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दो इंस्पेक्टर, छह सिपाही के भरोसे जिला शामली
Updated Mon, 22 Jan 2018 11:57 PM IST
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दो इंस्पेक्टर, छह सिपाही के भरोसे जिला शामली
शामली। हरियाणा से सटा होने के कारण शामली जिले में शराब तस्करी जमकर की जाती है। खादर होने के कारण कच्ची शराब की भट्ठियां भी धधकती हैं, लेकिन तस्करों से निपटने के कारण महकमे के पास चंद सिपाही और मात्र दो इंस्पेक्टर ही है। यहीं नही जिला आबकारी अधिकारी तक के पास गाड़ी तक नहीं है। अपर्याप्त संसाधनों के चलते शराब तस्करी और तस्करों पर कार्रवाई का अंदाजा साफ लगाया जा सकता है।
सोमवार को थानाभवन में दबिश डालने गई आबकारी पुलिस पर जानलेवा हमला किया गया, आबकारी सिपाही बाल-बाल बच गए। इस घटना ने आबकारी विभाग के पास अपर्याप्त संसाधनों की कमी को सामने ला दिया। दरअसल, शामली जिले में आबकारी के कैराना और शामली सहित दो सर्किल हैं। इन सर्किल के हिसाब से जिले में दो इंस्पेक्टर तैनात हैं और दोनों इंस्पेक्टरों के पास दो-दो सिपाही है। जिला आबकारी अधिकारी के पास भी कोई सिपाही नहीं है। यहीं नही आबकारी के पास सरकारी गाड़ी नहीं है।
कंपनी की गाड़ी के भरोसे पूरा महकमा
दबिश के दौरान शराब माफिया पर कार्रवाई करने जब आबकारी जाती है तो मजबूरन उन्हें शराब कंपनी की गाड़ियों का प्रयोग करना पड़ता है। ऐसे में कई बार गाड़ी नहीं मिलने पर आबकारी द्वारा कार्रवाई करने में समय भी लग जाता है।
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महकमे के पास संसाधन पर्याप्त नहीं है, बावजूद इसके माफिया पर कार्रवाई करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। स्टाफ और सरकारी गाड़ी की डिमांड के लिए शासन को पत्र लिखा गया है
-राकेश बहादुर सिंह
जिला आबकारी अधिकारी
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शामली। हरियाणा से सटा होने के कारण शामली जिले में शराब तस्करी जमकर की जाती है। खादर होने के कारण कच्ची शराब की भट्ठियां भी धधकती हैं, लेकिन तस्करों से निपटने के कारण महकमे के पास चंद सिपाही और मात्र दो इंस्पेक्टर ही है। यहीं नही जिला आबकारी अधिकारी तक के पास गाड़ी तक नहीं है। अपर्याप्त संसाधनों के चलते शराब तस्करी और तस्करों पर कार्रवाई का अंदाजा साफ लगाया जा सकता है।
सोमवार को थानाभवन में दबिश डालने गई आबकारी पुलिस पर जानलेवा हमला किया गया, आबकारी सिपाही बाल-बाल बच गए। इस घटना ने आबकारी विभाग के पास अपर्याप्त संसाधनों की कमी को सामने ला दिया। दरअसल, शामली जिले में आबकारी के कैराना और शामली सहित दो सर्किल हैं। इन सर्किल के हिसाब से जिले में दो इंस्पेक्टर तैनात हैं और दोनों इंस्पेक्टरों के पास दो-दो सिपाही है। जिला आबकारी अधिकारी के पास भी कोई सिपाही नहीं है। यहीं नही आबकारी के पास सरकारी गाड़ी नहीं है।
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कंपनी की गाड़ी के भरोसे पूरा महकमा
दबिश के दौरान शराब माफिया पर कार्रवाई करने जब आबकारी जाती है तो मजबूरन उन्हें शराब कंपनी की गाड़ियों का प्रयोग करना पड़ता है। ऐसे में कई बार गाड़ी नहीं मिलने पर आबकारी द्वारा कार्रवाई करने में समय भी लग जाता है।
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महकमे के पास संसाधन पर्याप्त नहीं है, बावजूद इसके माफिया पर कार्रवाई करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। स्टाफ और सरकारी गाड़ी की डिमांड के लिए शासन को पत्र लिखा गया है
-राकेश बहादुर सिंह
जिला आबकारी अधिकारी