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गेहूं की कटाई के साथ बासमती 1509 धान की रोपाई हुई शुरू
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जलालाबाद क्षेत्र में धान की रोपाई के लिए खेत में भरा पानी।
- फोटो : SHAMLI
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शामली। गेहूं की कटाई के साथ जिले में धान की रोपाई शुुरू हो गई है। जलालाबाद क्षेत्र के किसानों ने 1509 धान की रोपाई शुुरू कर दी है। अगले दो माह जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह में धान की कटाई के बाद धन को किसान हरियाणा के करनाल- पानीपत सोनीपत और यमुनानगर की मंडियां में बेचते है। यहां पर किसानों को अच्छा दाम मिलता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर बागपत जिले के यमुना खादर के आसपास के बिडौली, सकौती, खोडसमा, कमालपुर, जलालाबाद, थानाभवन क्षेत्रों में किसान बासमती 1509 का रोपाई करने में रुचि ले रहे है। गन्ने एवं गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग के बाद किसान बासमती 1509 धान की रोपाई शुरू करते थे। इस बार जिले मेें इस समय गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग का कार्य चल रहा है। जिले के थानाभवन और जलालाबाद क्षेत्र के किसानों ने समय से पूर्व धान की रोपाई के लिए खेत तैयार कर लिए है।
जिले के चंदेनामाल और सहारनपुर रोड पर आसपास के गांवों के किसानों ने 1509 धान की अगेती प्रजाति की रोपाई शुरू कर दी है। किसानों का मानना है कि बासमती 1509 अगेती प्रजाति दो माह से लेकर तीन माह तक पककर तैयार हो जाती है। यहां का किसान इस अगेती प्रजाति की धान की रोपाई करके अप्रैल से लेकर अक्तूबर से पहले तक दो बार फसल लेकर हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों की मंडियों में धान बेचकर दोगुना मुनाफा कमा लेते है। वर्ष 2021-22 में बासमती 1509 धान का हरियाणा की मंडियो में अच्छा खासा भाव मिलने के बाद मुनाफा कमाया है। पिछले सत्र में 1509 धान का भाव 2800 रुपये से लेकर 3200 और 3300 रुपये क्विंटल तक भाव मिला था। हालांकि बासमती 1509 धान की प्रजाति की फसल को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। संवाद
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अच्छी निकासी महंगा रेट मिलने से किसान ले रहे रुचि
दो से तीन माह में तैयार होने वाली 1509 धान की फसल में एक बीघा में चार से पांच क्विंटल धान की निकासी होती है। बरसात से पहले फसल में रोग आने की संभावना कम रहती है, जबकि जुलाई से अक्तूबर तक धान की रोपाई के दौरान रोग ज्यादा आते है। पेस्टीसाइड का किसान ज्यादा उपयोग करते है। किसानों को मुुनाफा मिलने से 1509 धान की प्रजाति की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है।
वर्जन...........
बारिश से पूर्व धान की रोपाई होने से जलस्तर पर असर पड़ता है। कृषि विभाग 1509 बासमती धान की प्रजाति को किसानों को रोपाई करने से मना करते है। कृषि विभाग मई माह में धान की नर्सरी लगाई जाती है। जून माह में धान की नर्सरी तैयार हो जाती है। हरिशंकर चौधरी,जिला कृषि अधिकारी।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर बागपत जिले के यमुना खादर के आसपास के बिडौली, सकौती, खोडसमा, कमालपुर, जलालाबाद, थानाभवन क्षेत्रों में किसान बासमती 1509 का रोपाई करने में रुचि ले रहे है। गन्ने एवं गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग के बाद किसान बासमती 1509 धान की रोपाई शुरू करते थे। इस बार जिले मेें इस समय गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग का कार्य चल रहा है। जिले के थानाभवन और जलालाबाद क्षेत्र के किसानों ने समय से पूर्व धान की रोपाई के लिए खेत तैयार कर लिए है।
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जिले के चंदेनामाल और सहारनपुर रोड पर आसपास के गांवों के किसानों ने 1509 धान की अगेती प्रजाति की रोपाई शुरू कर दी है। किसानों का मानना है कि बासमती 1509 अगेती प्रजाति दो माह से लेकर तीन माह तक पककर तैयार हो जाती है। यहां का किसान इस अगेती प्रजाति की धान की रोपाई करके अप्रैल से लेकर अक्तूबर से पहले तक दो बार फसल लेकर हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों की मंडियों में धान बेचकर दोगुना मुनाफा कमा लेते है। वर्ष 2021-22 में बासमती 1509 धान का हरियाणा की मंडियो में अच्छा खासा भाव मिलने के बाद मुनाफा कमाया है। पिछले सत्र में 1509 धान का भाव 2800 रुपये से लेकर 3200 और 3300 रुपये क्विंटल तक भाव मिला था। हालांकि बासमती 1509 धान की प्रजाति की फसल को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। संवाद
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अच्छी निकासी महंगा रेट मिलने से किसान ले रहे रुचि
दो से तीन माह में तैयार होने वाली 1509 धान की फसल में एक बीघा में चार से पांच क्विंटल धान की निकासी होती है। बरसात से पहले फसल में रोग आने की संभावना कम रहती है, जबकि जुलाई से अक्तूबर तक धान की रोपाई के दौरान रोग ज्यादा आते है। पेस्टीसाइड का किसान ज्यादा उपयोग करते है। किसानों को मुुनाफा मिलने से 1509 धान की प्रजाति की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है।
वर्जन...........
बारिश से पूर्व धान की रोपाई होने से जलस्तर पर असर पड़ता है। कृषि विभाग 1509 बासमती धान की प्रजाति को किसानों को रोपाई करने से मना करते है। कृषि विभाग मई माह में धान की नर्सरी लगाई जाती है। जून माह में धान की नर्सरी तैयार हो जाती है। हरिशंकर चौधरी,जिला कृषि अधिकारी।