेनिंग के बाद मार्च माह 2020 में पास आउट किया और अरुणाचल में तैनाती मिली। चार जून से वह लेफ्टिनेंट के पद पर कार्य करते हुए देश सेवा कर रही हैं।
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स्वीटी बनीं जिला पूर्ति अधिकारी
गांव बंतीखेड़ा निवासी स्वीटी चौधरी ने हाल ही में यूपी पीसीएस 2018 के घोषित परिणाम में जिला पूर्ति अधिकारी के पद पर चयनित हुई हैं। वर्तमान में वह बागपत में जिला दिव्यांग अधिकारी के पद पर तैनात हैं। स्वीटी के पिता का निधन 1991 में हो गया था। मां सीमा ने जिम्मेदारी संभाली और स्वीटी को पढ़ाकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मां के मार्गदर्शन में स्वीटी ने यह मुकाम हासिल किया। स्वीटी की बड़ी बहन रामपुर में शिक्षिका के पद पर कार्यरत है। बेटी की इस सफलता पर पूरे गांव को गर्व है।
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सीबीएसई के रिजल्ट में टॉप पर रहीं बेटियां
शामली। सीबीएसई 2020 के परीक्षा परिणाम में बेटियां जनपद में टॉप पर रही हैं। हाईस्कूल में सिल्वर बेल्स पब्लिक स्कूल शामली की अपूर्वा तायल जनपद टॉपर रहीं, जबकि इंटर में स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल की अनुष्का और सिल्वर बेल्स स्कूल के अभिनव गोयल टॉपर रहे हैं।
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अब बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं समझा जाता
समाज में पहले बेटा और बेटी में अंतर समझा जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। समाज की इस सोच में बड़ा परिवर्तन आया है। अब बेटा-बेटी एक समान की सोच पैदा हुई है। बेटियों को भी बेटों की तरह पढ़ाया जाता है। उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका दिया जा रहा है। यही कारण है कि बेटियां हर क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा रही है। - करुणा गुप्ता, समाज शास्त्री।