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बीज और खाद के लिए तरसे किसान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:41 AM IST
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बुढ़ाना में बैंक में नोट न मिलने से गुस्साए लोगों को समझाते पुलिसकर्मी एवं चरथावल बैंक में नोटबंदी के कारण लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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शामली। नोटबंदी के कारण देहात की अर्थ व्यवस्था चौपट हो गई है। पुराने नोटों से किसानों को बीज और खाद नहीं मिल रहा है। सहकारी समिति और जिला सहकारी बैंकों ने अपने हाथ खडे़ कर दिए हैं। इसका गेहूं की बुवाई पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
गांव कुरावा के किसान प्रधान चरण सिंह, गांव खेड़ा मस्तान के सोमपाल मलिक, फुगाना के ओमप्रकाश मलिक, बिटावदा के प्रधान मंगलू उर्फ प्रदीप का कहना है कि गांव के किसानों का संपर्क सहकारी समितियों और जिला सहकारी बैंक से अधिक होता है। दोनों जगह 500, 1000 के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। खेत तैयार हैं, लेकिन खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।
नए नोट लेने के लिए किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। किसानों का कहना है कि नोटबंदी का कृषि पर विपरीत प्रभाव पडे़गा। सरकार ने किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया तो पैदावार आधी रह जाएगी। देहातों के विकास कार्य ठप हो गए हैं। पैसे के अभाव में निर्माण कार्य नहीं हो पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार ने बच्चों की फीस, बीज व खाद में पांच सौ व हजार के नोटों का चलन आरंभ नहीं किया तो फसलों के उत्पादन में विपरीत प्रभाव पडे़गा।
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वहीं, बुढ़ाना में नोटबंदी से बैंकों के बाहर लगने वाली भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। दिन प्रतिदिन भीड़ बढ़ती ही जा रही है। नोट बदलने और जमा करने को लेकर कतारों में धक्का मुक्की होने लगी है। रुपये नहीं होने के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है।
कस्बे के भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नैशनल बैंक और इलाहाबाद बैंक की शाखाओं में लाइनों के बीच में घुसने को लेकर ग्राहकों की आपस में धक्का मुक्की हुई। पुलिस माहौल को शांत करने में लगी हुई है। नोट बदलने व जमा करने को लेकर कई दिनों से लाइन में लगे लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। लाइनों में लगे अमित कुमार, प्रदीप कुमार, संदीप कुमार, अरविंद कुमार आदि का कहना है कि बच्चों की फीस और मोटे खर्चों के कारण वे परेशान हैं। काम धंधा छोड़ पूरे दिन लाइन में लगना पड़ रहा है।
कस्बे के सभी एटीएम शोपीस बने हैं। कस्बा, देहात के लोगों का जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। नोटबंदी के 10 दिन बाद भी हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। जौला गांव में सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की शाखा पर नोट बदलने को लेकर लाइन में लगे शमशाद ने हंगामा किया तो पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया। शमशाद ने पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी की। गुस्से में आए जौला के ग्रामीणों ने शमशाद को पुलिस के हवाले कर दिया। भीड़ के बीच हंगामा करने वाले जौला के ग्रामीण शमशाद को पुलिस ने जेल भेज दिया।
उधर, चरथावल में कोई भी बैंक आम ग्राहकों को पुराने नोट बदलने को तैयार नहीं है। एसबीआई में साढ़े तीन बजे कैश खत्म होने की बात कही तो लोगों ने हंगामा किया। नोटबंदी का फार्मूला लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। सुबह आठ बजे से ही बैंकों में लाइन लगनी शुरू होती है। अधिकांश बैंक तीन बजे बाद से ही ग्राहकों का गेट के अंदर प्रवेश पर आनाकानी शुरू कर रहे हैं। एसबीआई में साढ़े तीन बजे के बाद लोगों को कैश खत्म होना बताया गया तो लाइन में लगे सैकड़ों लोगों ने हंगामा किया। उसके बाद बैंक ने चेहरा देखकर ही चंद लोगों की एंट्री बैंक में कराई गई।
