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दाह संस्कार से रोकने पर बंतीखेड़ा में तनाव
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Tue, 18 Sep 2018 12:33 AM IST
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revel
- फोटो : अमर उजाला
बाबरी (शामली)। महिला के शव का दाह संस्कार करने को लेकर गांव बंतीखेड़ा में विवाद हो गया। महिला के परिवार और समाज के लोग जिस जमीन पर दाह संस्कार करना चाहते थे, उसे दूसरे समुदाय के लोगों ने कब्रिस्तान की भूमि बताते हुए विरोध कर दिया। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों के लोगों को समझा बुझाकर शांत किया।
बाबरी थाना क्षेत्र के गांव बंतीखेड़ा निवासी राकेश वाल्मीकि की पत्नी सुदेश (48) की बीमारी के चलते रविवार रात करनाल स्थित हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। सोमवार सुबह अंतिम संस्कार करने की तैयारी चल रही थी। परिवार और समाज के लोगों ने गांव के बाहर स्थित श्मशान की भूमि पर लकड़ी और उपले डालने शुरू कर दिए। इसी दौरान दूसरे समुदाय के लोगों ने उक्त भूमि पर अंतिम संस्कार का विरोध कर दिया। कहा कि यह जमीन कब्रिस्तान की है, यहां दाह संस्कार नहीं होगा।
इस पर विवाद हुआ और दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए। हंगामा होने पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इसी बीच सूचना मिलने पर बाबरी थानाध्यक्ष देवसिंह रावत पुलिस कर्मियों को साथ लेकर मौके पर पहुंच गए। साथ ही उच्चाधिकारियों को भी सूचना दी गई। एसडीएम शामली प्रशांत कुमार भारती, तहसीलदार अभयराज पांडेय, सीओ थानाभवन अरविंद सिंह राठौर, नायब तहसीलदार सुरेंद्र सिंह, कानूनगो रूपराम और लेखपाल सचिन कुमार भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों के लोगों को समझाबुझाकर शांत किया।
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तहसीलदार ने कानूनगो व लेखपाल से अभिलेखों में उक्त भूमि की जांच कराई। जिसमें बताया गया कि उक्त भूमि खसरा नंबर 872 कब्रिस्तान के रूप में अभिलेख में दर्ज है। फिर अधिकारियों ने दोनों पक्षों के लोगों के साथ बैठक की। विवाद न बढ़े, इसके लिए दोनों पक्षों ने महिला के शव का दाह संस्कार उसी स्थान पर करने पर सहमति जताई। ये भी कहा गया कि अब के बाद यहां पर किसी शव का दाह संस्कार न किया जाए। इसके बाद करीब डेढ़ बजे उसी स्थान पर महिला के शव का दाह संस्कार कर दिया गया। इस दौरान राकेश, भंवर सिंह, श्यामलाल, ब्रजपाल, ओमबीर सिंह, सुनील कुमार, लोकेंद्र सिंह, महावीर, प्रहलाद आदि मौजूद रहे। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए शाम तक बंतीखेड़ा गांव के उस स्थान पर पुलिस तैनात रही।
श्मशान घाट के लिए जमीन चिह्नित करें
बंतीखेड़ा गांव पहुंचे एसडीएम और तहसीलदार ने ग्राम प्रधान लोकेंद्र वर्मा से कहा कि श्मशान घाट के लिए ग्राम पंचायत की खाली भूमि को चिह्नित कराएं। साथ ही ग्राम पंचायत की तरफ से श्मशान घाट बनवाने का प्रस्ताव कराकर निर्माण कराया जाए। ताकि भविष्य में ऐसे विवाद की स्थिति उत्पन्न न होने पाए।
यहीं होता आया है दाह संस्कार
गांव बंतीखेड़ा निवासी लोगों का कहना है कि पिछले 50 वर्षों से उक्त भूमि पर ही अंतिम संस्कार होता आया है। पूर्व में पुरानी परंपरा के मुताबिक यहां शव दफनाए जाते थे, लेकिन कुछ वर्षों से यहीं पर दाह संस्कार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गत 25 मार्च को पाली देवी की मौत और छह माह पूर्व सुधीर तथा ब्रहमपाल की मौत होने पर भी उनके शव का दाह संस्कार इसी स्थान पर किया गया था।
पूर्व में भी हुआ है विवाद
