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विपिन की कामयाबी से हर्षित हुआ भंदौडा 

Fri, 02 Jun 2017 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली Updated Fri, 02 Jun 2017 12:06 AM IST
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Bhandoda is happy with the success of Vipin
गांव भंदौड़ा में मिठाई खिलाकर खुशी मनाते विपिन शर्मा के परिजन। - फोटो : amar ujala
शामली के ग्रामीण परिवेश में रहकर प्रारंभिक पढ़ाई देहात के स्कूलों से करने वालों की मेहनत के आगे सफलता नतमस्तक हो जाती है। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है भंदौडा गांव के विपिन शर्मा ने। जो साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पिता 10 वीं, तो माता महज 8 वीं पास है। बावजूद इसके विपिन शर्मा ने संघ लोक सेवा आयोग में चयनित होने का गौरव प्राप्त किया। उसकी इस कामयाबी से भंदौड़ा गांव में खुशी का माहौल है। 
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गांव भंदौड़ा निवासी अशोक कुमार शर्मा उर्फ ज्ञानेश्वर शर्मा के दो बेटे हैं, जिनमें बड़ा बेटा सचिन शर्मा इन दिनों सऊदी अरब में अपना बिजनेस करता है। पूर्व में वह सऊदी में ही एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता था। परिवार के पास करीब 163 बीघा कृषि भूमि है। विपिन की मां सुदेश 8 वीं पास हैं, जबकि पिता अशोक शर्मा 10 वीं पास हैं। दादा रामदत्त शर्मा 1983 में भंदौडा के ग्राम प्रधान चुने गए, जबकि 2010 में अशोक शर्मा ग्राम प्रधान चुने गए थे। 

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परिवार के लोगों को बुधवार रात मालूम चला कि विपिन शर्मा का चयन संघ लोक सेवा आयोग में हो गया है और उसको 1065 वीं रेंक प्राप्त हुई है। इस जानकारी के मिलने पर परिवार में खुशी छा गई। वहीं, बृहस्पतिवार सुबह उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ लगी रही। लोगों ने मिठाई खिलाकर विपिन शर्मा के पिता को बधाई दी।  परिजनों के मुताबिक विपिन शर्मा ने गांव के प्राथमिक विद्यालय में पांचवीं तक, जनता इंटर कॉलेज बाबरी से इंटर की पढ़ाई की। इसके बाद सहारनपुर के राजकीय पालीटेक्निक और कमला नेहरू इंस्टीट्यूट से बीटेक किया। फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमटेक किया। नेट और गेट की परीक्षा उत्तीर्ण की। इन दिनों वह नोएडा में उड़ान कोचिंग सेंटर संचालित करता है। 

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खेत में नहीं जाऊंगा, मुझे पढ़ाई करने दो
 विपिन शर्मा के दादा रामदत्त शर्मा बताते हैं कि विपिन बचपन से ही आईएएस बनना चाहता था। एक बार का वाकया सुनाते हुए उन्होंने बताया कि वह विपिन से खेत में जाकर कृषि कार्य करने के लिए कह रहे थे, तो विपिन अपनी किताबें उठाकर कमरे में चला गया और बोला कि मुझे खेत में नहीं जाना, मैं तो अपनी पढ़ाई करूंगा। रामदत्त शर्मा ने बताया कि अन्य बच्चों की तरह विपिन खेलकूद में ज्यादा समय नहीं लगाता था, बल्कि अधिकांश समय पढ़ाई पर ही खर्च करता था। उन्हें उम्मीद थी कि पोता एक दिन कामयाब जरूर होगा।


ग्रामीण छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत है विपिन 
आईएएस और आईपीएस बनने का सपना संजोने वाले ग्रामीण अंचल के छात्र-छात्राओं के लिए विपिन शर्मा किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। आमतौर पर यह धारणा होती है कि ग्रामीण अंचल में पढ़ाई करके ज्यादा तरक्की नहीं की जा सकती है। इस कारण बच्चे अपने अभिभावकों पर शहरी क्षेत्र के महंगे और चकाचौंध वाले स्कूलों में पढ़ाई करने की इच्छा जताते हैं। विपिन शर्मा की कामयाबी ने स्पष्ट कर दिया है कि पढ़ाई चाहे जहां की जाए, मगर उसमें सच्ची लग्न और कड़ी मेहनत जरूर होनी चाहिए, तभी कामयाबी हासिल होती है।

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