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...दूषित जल, वायु में अब जहर दिखाई देता है
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शामली। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर व्हाट्सएप के माटी की सुगंध समूह के तत्वावधान में आयोजित कवि सम्मेलन में पर्यावरण प्रदूषण के साथ सांस्कृतिक प्रदूषण की ओर भी विश्व समाज को जागरूक किया।
झज्जर हरियाणा के गीतकार खेमचंद सहगल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। डॉ. जय सिंह आर्य ने अपनी रचना में सांस्कृतिक प्रदूषण पर चोट करते हुए कहा इस प्रजातंत्र का आचरण देखिए, सभ्यता का हुआ है मरण देखिए। शब्द भी अर्थ अपने बदलने लगे, हो रहा अर्थ का भी क्षरण देखिए। अनुपिंद्र सिंह अनूप ने कहा साफ हवा की थी मिली दाद हमें अनमोल, जीना दूभर कर लिया, खुद हमने विष घोल। शीला गहलावत 'सीरत' ने कहा आओ हम सब मिलकर प्रदूषण मिटाएं, स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाएं। केसर कमल ने भी पर्यावरण को बचाने की मुहिम पर जोर दिया हम सब मिलकर पेड़ लगाएं, एक पेड़ हर घर में लगाएं। प्रदूषण ने पृथ्वी जकड़ी, इसको प्रदूषण मुक्त कराएं। डॉ. कृष्णा आर्या ने हरियाणवी गीत सुनाई। प्रीतम सिंह प्रीतम ने वृक्षारोपण की महता पर गीत सुनाया पेड़ से वृष्टि, वृष्टि से सृष्टि, सृष्टि पिता हर पेड़ बना। आक्सीजन, जीवन, औषध, जल, दाता-रक्षक पेड़ बना।
भारत भूषण वर्मा ने अपनी रचनाओं में प्रदूषण का भयावह चित्र खींचा पत्थरों के अब शहर हुए सब, कहर दिखाई देते हैं। दूषित जल, वायु में अब, जहर दिखाई देते हैं। खेमचंद सहगल सुनाया इंसान की फ़ितरत है, जीवों को मिटा देना। जंगलों को जला करके, शहरों को बसा देना। डॉ. पंकज वासिनी, तरुणा पुंडीर 'तरुनिल', श्रीकृष्ण निर्मल, संतोष त्रिपाठी इंदौर, अनिल धीमान पोपट कामचोर, बृजेश सैनी शामली, तेजवीर त्यागी अलीगढ़ ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। संयोजक भारत भूषण वर्मा असंध करनाल रहे। संचालन कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने किया ।
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झज्जर हरियाणा के गीतकार खेमचंद सहगल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। डॉ. जय सिंह आर्य ने अपनी रचना में सांस्कृतिक प्रदूषण पर चोट करते हुए कहा इस प्रजातंत्र का आचरण देखिए, सभ्यता का हुआ है मरण देखिए। शब्द भी अर्थ अपने बदलने लगे, हो रहा अर्थ का भी क्षरण देखिए। अनुपिंद्र सिंह अनूप ने कहा साफ हवा की थी मिली दाद हमें अनमोल, जीना दूभर कर लिया, खुद हमने विष घोल। शीला गहलावत 'सीरत' ने कहा आओ हम सब मिलकर प्रदूषण मिटाएं, स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाएं। केसर कमल ने भी पर्यावरण को बचाने की मुहिम पर जोर दिया हम सब मिलकर पेड़ लगाएं, एक पेड़ हर घर में लगाएं। प्रदूषण ने पृथ्वी जकड़ी, इसको प्रदूषण मुक्त कराएं। डॉ. कृष्णा आर्या ने हरियाणवी गीत सुनाई। प्रीतम सिंह प्रीतम ने वृक्षारोपण की महता पर गीत सुनाया पेड़ से वृष्टि, वृष्टि से सृष्टि, सृष्टि पिता हर पेड़ बना। आक्सीजन, जीवन, औषध, जल, दाता-रक्षक पेड़ बना।
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भारत भूषण वर्मा ने अपनी रचनाओं में प्रदूषण का भयावह चित्र खींचा पत्थरों के अब शहर हुए सब, कहर दिखाई देते हैं। दूषित जल, वायु में अब, जहर दिखाई देते हैं। खेमचंद सहगल सुनाया इंसान की फ़ितरत है, जीवों को मिटा देना। जंगलों को जला करके, शहरों को बसा देना। डॉ. पंकज वासिनी, तरुणा पुंडीर 'तरुनिल', श्रीकृष्ण निर्मल, संतोष त्रिपाठी इंदौर, अनिल धीमान पोपट कामचोर, बृजेश सैनी शामली, तेजवीर त्यागी अलीगढ़ ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। संयोजक भारत भूषण वर्मा असंध करनाल रहे। संचालन कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने किया ।
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