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Shamli News: मामौर झील पर प्रवासी पक्षियों की अठखेलियां देखने के लिए पहुंच रहे दर्शक
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कैराना में मामौर झील में अठखेलियां करते प्रवासी पक्षी-संवाद
कैराना। जैसे ही सर्दी का मौसम शुरू हुआ, हिमालय और दूर-दूर देशों से प्रवासी पक्षी मामौर झील की ओर उड़ान भरने लगे। साइबेरिया, मंगोलिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों से आए ये प्रवासी पक्षी चार महीने के प्रवास के लिए झील पर ठहरते हैं। जैसे ही गर्मी का मौसम आता है, वैसे ही ये वापस लौट जाते हैं। प्रवासी पक्षियों की अठखेलियां देखने के लिए दर्शक भी झील पर पहुंच रहे हैं।
अक्तूबर के अंत से ही मामौर झील पर पक्षियों की चहचहाहट और उड़ान देखने को मिल रही है। सुबह के समय पक्षियों की संख्या सबसे अधिक होती है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार बृहस्पतिवार को झील पर ऑस्ट्रेलियन स्वामफेन, रेड वाटल्ड लेपविंग, साइबेरियन क्रेन के साथ-साथ ग्रे लेग गूज, पोचर्डस, स्टॉर्क, व्हाइट टेल्ड ईगल और पेंडुलाइन टिट उड़ते दिखाई दिए। झील के ऊपर पक्षियों की उड़ान देखकर पर्यटक और पक्षी प्रेमी मंत्रमुग्ध हो गए।
बर्ड वाचिंग मेला
हर साल की तरह इस बार भी दो फरवरी को मामौर झील पर बर्ड वाचिंग मेला आयोजित किया जाएगा। इस दौरान स्कूली छात्र और पक्षी प्रेमी दूरबीन से झील पर उड़ान भरते प्रवासी पक्षियों का आनंद लेंगे।
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विशेषज्ञों की सलाह
नमामि गंगे परियोजना के जिला अधिकारी और पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सोनू कुमार ने बताया कि दिसंबर और जनवरी में प्रवासी पक्षियों की संख्या सबसे अधिक होती है। झील पर ठंडी हवाओं और पर्याप्त भोजन के कारण पक्षियों को अनुकूल वातावरण मिलता है। अब पक्षियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़नी शुरू हो गई है।
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अक्तूबर के अंत से ही मामौर झील पर पक्षियों की चहचहाहट और उड़ान देखने को मिल रही है। सुबह के समय पक्षियों की संख्या सबसे अधिक होती है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार बृहस्पतिवार को झील पर ऑस्ट्रेलियन स्वामफेन, रेड वाटल्ड लेपविंग, साइबेरियन क्रेन के साथ-साथ ग्रे लेग गूज, पोचर्डस, स्टॉर्क, व्हाइट टेल्ड ईगल और पेंडुलाइन टिट उड़ते दिखाई दिए। झील के ऊपर पक्षियों की उड़ान देखकर पर्यटक और पक्षी प्रेमी मंत्रमुग्ध हो गए।
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बर्ड वाचिंग मेला
हर साल की तरह इस बार भी दो फरवरी को मामौर झील पर बर्ड वाचिंग मेला आयोजित किया जाएगा। इस दौरान स्कूली छात्र और पक्षी प्रेमी दूरबीन से झील पर उड़ान भरते प्रवासी पक्षियों का आनंद लेंगे।
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विशेषज्ञों की सलाह
नमामि गंगे परियोजना के जिला अधिकारी और पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सोनू कुमार ने बताया कि दिसंबर और जनवरी में प्रवासी पक्षियों की संख्या सबसे अधिक होती है। झील पर ठंडी हवाओं और पर्याप्त भोजन के कारण पक्षियों को अनुकूल वातावरण मिलता है। अब पक्षियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़नी शुरू हो गई है।