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गर्मी में बरते सावधानी, हीट स्ट्रोक का खतरा
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शामली। गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ता जा रहा है। साथ ही गर्म हवा चल रही है। ऐसे में हीट स्ट्रोक होने का खतरा रहता है। लोगों को गर्मी से बचाव के लिए अभी से सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे मौसम में जरा सी लापरवाही सेहत के लिए भारी पड़ सकती है।
अप्रैल माह के शुरू से ही मौसम गर्म हो रहा है। इस महीने में मई जैसी गर्मी का अहसास होने के साथ गर्म हवा भी चल रही है। लोगों की सेहत पर गर्मी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है। वैसे तो सभी उम्र के लोग गर्मी से प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन खासतौर से बच्चों में उल्टी दस्त और वायरल बुखार ज्यादा हो रहा है। संभावना जताई जा रही है इसी महीने में तापमान में और बढ़ोत्तरी होगी। तापमान बढ़ेगा तो शरीर में हीट स्ट्रोक होने का खतरा रहेगा। ज्यादा तापमान यानि दोपहर के समय लगातार लंबे समय तक धूप में रहने से हीट स्ट्रोक होने का डर होता है। इसमें शरीर में पानी और नमक की मात्रा कम हो जाती है और पसीना आना बंद हो जाता है। फिजिशियन डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि गर्मी के मौसम में हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है। अभी हीट स्ट्रोक के हल्के लक्षण वाले मरीज आ रहे हैं, लेकिन गर्मी बढ़ने पर हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाएगा, इसलिए अभी से धूप व गर्मी से बचाव के इंतजाम कर लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वेदभानू मलिक ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ बच्चों में उल्टी दस्त और वायरल बुखार के केस बढ़े हैं। गर्म हवा यानि लू लगने से हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है। दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक धूप में बाहर न निकले। अगर बाहर निकलना जरूरी है तो सावधानी बरतें और धूप से बचाव के इंतजाम के साथ निकले। मौसमी फलों के साथ पानी और घर के बने तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें। बाजार में गन्ने का जूस, रंग बिरंगे कोल्ड ड्रिंक्स, कटे हुए फल आदि का सेवन करने से बचे। इससे पेट में संक्रमण होने से बीमार होने का खतरा रहता है।
हीट स्ट्रोक के लक्षण:
चक्कर आना, सिर घूमना व उल्टी होना
बैचेनी और घबराहट होना
त्वचा गर्म, लाल व सूखी होना।
धड़कन तेज होना, सांस लेने में परेशानी।
दौरे पड़ना, बेहोशी होना।
बचाव:
घर से बाहर निकलते समय दो गिलास पानी पीये।
नारियल पानी, नींबू, दही लस्सी, सत्तु का सेवन करें।
मौसमी फल तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि का सेवन करें।
जरूरी होने पर दोपहर में छाता या सिर ढककर घर के बाहर निकलें।
अधिकतर काम सुबह व शाम को निबटाएं।
सुबह-शाम हल्का सुपाच्य भोजन लें।
कोल्ड ड्रिंक का सेवन न करें, घर के बने तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें।
बाजार में कटे फटे फलों का सेवन न करें।
लू लगने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।
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अप्रैल माह के शुरू से ही मौसम गर्म हो रहा है। इस महीने में मई जैसी गर्मी का अहसास होने के साथ गर्म हवा भी चल रही है। लोगों की सेहत पर गर्मी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है। वैसे तो सभी उम्र के लोग गर्मी से प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन खासतौर से बच्चों में उल्टी दस्त और वायरल बुखार ज्यादा हो रहा है। संभावना जताई जा रही है इसी महीने में तापमान में और बढ़ोत्तरी होगी। तापमान बढ़ेगा तो शरीर में हीट स्ट्रोक होने का खतरा रहेगा। ज्यादा तापमान यानि दोपहर के समय लगातार लंबे समय तक धूप में रहने से हीट स्ट्रोक होने का डर होता है। इसमें शरीर में पानी और नमक की मात्रा कम हो जाती है और पसीना आना बंद हो जाता है। फिजिशियन डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि गर्मी के मौसम में हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है। अभी हीट स्ट्रोक के हल्के लक्षण वाले मरीज आ रहे हैं, लेकिन गर्मी बढ़ने पर हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाएगा, इसलिए अभी से धूप व गर्मी से बचाव के इंतजाम कर लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वेदभानू मलिक ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ बच्चों में उल्टी दस्त और वायरल बुखार के केस बढ़े हैं। गर्म हवा यानि लू लगने से हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है। दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक धूप में बाहर न निकले। अगर बाहर निकलना जरूरी है तो सावधानी बरतें और धूप से बचाव के इंतजाम के साथ निकले। मौसमी फलों के साथ पानी और घर के बने तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें। बाजार में गन्ने का जूस, रंग बिरंगे कोल्ड ड्रिंक्स, कटे हुए फल आदि का सेवन करने से बचे। इससे पेट में संक्रमण होने से बीमार होने का खतरा रहता है।
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हीट स्ट्रोक के लक्षण:
चक्कर आना, सिर घूमना व उल्टी होना
बैचेनी और घबराहट होना
त्वचा गर्म, लाल व सूखी होना।
धड़कन तेज होना, सांस लेने में परेशानी।
दौरे पड़ना, बेहोशी होना।
बचाव:
घर से बाहर निकलते समय दो गिलास पानी पीये।
नारियल पानी, नींबू, दही लस्सी, सत्तु का सेवन करें।
मौसमी फल तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि का सेवन करें।
जरूरी होने पर दोपहर में छाता या सिर ढककर घर के बाहर निकलें।
अधिकतर काम सुबह व शाम को निबटाएं।
सुबह-शाम हल्का सुपाच्य भोजन लें।
कोल्ड ड्रिंक का सेवन न करें, घर के बने तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें।
बाजार में कटे फटे फलों का सेवन न करें।
लू लगने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।