{"_id":"5a6388ac4f1c1ba5268b5a5d","slug":"buses-are-private-but-color-government","type":"story","status":"publish","title_hn":"बसें तो प्राइवेट हैं, पर रंग सरकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बसें तो प्राइवेट हैं, पर रंग सरकारी
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Sat, 20 Jan 2018 11:51 PM IST
विज्ञापन
दिल्ली बस अड्डे पर खड़ी रोडवेज के रंग में रंगी प्राइवेट बस।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली में यात्रियों को गुमराह करने के लिए प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने अपनी बसों को उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के रंग में रंग दिया है। रंग ही नहीं, बल्कि परिवहन निगम के लोगो का इस्तेमाल भी धड़ल्ले से किया जा रहा है। ऐसा करके उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को भी राजस्व के रूप में चूना लगाया जा रहा है, तो नियमों का उल्लंघन भी हो रहा है। बावजूद इसके परिवहन निगम और एआरटीओ इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम शामली डिपो से 21 अनुबंधित बसों का संचालन हो रहा है, जबकि प्राइवेट 48 बसें ऐसी हैं, जिन्हें प्रदेश मुख्यालय से स्वीकृति मिलने पर पांच हजार रुपये प्रतिमाह रॉयल्टी जमा करके संचालित किया जा रहा है। खास बात यह है कि इन प्राइवेट बसों को नियमानुसार परिवहन निगम की बसों के रंग के अनुरूप नहीं रंगा जा सकता है तथा परिवहन निगम का लोगो भी इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि अधिकांश इन प्राइवेट बसों को परिवहन निगम के रंग में ही रंग दिया गया है। इसके अलावा परिवहन निगम का लॉगो भी इस्तेमाल हो रहा है। शामली में अजंता चौक स्थित बस अड्डे से ही इन बसों का संचालन हो रहा है, जो शामली से बड़ौत और लोनी तक संचालित हो रही हैं। अधिकारियों की आंखों के सामने ही यह बसें खड़ी होती हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके अलावा कुछ प्राइवेट बसें ऐसी हैं, जिन पर यात्रियों को गुमराह करने के लिए उत्तर प्रदेश परिवार, दिल्ली हिपो, बड़ौत हिपो लिखकर संचालन किया जा रहा है। रॉयल्टी जमा करके संचालित होने वाली बसों पर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के अधीन लिखा होना चाहिए तथा बस के फ्रंट पर डिपो का नाम अंकित होना चाहिए, लेकिन उसका भी पालन नहीं हो रहा है।
-- परिवहन निगम की आमदनी पर असर
प्राइवेट बसों को परिवहन निगम के रंग में रंगने के कारण यात्री असमंजस में आ जाते हैं।प्राइवेट बस को रोडवेज की बस समझकर सवार हो जाते हैं। इस वजह से प्राइवेट बस ऑपरेटरों की चांदी होती है, तो उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की आमदनी को चपत लगती है।
विज्ञापन
एक-दूसरे के पाले में फेंक रहे गेंद
सरकारी रंग में रंगी और नियमों का उल्लंघन कर रही प्राइवेट बसों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम और उपसंभागीय परिवहन अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। कार्रवाई के लिए एक दूसरे के पाले में गेंद फेंकी जा रही है और तर्क दिया जाता है कि इसमें हमें कार्रवाई का अधिकार नहीं है।
--- वर्जन --
नियमों का उल्लंघन कर रही प्राइवेट बसों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के पास अधिकार नहीं है। एआरटीओ ही इनके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। पूर्व में कई बार इस बारे में एआरटीओ को पत्राचार किया जा चुका है। -- राजेंद्र सिंह चौहान, स्टेशन अधीक्षक, शामली डिपो
--- वर्जन --
पांच दिन पूर्व ही इस प्रकार की एक प्राइवेट बस को पकड़ा गया था, तब परिवहन निगम के अधिकारियों से भी बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि उक्त बस रॉयल्टी जमा करके संचालित हो रही है, जिसके चलते बस को छोड़ दिया गया था। यदि टैक्स, परमिट और निर्धारित रूट पर बस का संचालन नहीं होता है, तो कार्रवाई होगी। रंग और लॉगो के इस्तेमाल के संबंध में परिवहन निगम के अधिकारियों को कार्रवाई का अधिकार है। -- मुंशीलाल, एआरटीओ
विज्ञापन
विज्ञापन