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रेहड़ा प्रकरण की शुरू हुई जांच, बयान किए दर्ज
Sun, 23 Jun 2019 12:49 AM IST
Deepak Sharma
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
Published by: Deepak Sharma
Updated Sun, 23 Jun 2019 12:49 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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शामली। रेहड़े पर चारपाई समेत पत्नी को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचने के मामले को लेकर अधिकारियों ने गंभीरता से लिया। डीएम के निर्देश पर एसडीएम, तहसीलदार और एसीएमओ ने सीएचसी पहुंचकर जांच की। दोनों अधिकारियों ने सीएचसी के डाक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों के बयान दर्ज किए।
रेहडे़ पर चारपाई समेत पत्नी को उपचार के लिए सीएचसी पर पहुंचाने के प्रकरण में डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर सुरजीत सिंह, तहसीलदार प्राति सिंह और सीएमओ के निर्देश पर एसीएमओ डा. केपी सिंह सीएचसी में जांच के लिए पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर से प्रकरण की जांच की। दोनों अधिकारियों ने उस समय इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डा. विनोद और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के बयान दर्ज किए।
साथ ही चिकित्साधीक्षक डा. रमेश चंद्रा से भी मामले की जानकारी ली। एसीएमओ डा. केपी सिंह ने बताया कि जांच में पाया गया कि महिला मरीज को डाक्टर ने उपचार कर दवा दी थी। मरीज के परिजनों को मेरठ रेफर करने की बात कही गई थी, लेकिन उन्होंने मेरठ जाने से मना कर दिया था। इस कारण उन्हें दवा देकर घर भेज दिया था। एसीएमओ ने बताया कि एंबुलेंस उपलब्ध न कराने की जांच की गई तो परिजनों की तरफ से एंबुलेंस को कॉल नहीं किया जाना पाया गया। परिजनों ने भी एंबुलेंस को कॉल न करने की बात कही है। एसीएमओ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में महिला के उपचार में डाक्टरों की लापरवाही नहीं पाई गई। उन्होंने चिकित्सकों को इमरजेंसी गेट पर हर समय स्ट्रेचर की व्यवस्था रखने और मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार और बेहतर उपचार के निर्देश देते हुए लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
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मरीज को बेहतर उपचार की व्यवस्था कराई
एसीएमओ डा. केपी सिंह और सीएचसी के चिकित्सा अधिकारी डा. विजेंद्र टीम के साथ पीड़ित महिला अंजू के घर पहुंचे और परिजनों से जानकारी ली। एसीएमओ ने बताया कि मरीज को पांच दिन की और अच्छी दवा उपलब्ध कराई गई है। करीब दो साल से पैरालाइसिस से पीड़ित महिला की करवट बदलते रहने का परिजनों को सुझाव दिया गया है, ताकि घाव जल्दी ठीक हो सके। इसके बाद अगर जरूरत हुई तो मरीज को सीएचसी में भर्ती कर उपचार किया जाएगा। इस दौरान डा. विजेंद्र की तरफ से महिला मरीज के लिए गद्दा उपलब्ध कराया गया है।
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एंबुलेंस के लिए नहीं की गई कॉल
शामली। कलक्ट्रेट में एडीएम आनंद कुमार शुक्ल ने पत्रकारों को जानकारी दी कि रेहड़े पर महिला को ले जाने के मामले में एसडीएम और तहसीलदार को जांच के लिए सीएचसी पर भेजा गया था। पीड़ित पक्ष द्वारा एंबुलेंस के लिए कोई कॉल नहीं होना पाया गया। जांच में पाया गया कि मरीज को पैरालाइसिस से पीड़ित है। सीएचसी पर कमर में घाव होने का उपचार दिया गया था। अगर इस मामले में लापरवाही संबंधी कोई साक्ष्य पाया जाता है तो जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इस दौरान महिला मरीज का पति बॉबी भी मौजूद रहे।
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यह था मामला
