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Shamli News: एनसीआर के जिलों में पराली जलाने के मामले घटे

Sun, 13 Oct 2024 12:01 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sun, 13 Oct 2024 12:01 AM IST
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Cases of stubble burning decreased in NCR districts
शामली। प्रदेशभर में पराली जलाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 15 सितंबर से लेकर 11 अक्तूबर तक शासन द्वारा जारी रिपोर्ट में प्रदेश में 220 जगह पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। जिनमें सबसे अधिक अलीगढ़ में 64 मामले हैं। जबकि एनसीआर के मुजफ्फरनगर में अभी तक एक भी पराली जलाने का मामला सामने नहीं आया।
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शामली, मेरठ, सहारनपुर और बागपत, बिजनौर में एक-एक मामला पराली जलाने का सामने आया है। जिनकी जांच कृषि विभाग के अधिकारी कर रहे हैं। यानी एनसीआर में इस बार पराली जलाने के अभी तक मामले कम हैं। बुलंदशहर में 17 मामले अभी तक सामने आ चुके हैं। सर्दी की दस्तक के साथ ही प्रदेशभर में पराली जलाने के मामले सामने आने लगते हैं। प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र में पराली जलाने के कारण स्मॉग से लोगों को अधिक परेशानी होती है।
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जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि इस बार एनसीआर के जिलों में पराली जलाने के मामले कम हैं। 11 अक्तूबर तक प्रदेश में सबसे अधिक 64 मामले अलीगढ़, बुलंदशहर में 17 मामले सामने आए। जबकि मुजफ्फरनगर समेत 45 जिलों में अभी तक कोई भी पराली जलाने का मामला सामने नहीं आया। हापुड़ में दो तो गाजियाबाद में छह मामले सामने आए हैं। बताया कि जिले में एक मामला ऊन क्षेत्र में मिला, जिसमें कूड़े के अवशेष जलाए जा रहे थे। मामले की जांच की जा रही है। संवाद
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पराली जलाने के बजाए यह करें किसान
डीएम रविंद्र चौहान ने कहा खेत में आग नहीं लगाएं। मुख्यमंत्री की मंशा है पराली प्रबंधन से किसानों की आय बढ़ाई जाए। इसे मूर्त रूप देने के लिए किसानों को नि:शुल्क वेस्ट डी-कंपोजर कैप्सूल दिए जा रहे हैं। किसान इसका प्रयोग करें और पराली/कृषि अवशेष को खाद बनाते हुए फसल पैदावार को बढ़ावा दें।



एनसीआर के इन जिलों में पराली जलाने का कोई मामला नहीं
मुजफ्फरनगर, आगरा, इलाहाबाद, अंबेडकरनगर, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, बइराइच, बलरामपुर, बांदा, बरेली, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, इटावा, फररुखाबाद, फतेहपुर, कानपुर, लखनऊ, वाराणसी समेत 45 जिले।
प्रदेश के इन जिलों में पराली जलाने के बढ़े मामले
अलीगढ़ में 64, बुलंदशहर में 17, मथुरा में 26, संभल में 30, सीतापुर में 11, गौतमबुद्धनगर 11, मुरादाबाद 7, गाजियाबाद 6, शाहजहांपुर 7, बाराबांकी 4, एटा 3, हापुड़ 2, हाथरस 4, खेरी में 2, पीलीभीत 2, मैनपुरी 3, रामपुर 3

इन जिलो में पराली जलाने का एक-एक मामला आया सामने
शामली, सहारनपुर, मेरठ , औरैया, बागपत, बलिया, बिजनौर, हरदौई, कासगंज, कौशांबी, उन्नाव 1

फैक्ट फाइल..
प्रदेश में 15 सितंबर से लेकर 11 अक्तूबर तक पराली जलाने के ये मामले आए सामने
वर्ष पराली जलाने के मामले
2024 220
2023 235
2022 80
2021 178
2022 214
नोट: आंकड़ा कृषि विभाग से लिया गया है।

15 हजार रुपये के जुर्माने का है प्रावधान
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार पराली जलने से हानिकारक गैस जैसे कार्बन डाईऑक्साइड एवं कार्बन मोनो ऑक्साइड निकलती है। वातावरण में इसके फैलने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सांस संबंधित बीमारियां बढ़ जाती है। पराली जलाने पर सैटेलाइट से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। दो एकड़ से कम में पराली जलाने पर 2500 व इससे अधिक में 5000 और पांच एकड़ से अधिक में 15 हजार रुपये तक के जुर्माने का नियम है। कहा कि पराली जलाने से खेत की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।



पराली जलाने के कारण पर्यावरण प्रदूषित होता है। बिगड़ता पर्यावरण भी सभी के लिए हानिकारक होता है। इसे बचाने के लिए हर किसी को धान की पराली और कृषि अवशेषों को खेतों में जलाने से बचना चाहिए।किसानों को अभियान चलाकर भी जागरूक किया जा रहा है।

प्रदीप कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी शामली
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