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दशरथ और राम-केवट अभिनय दर्शकों को भाया
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sun, 18 Oct 2015 01:31 AM IST
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शामली । श्री मंदिर हनुमान धाम पर श्रीराम लीला रंगमंच में गंगा पार - दशरथ मरण की लीला का मंचन किया। दशरथ का अभिनय देखकर दर्शक भावुक हो गए। राम-केवट संवाद दर्शकों को पसंद आए।
शुक्रवार की रात्रि में श्री हनुमान धाम पर श्रीराम लीला रंगमंच पर अयोध्या के मंत्री सुमंत श्रीराम लक्ष्मण को लेकर नगर से लेकर वन की चलते हैं। उनके साथ नगर की जनता चलती है। श्रीराम-लक्ष्मण सीता और जनता को सोता हुआ छोड़कर अकेले वन की ओर चलते हैं। गंगा किनारे सुमंत को अयोध्या की ओर विदा कर वह गंगा के निकट पहुंचकर वन में विश्राम करते हैं, तो वहां भील राजा निषाद राज श्रीराम से मिलने आते हैं।
सुमंत उन्हें सारा वृत्तांत बताते हैं। इस प्रकार श्रीराम केवट से गंगा पार करने का अनुरोध करते हैं। केवट कहते है कि वह गंगा पार नहीं करा सकता, क्योंकि उनकी नाव लकड़ी की बनी है। पत्थर की शिला स्त्री बन सकती है, मेरी नाव कही स्त्री बन गई तो वह अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करेंगे। वह चरणों को धोकर पहले गंगा पार कराएगा।
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श्रीराम अपने चरणों की धुलाई की अनुमति देते हैं। श्रीराम के पैरों की धुलाईं करके केवट उन्हें गंगा पार उतारता है। श्रीराम वन आगे बढ़ते है और चित्रकूट पहुंचकर वहां कुटिया बनाकर विश्राम करते हैं, अयोध्या में जाकर सुमंत राजा दशरथ को सारा वृत्तांत सुनाया। राजा दशरथ को श्रवण कुमार की याद आती है।
पुत्र वियोग में राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी, जोगेंद्र सेठी, निकुंज मित्तल, रमेश धीमान, मनोज मित्तल, राज कुमार मलिक, बाल किशन सैनी, अनुराग शर्मा, लोकेश शर्मा, मुकेश मैनेजर, धर्मेंद्र कांबोज आदि रहे।
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शुक्रवार की रात्रि में श्री हनुमान धाम पर श्रीराम लीला रंगमंच पर अयोध्या के मंत्री सुमंत श्रीराम लक्ष्मण को लेकर नगर से लेकर वन की चलते हैं। उनके साथ नगर की जनता चलती है। श्रीराम-लक्ष्मण सीता और जनता को सोता हुआ छोड़कर अकेले वन की ओर चलते हैं। गंगा किनारे सुमंत को अयोध्या की ओर विदा कर वह गंगा के निकट पहुंचकर वन में विश्राम करते हैं, तो वहां भील राजा निषाद राज श्रीराम से मिलने आते हैं।
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सुमंत उन्हें सारा वृत्तांत बताते हैं। इस प्रकार श्रीराम केवट से गंगा पार करने का अनुरोध करते हैं। केवट कहते है कि वह गंगा पार नहीं करा सकता, क्योंकि उनकी नाव लकड़ी की बनी है। पत्थर की शिला स्त्री बन सकती है, मेरी नाव कही स्त्री बन गई तो वह अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करेंगे। वह चरणों को धोकर पहले गंगा पार कराएगा।
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श्रीराम अपने चरणों की धुलाई की अनुमति देते हैं। श्रीराम के पैरों की धुलाईं करके केवट उन्हें गंगा पार उतारता है। श्रीराम वन आगे बढ़ते है और चित्रकूट पहुंचकर वहां कुटिया बनाकर विश्राम करते हैं, अयोध्या में जाकर सुमंत राजा दशरथ को सारा वृत्तांत सुनाया। राजा दशरथ को श्रवण कुमार की याद आती है।
पुत्र वियोग में राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी, जोगेंद्र सेठी, निकुंज मित्तल, रमेश धीमान, मनोज मित्तल, राज कुमार मलिक, बाल किशन सैनी, अनुराग शर्मा, लोकेश शर्मा, मुकेश मैनेजर, धर्मेंद्र कांबोज आदि रहे।