शामली। शुक्रवार को मोहल्ला पंसारियान नई बस्ती निवासी बॉबी अपनी पत्नी अंजू को रेहडे पर चारपाई समेत लेकर सीएचसी पर उपचार के लिए पहुंचा था। पैरालाइसिस से पीड़ित महिला के चारपाई पर लेटे रहने के कारण बैड सोर हो गया था। उसकी कमर में घाव बन गए थे। चिकित्सकों ने उपचार और दवा देकर मरीज को घर भेज दिया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई थी। यह खबर मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित होते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। डीएम और सीएमओ ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच बैठा दी है।
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रेहडे़ पर चारपाई समेत पत्नी को उपचार के लिए सीएचसी पर पहुंचाने के प्रकरण में डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर सुरजीत सिंह, तहसीलदार प्राति सिंह और सीएमओ के निर्देश पर एसीएमओ डा. केपी सिंह सीएचसी में जांच के लिए पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर से प्रकरण की जांच की। दोनों अधिकारियों ने उस समय इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डा. विनोद और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के बयान दर्ज किए।
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साथ ही चिकित्साधीक्षक डा. रमेश चंद्रा से भी मामले की जानकारी ली। एसीएमओ डा. केपी सिंह ने बताया कि जांच में पाया गया कि महिला मरीज को डाक्टर ने उपचार कर दवा दी थी। मरीज के परिजनों को मेरठ रेफर करने की बात कही गई थी, लेकिन उन्होंने मेरठ जाने से मना कर दिया था। इस कारण उन्हें दवा देकर घर भेज दिया था। एसीएमओ ने बताया कि एंबुलेंस उपलब्ध न कराने की जांच की गई तो परिजनों की तरफ से एंबुलेंस को कॉल नहीं किया जाना पाया गया। परिजनों ने भी एंबुलेंस को कॉल न करने की बात कही है। एसीएमओ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में महिला के उपचार में डाक्टरों की लापरवाही नहीं पाई गई। उन्होंने चिकित्सकों को इमरजेंसी गेट पर हर समय स्ट्रेचर की व्यवस्था रखने और मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार और बेहतर उपचार के निर्देश देते हुए लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
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मरीज को बेहतर उपचार की व्यवस्था कराई
एसीएमओ डा. केपी सिंह और सीएचसी के चिकित्सा अधिकारी डा. विजेंद्र टीम के साथ पीड़ित महिला अंजू के घर पहुंचे और परिजनों से जानकारी ली। एसीएमओ ने बताया कि मरीज को पांच दिन की और अच्छी दवा उपलब्ध कराई गई है। करीब दो साल से पैरालाइसिस से पीड़ित महिला की करवट बदलते रहने का परिजनों को सुझाव दिया गया है, ताकि घाव जल्दी ठीक हो सके। इसके बाद अगर जरूरत हुई तो मरीज को सीएचसी में भर्ती कर उपचार किया जाएगा। इस दौरान डा. विजेंद्र की तरफ से महिला मरीज के लिए गद्दा उपलब्ध कराया गया है।
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एंबुलेंस के लिए नहीं की गई कॉल
शामली। कलक्ट्रेट में एडीएम आनंद कुमार शुक्ल ने पत्रकारों को जानकारी दी कि रेहड़े पर महिला को ले जाने के मामले में एसडीएम और तहसीलदार को जांच के लिए सीएचसी पर भेजा गया था। पीड़ित पक्ष द्वारा एंबुलेंस के लिए कोई कॉल नहीं होना पाया गया। जांच में पाया गया कि मरीज को पैरालाइसिस से पीड़ित है। सीएचसी पर कमर में घाव होने का उपचार दिया गया था। अगर इस मामले में लापरवाही संबंधी कोई साक्ष्य पाया जाता है तो जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इस दौरान महिला मरीज का पति बॉबी भी मौजूद रहे।
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यह था मामला
शामली। शुक्रवार को मोहल्ला पंसारियान नई बस्ती निवासी बॉबी अपनी पत्नी अंजू को रेहडे पर चारपाई समेत लेकर सीएचसी पर उपचार के लिए पहुंचा था। पैरालाइसिस से पीड़ित महिला के चारपाई पर लेटे रहने के कारण बैड सोर हो गया था। उसकी कमर में घाव बन गए थे। चिकित्सकों ने उपचार और दवा देकर मरीज को घर भेज दिया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई थी। यह खबर मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित होते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। डीएम और सीएमओ ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच बैठा दी है।