{"_id":"5b09af664f1c1b886e8b4c2c","slug":"181527361382-shamli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हत्यारोपी ने जेल से मांगी चिकित्साधीक्षक से आरटीआई, मचा हड़कंप","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
हत्यारोपी ने जेल से मांगी चिकित्साधीक्षक से आरटीआई, मचा हड़कंप
Updated Sun, 27 May 2018 12:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हत्यारोपी ने जेल से मांगी चिकित्साधीक्षक से जानकारी
शामली। मुजफ्फरनगर जेल में बंद एक हत्यारोपी ने नौ साल पूर्व हुई हत्या के मामले में स्वास्थ्य विभाग से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी है। उधर, चिकित्साधीक्षक ने इस संबंध में जेल अधीक्षक को पत्र भेजकर पूछा कि यह चिट्ठी उनकी संज्ञान में है या नहीं?
शामली सीएचसी में दो दिन पूर्व जिला जेल में बंद एक कैदी का पत्र पहुंचा। पत्र भेजने वाले ने अपना नाम, पिता का नाम तथा बैरक नंबर तक लिखा है। पत्र के माध्यम से उसने शामली जिला अस्पताल के अधीक्षक से जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी है कि 2009 में हुए एक मर्डर के मामले में पुलिस एक व्यक्ति को लेकर शामली अस्पताल में पहुंची थी। सवाल में पूछा गया कि पुलिस जब उस व्यक्ति को अस्पताल लेकर पहुंची, तब वह व्यक्ति मर चुका था या फिर उसकी मौत अस्पताल में हुई। डाक्टरों के अनुसार पत्र पर जिला जेल का की कोई मुहर आदि नहीं है, जिससे अस्पताल प्रबंधन असमंजस में है कि यदि जिला जेल प्रशासन के संज्ञान में यह पत्र होता तो इस पर सरकारी मुहर होती और यदि ऐसा नहीं है तो बिना उनकी जानकारी के बिना कैदी द्वारा यह चिट्ठी कैसे लिखी गई। सीएचसी प्रभारी ने इस संबंध में जेल अधीक्षक मुजफ्फरनगर को पत्र लिखकर जवाब मांगा है, ताकि आरटीआई पर अग्रिम कार्रवाई की जा सके। सीएचसी प्रभारी रमेश चंद्रा ने बताया कि इस संबंध में जेल अधीक्षक को पत्र लिखा गया है, ताकि यह बात साफ हो सके कि यह आरटीआई जेल प्रशासन के संज्ञान में है या फिर नहीं।
विज्ञापन
शामली। मुजफ्फरनगर जेल में बंद एक हत्यारोपी ने नौ साल पूर्व हुई हत्या के मामले में स्वास्थ्य विभाग से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी है। उधर, चिकित्साधीक्षक ने इस संबंध में जेल अधीक्षक को पत्र भेजकर पूछा कि यह चिट्ठी उनकी संज्ञान में है या नहीं?
शामली सीएचसी में दो दिन पूर्व जिला जेल में बंद एक कैदी का पत्र पहुंचा। पत्र भेजने वाले ने अपना नाम, पिता का नाम तथा बैरक नंबर तक लिखा है। पत्र के माध्यम से उसने शामली जिला अस्पताल के अधीक्षक से जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी है कि 2009 में हुए एक मर्डर के मामले में पुलिस एक व्यक्ति को लेकर शामली अस्पताल में पहुंची थी। सवाल में पूछा गया कि पुलिस जब उस व्यक्ति को अस्पताल लेकर पहुंची, तब वह व्यक्ति मर चुका था या फिर उसकी मौत अस्पताल में हुई। डाक्टरों के अनुसार पत्र पर जिला जेल का की कोई मुहर आदि नहीं है, जिससे अस्पताल प्रबंधन असमंजस में है कि यदि जिला जेल प्रशासन के संज्ञान में यह पत्र होता तो इस पर सरकारी मुहर होती और यदि ऐसा नहीं है तो बिना उनकी जानकारी के बिना कैदी द्वारा यह चिट्ठी कैसे लिखी गई। सीएचसी प्रभारी ने इस संबंध में जेल अधीक्षक मुजफ्फरनगर को पत्र लिखकर जवाब मांगा है, ताकि आरटीआई पर अग्रिम कार्रवाई की जा सके। सीएचसी प्रभारी रमेश चंद्रा ने बताया कि इस संबंध में जेल अधीक्षक को पत्र लिखा गया है, ताकि यह बात साफ हो सके कि यह आरटीआई जेल प्रशासन के संज्ञान में है या फिर नहीं।
विज्ञापन