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बदल रहा मौसम, कमजोर हो रही गेहूं की पैदावार

Wed, 17 Mar 2021 11:16 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Mar 2021 11:16 PM IST
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Changing weather, weakening wheat yield
शामली। फरवरी से ही शुरू हुई गर्मी और अब तेज हवा के कारण गेहूं का उत्पादन गिरने के आसार बन गए हैं। समय से पहले ही गेहूं की फसल सुनहरी होने लगी है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादा तापमान और तेज हवा से गेहूं की फसल में पीलापन आने से दूधिया दाना सिकुड़ जाएगा, जिससे 10 से 15 प्रतिशत उत्पादन घटने की आशंका है।
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जिले में आमतौर पर गेहूं की फसल अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में पककर तैयार होती है तभी कटाई शुरू हो पाती है। थ्रेसिंग के बाद बिक्री के लिए अप्रैल माह के तीसरे सप्ताह में खरीद केंद्रों पर गेहूं आना शुरू होता है। इस बार फरवरी माह में तापमान बढ़ना शुरू हो गया। ज्यादा तापमान और तेज हवा मार्च के माह में जारी रहने से समय से पूर्व यमुना खादर में गेहूं की फसल में बालियां सुनहरी होनी शुरू हो गईं हैं।
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शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शीशपाल सिंह कहना है कि गेहूूूं की फसल के लिए तापमान 28 से लेकर 30 डिग्री सेल्सियस तक अनुकूल माना गया है। मौजूदा समय में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक चल रहा है। ज्यादा तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल में पीलापन बढ़ जाता है। गेहूं की फसल में पीलापन आने का असर रेतीली और बलुवा भूमि में होता है। रेतली भूमि में जलधारण करने की क्षमता कम होती है।
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शामली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक के मुताबिक गेहूं की फसल के लिए सामान्य से अधिक तापमान चल रहा है। रेतली भूमि में पानी लंबे समय तक न रुकना माना जा रहा है। जिससे गेहूं के खेत में नमी की कमी हो जाती है। गेहूं के खेतों में नमी न होने से मौजूद समय में दूधिया गेहूं का दाना पकना शुरू हो जाएगा। दाना सिकुड़ जाने से कमजोर और छोटा हो जाएगा, जो गेहूं की फसल के उत्पादन को 10 से 15 प्रतिशत प्रभावित कर सकता है।
हल्की सिंचाई करने से दूर होगा पीलापन
शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के मुताबिक जिन किसानों की गेहूं की फसल में पीलापन आ रहा है वे फसल में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें। हल्की सिंचाई करने से पीलापन दूूर हो जाएगा। गेहूं का दाना अपने समय में विकसित होगा।

49800 हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बुआई
जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरिशंकर सिंह का कहना है कि जिले में गेहूं की बुवाई गन्ना, धान और ज्वार कटाई के बाद बोया जाता है। गेहूं की नवंबर माह से लेकर 15 जनवरी तक पछेती बुआई की जाती है। 49 हजार 800 हेक्टेयर रकबे में गेहूं की फसल की बुआई हुई है। जिला मुख्यालय पर गेहूं की फसल हरी और दूधिया अवस्था में है।
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