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झलकारी बाई के बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान
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झलकारी बाई के बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान
ऊन। क्षेत्र के गांव भोगीमाजरा में वीरांगना झलकारी बाई कोरी की जयंती मनाई गई। समाज के लोगों से उनकी बहादुरी से प्रेरणा लेते हुए अपने जीवन को देशभक्ति एवं कर्तव्य मार्ग पर ले जाने का आह्वान किया गया।
रविवार को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मुकेश कुमार कोरी एवं अजब सिंह कोरी ने संयुक्त रूप से किया। मुख्य वक्ता मुकेश कोरी ने झलकारी बाई कोरी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि झलकारी बाई रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना की सेनापति थी। वह बिल्कुल रानी लक्ष्मी बाई जैसी दिखती थीं। 1857 की क्रांति में जब अंग्रेजों ने झांसी के किले पर हमला किया, तो एक सैनिक ने गद्दारी करके महल का दरवाजा खोल दिया था। लेकिन झलकारी बाई ने रानी को पिछले दरवाजे से निकाल दिया और खुद अंग्रेजों से लड़ी और देशसेवा पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इस मौके पर मोहनलाल कोरी, प्रदीप कुमार कोरी आदि ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद कुमार कोरी ने किया।
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ऊन। क्षेत्र के गांव भोगीमाजरा में वीरांगना झलकारी बाई कोरी की जयंती मनाई गई। समाज के लोगों से उनकी बहादुरी से प्रेरणा लेते हुए अपने जीवन को देशभक्ति एवं कर्तव्य मार्ग पर ले जाने का आह्वान किया गया।
रविवार को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मुकेश कुमार कोरी एवं अजब सिंह कोरी ने संयुक्त रूप से किया। मुख्य वक्ता मुकेश कोरी ने झलकारी बाई कोरी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि झलकारी बाई रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना की सेनापति थी। वह बिल्कुल रानी लक्ष्मी बाई जैसी दिखती थीं। 1857 की क्रांति में जब अंग्रेजों ने झांसी के किले पर हमला किया, तो एक सैनिक ने गद्दारी करके महल का दरवाजा खोल दिया था। लेकिन झलकारी बाई ने रानी को पिछले दरवाजे से निकाल दिया और खुद अंग्रेजों से लड़ी और देशसेवा पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इस मौके पर मोहनलाल कोरी, प्रदीप कुमार कोरी आदि ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद कुमार कोरी ने किया।
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