दधेडू कलां पीएनबी में भी दो हजार से अधिक का भुगतान नहीं दिया गया। किसी भी बैंक में पुराने नोट नहीं बदलने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में खासा रोष है। शैलेंद्र, सुशील कुमार, शुभम गर्ग, जितार्थ और मनीष का आरोप है कि पुराने नोट बदलने में कुछ बैंकों में दलाल सक्रिय हो गए हैं। जिसका खामियाजा लाइन में लगे लोगों को भुगतना पड़ रहा है। इससे राहत दिलाए।
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गांव कुरावा के किसान प्रधान चरण सिंह, गांव खेड़ा मस्तान के सोमपाल मलिक, फुगाना के ओमप्रकाश मलिक, बिटावदा के प्रधान मंगलू उर्फ प्रदीप का कहना है कि गांव के किसानों का संपर्क सहकारी समितियों और जिला सहकारी बैंक से अधिक होता है। दोनों जगह 500, 1000 के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। खेत तैयार हैं, लेकिन खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।
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नए नोट लेने के लिए किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। किसानों का कहना है कि नोटबंदी का कृषि पर विपरीत प्रभाव पडे़गा। सरकार ने किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया तो पैदावार आधी रह जाएगी। देहातों के विकास कार्य ठप हो गए हैं। पैसे के अभाव में निर्माण कार्य नहीं हो पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार ने बच्चों की फीस, बीज व खाद में पांच सौ व हजार के नोटों का चलन आरंभ नहीं किया तो फसलों के उत्पादन में विपरीत प्रभाव पडे़गा।
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वहीं, बुढ़ाना में नोटबंदी से बैंकों के बाहर लगने वाली भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। दिन प्रतिदिन भीड़ बढ़ती ही जा रही है। नोट बदलने और जमा करने को लेकर कतारों में धक्का मुक्की होने लगी है। रुपये नहीं होने के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है।
कस्बे के भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नैशनल बैंक और इलाहाबाद बैंक की शाखाओं में लाइनों के बीच में घुसने को लेकर ग्राहकों की आपस में धक्का मुक्की हुई। पुलिस माहौल को शांत करने में लगी हुई है। नोट बदलने व जमा करने को लेकर कई दिनों से लाइन में लगे लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। लाइनों में लगे अमित कुमार, प्रदीप कुमार, संदीप कुमार, अरविंद कुमार आदि का कहना है कि बच्चों की फीस और मोटे खर्चों के कारण वे परेशान हैं। काम धंधा छोड़ पूरे दिन लाइन में लगना पड़ रहा है।
कस्बे के सभी एटीएम शोपीस बने हैं। कस्बा, देहात के लोगों का जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। नोटबंदी के 10 दिन बाद भी हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। जौला गांव में सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की शाखा पर नोट बदलने को लेकर लाइन में लगे शमशाद ने हंगामा किया तो पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया। शमशाद ने पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी की। गुस्से में आए जौला के ग्रामीणों ने शमशाद को पुलिस के हवाले कर दिया। भीड़ के बीच हंगामा करने वाले जौला के ग्रामीण शमशाद को पुलिस ने जेल भेज दिया।
उधर, चरथावल में कोई भी बैंक आम ग्राहकों को पुराने नोट बदलने को तैयार नहीं है। एसबीआई में साढ़े तीन बजे कैश खत्म होने की बात कही तो लोगों ने हंगामा किया। नोटबंदी का फार्मूला लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। सुबह आठ बजे से ही बैंकों में लाइन लगनी शुरू होती है। अधिकांश बैंक तीन बजे बाद से ही ग्राहकों का गेट के अंदर प्रवेश पर आनाकानी शुरू कर रहे हैं। एसबीआई में साढ़े तीन बजे के बाद लोगों को कैश खत्म होना बताया गया तो लाइन में लगे सैकड़ों लोगों ने हंगामा किया। उसके बाद बैंक ने चेहरा देखकर ही चंद लोगों की एंट्री बैंक में कराई गई।
दधेडू कलां पीएनबी में भी दो हजार से अधिक का भुगतान नहीं दिया गया। किसी भी बैंक में पुराने नोट नहीं बदलने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में खासा रोष है। शैलेंद्र, सुशील कुमार, शुभम गर्ग, जितार्थ और मनीष का आरोप है कि पुराने नोट बदलने में कुछ बैंकों में दलाल सक्रिय हो गए हैं। जिसका खामियाजा लाइन में लगे लोगों को भुगतना पड़ रहा है। इससे राहत दिलाए।