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रियायतों से स्थानीय उद्यमियों को मिल रहा हौसला
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रियायतों से उद्यमियों का बढ़ा हौसला
शामली। मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म उद्योग (एमएसएमई) में मिली रियायतों से कारोबारियों को सहूलियतें मिलीं हैं। उन्हें अपना कारोबार बढ़ाने का हौसला मिल रहा है। हालांकि जिले में कोई नया प्रोजेक्ट अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन स्थानीय उत्पादों को लेकर उद्यमियों की रुचि बढ़ी है।
शामली में रिम-धुरा उद्योग सबसे प्रमुख है। यहां इस उद्योग की 31 इंडस्ट्रीज हैं। इसके अलावा पेपर मिल, स्टील एवं फर्नेस इकाइयां संचालित हैं। सरकार ने एमएसएमई को लेकर कई घोषणाएं की हैं। आईआईए शामली के सचिव अनुज गर्ग बताते हैं कि पिछले कुछ समय से उद्योग में काफी बदलाव हुए हैं। ऋण मिलना आसान हो गया है। लॉकडाउन के बाद 20 प्रतिशत कोविड फंड मिलने से उद्यमियों को बड़ी राहत मिली। यह उद्यमियों को वापस तो करना पड़ेगा, लेकिन संकट के समय नकदी मिलने से उद्यमियों को लाभ हुआ। नए उद्योग लगाने और पुराने में इन्वेस्टमेंट करने में आसानी हो गई है।
चीन के सामान पर प्रहार की तैयारी
देश में चीन निर्मित सामान के बहिष्कार की लहर है। इसका फायदा उठाते हुए स्थानीय उद्यमी भी कुछ नया करना चाहते हैं। आईआईए शामली के सचिव अनुज गर्ग बताते हैं कि आइसक्रीम स्टिक, लकड़ी की चम्मच आदि चीन से आती हैं। उन्होंने अपने इन उत्पादों को बनाने के लिए प्लांट लगाने का प्रयास किया है। फिलहाल यह धरातल पर नहीं उतरा है, लेकिन आगे इसके शुरू होने की संभावना है।
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त्योहारों पर खूब होगी स्थानीय उत्पादों की मांग
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम दास गर्ग का कहना है कि रक्षाबंधन पर लोगों ने स्थानीय राखियों को तरजीह दी। गणेश चतुर्थी पर भी लोगों ने मिट्टी की मूर्तियां बनाईं। दिवाली पर भी स्थानीय उत्पादों की ही मांग ज्यादा रहेगी। लोग स्वदेशी के साथ हैं। दिवाली पर लोग स्थानीय उत्पाद खरीदकर चीन की अर्थव्यवस्था पर करार प्रहार करेंगे।
लोकल उत्पाद ही खरीदेंगे
फोटो...
पूर्व में भी त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों को ही तरजीह दी है, आगे भी स्थानीय उत्पाद ही खरीदेंगे। दिवाली पर मिट्टी के दीप जलाएंगे और चीन निर्मित सामान का बहिष्कार करेंगे।
- मनोज चौधरी
घर नहीं लाएंगे चीन निर्मित सामान
चीन निर्मित सामान का पूर्ण बहिष्कार कर रहे हैं। जब भी बाजार जाते हैं तो कोशिश यही रहती है कि स्थानीय उत्पाद ही खरीदें। इससे देश की पूंजी देश में ही रहेगी और स्थानीय उद्यमियों को लाभ होगा।
- दिनेश जैन।
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शामली। मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म उद्योग (एमएसएमई) में मिली रियायतों से कारोबारियों को सहूलियतें मिलीं हैं। उन्हें अपना कारोबार बढ़ाने का हौसला मिल रहा है। हालांकि जिले में कोई नया प्रोजेक्ट अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन स्थानीय उत्पादों को लेकर उद्यमियों की रुचि बढ़ी है।
शामली में रिम-धुरा उद्योग सबसे प्रमुख है। यहां इस उद्योग की 31 इंडस्ट्रीज हैं। इसके अलावा पेपर मिल, स्टील एवं फर्नेस इकाइयां संचालित हैं। सरकार ने एमएसएमई को लेकर कई घोषणाएं की हैं। आईआईए शामली के सचिव अनुज गर्ग बताते हैं कि पिछले कुछ समय से उद्योग में काफी बदलाव हुए हैं। ऋण मिलना आसान हो गया है। लॉकडाउन के बाद 20 प्रतिशत कोविड फंड मिलने से उद्यमियों को बड़ी राहत मिली। यह उद्यमियों को वापस तो करना पड़ेगा, लेकिन संकट के समय नकदी मिलने से उद्यमियों को लाभ हुआ। नए उद्योग लगाने और पुराने में इन्वेस्टमेंट करने में आसानी हो गई है।
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चीन के सामान पर प्रहार की तैयारी
देश में चीन निर्मित सामान के बहिष्कार की लहर है। इसका फायदा उठाते हुए स्थानीय उद्यमी भी कुछ नया करना चाहते हैं। आईआईए शामली के सचिव अनुज गर्ग बताते हैं कि आइसक्रीम स्टिक, लकड़ी की चम्मच आदि चीन से आती हैं। उन्होंने अपने इन उत्पादों को बनाने के लिए प्लांट लगाने का प्रयास किया है। फिलहाल यह धरातल पर नहीं उतरा है, लेकिन आगे इसके शुरू होने की संभावना है।
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त्योहारों पर खूब होगी स्थानीय उत्पादों की मांग
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम दास गर्ग का कहना है कि रक्षाबंधन पर लोगों ने स्थानीय राखियों को तरजीह दी। गणेश चतुर्थी पर भी लोगों ने मिट्टी की मूर्तियां बनाईं। दिवाली पर भी स्थानीय उत्पादों की ही मांग ज्यादा रहेगी। लोग स्वदेशी के साथ हैं। दिवाली पर लोग स्थानीय उत्पाद खरीदकर चीन की अर्थव्यवस्था पर करार प्रहार करेंगे।
लोकल उत्पाद ही खरीदेंगे
फोटो...
पूर्व में भी त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों को ही तरजीह दी है, आगे भी स्थानीय उत्पाद ही खरीदेंगे। दिवाली पर मिट्टी के दीप जलाएंगे और चीन निर्मित सामान का बहिष्कार करेंगे।
- मनोज चौधरी
घर नहीं लाएंगे चीन निर्मित सामान
चीन निर्मित सामान का पूर्ण बहिष्कार कर रहे हैं। जब भी बाजार जाते हैं तो कोशिश यही रहती है कि स्थानीय उत्पाद ही खरीदें। इससे देश की पूंजी देश में ही रहेगी और स्थानीय उद्यमियों को लाभ होगा।
- दिनेश जैन।