उक्त भूमि को लेकर दोनों समुदाय के लोगों में पूर्व में भी विवाद हुआ था। पिछले दिनों ही ईद उल अजहा के दिन कुर्बानी को लेकर दोनों समुदाय के लोगों में विवाद हो गया था। वाल्मीकि समाज के लोगों ने उक्त भूमि पर कुर्बानी किए जाने का विरोध किया था। तब भी बाबरी थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली थी। पुलिस ने खुले स्थान पर कुर्बानी करने से मना कर दिया था और कुर्बानी के लिए लाए गए पशु हटवाए थे।
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बाबरी थाना क्षेत्र के गांव बंतीखेड़ा निवासी राकेश वाल्मीकि की पत्नी सुदेश (48) की बीमारी के चलते रविवार रात करनाल स्थित हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। सोमवार सुबह अंतिम संस्कार करने की तैयारी चल रही थी। परिवार और समाज के लोगों ने गांव के बाहर स्थित श्मशान की भूमि पर लकड़ी और उपले डालने शुरू कर दिए। इसी दौरान दूसरे समुदाय के लोगों ने उक्त भूमि पर अंतिम संस्कार का विरोध कर दिया। कहा कि यह जमीन कब्रिस्तान की है, यहां दाह संस्कार नहीं होगा।
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इस पर विवाद हुआ और दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए। हंगामा होने पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इसी बीच सूचना मिलने पर बाबरी थानाध्यक्ष देवसिंह रावत पुलिस कर्मियों को साथ लेकर मौके पर पहुंच गए। साथ ही उच्चाधिकारियों को भी सूचना दी गई। एसडीएम शामली प्रशांत कुमार भारती, तहसीलदार अभयराज पांडेय, सीओ थानाभवन अरविंद सिंह राठौर, नायब तहसीलदार सुरेंद्र सिंह, कानूनगो रूपराम और लेखपाल सचिन कुमार भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों के लोगों को समझाबुझाकर शांत किया।
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तहसीलदार ने कानूनगो व लेखपाल से अभिलेखों में उक्त भूमि की जांच कराई। जिसमें बताया गया कि उक्त भूमि खसरा नंबर 872 कब्रिस्तान के रूप में अभिलेख में दर्ज है। फिर अधिकारियों ने दोनों पक्षों के लोगों के साथ बैठक की। विवाद न बढ़े, इसके लिए दोनों पक्षों ने महिला के शव का दाह संस्कार उसी स्थान पर करने पर सहमति जताई। ये भी कहा गया कि अब के बाद यहां पर किसी शव का दाह संस्कार न किया जाए। इसके बाद करीब डेढ़ बजे उसी स्थान पर महिला के शव का दाह संस्कार कर दिया गया। इस दौरान राकेश, भंवर सिंह, श्यामलाल, ब्रजपाल, ओमबीर सिंह, सुनील कुमार, लोकेंद्र सिंह, महावीर, प्रहलाद आदि मौजूद रहे। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए शाम तक बंतीखेड़ा गांव के उस स्थान पर पुलिस तैनात रही।
श्मशान घाट के लिए जमीन चिह्नित करें
बंतीखेड़ा गांव पहुंचे एसडीएम और तहसीलदार ने ग्राम प्रधान लोकेंद्र वर्मा से कहा कि श्मशान घाट के लिए ग्राम पंचायत की खाली भूमि को चिह्नित कराएं। साथ ही ग्राम पंचायत की तरफ से श्मशान घाट बनवाने का प्रस्ताव कराकर निर्माण कराया जाए। ताकि भविष्य में ऐसे विवाद की स्थिति उत्पन्न न होने पाए।
यहीं होता आया है दाह संस्कार
गांव बंतीखेड़ा निवासी लोगों का कहना है कि पिछले 50 वर्षों से उक्त भूमि पर ही अंतिम संस्कार होता आया है। पूर्व में पुरानी परंपरा के मुताबिक यहां शव दफनाए जाते थे, लेकिन कुछ वर्षों से यहीं पर दाह संस्कार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गत 25 मार्च को पाली देवी की मौत और छह माह पूर्व सुधीर तथा ब्रहमपाल की मौत होने पर भी उनके शव का दाह संस्कार इसी स्थान पर किया गया था।
पूर्व में भी हुआ है विवाद
उक्त भूमि को लेकर दोनों समुदाय के लोगों में पूर्व में भी विवाद हुआ था। पिछले दिनों ही ईद उल अजहा के दिन कुर्बानी को लेकर दोनों समुदाय के लोगों में विवाद हो गया था। वाल्मीकि समाज के लोगों ने उक्त भूमि पर कुर्बानी किए जाने का विरोध किया था। तब भी बाबरी थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली थी। पुलिस ने खुले स्थान पर कुर्बानी करने से मना कर दिया था और कुर्बानी के लिए लाए गए पशु हटवाए थे।