पड़ताल: यहां कोड वर्ड से बिक रहीं प्रतिबंधित दवाएं, पत्ते का रंग बताते ही बिना पर्चे मिल जाती है दवा
रंग बताइए और बिना पर्चे के ही प्रतिबंधित दवा आपको मिल जाएगी। यूपी के शामली में अमर उजाला जांच पड़ताल में बड़ा खुलासा हुआ है। यहां मेडिकल स्टोर संचालक पत्ते का रंग बताते ही ग्राहकों को बैन मेडिसिन दे दे रहे हैं।
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विस्तार
हरियाणा के कुरुक्षेत्र के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम के शहर में डेरा डालने के बावजूद प्रतिबंधित नशे के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाइयों की बिक्री बिना डाक्टरों के पर्चे की हो रही है।
अमर उजाला ने तीन दिन तक जिलेभर में पड़ताल की तो अधिकांश मेडिकल स्टोर संचालक बिना डाक्टर के पर्चे के प्रतिबंधित दवाई देने को तैयार हो गए, हालांकि इस प्रकार से दवाई महंगी भी मिलीं। खास बात यह रही कि 'नीले' और 'काले' पत्ते की दवाई कोड वर्ड हैं, जिसे बोलते ही तुरंत ही दवाई उपलब्ध करा दी जाती है। पड़ताल के दौरान संवाददाता की मेडिकल स्टोर संचालकों से कुछ यूं बातचीत हुई।
संवाददाता : भाई, काले पत्ते की दवाई चाहिए, नशे के लिए
मेडिकल स्टोर संचालक : मिल जाएगी, वैसे बैन है
संवाददाता : दो डिब्बे दे दो, कितने की मिलेगी
संचालक : डब्बा नहीं मिलेगा, जितनी जरूरत हो उतनी लो
संवाददाता: छह गोली कितने की मिलेगी
संचालक- 81 रुपये, इस दौरान कई अन्य नशे की गोलियां दिखाई गई।
संवाददाता : ठीक है
संवाददाता : नीले पत्ते वाली दवाई भी है क्या
संचालक- बाद में ले लेना, सब मिल जाएगी
दिल्ली रोड पर मेडिकल स्टोर
संवाददाता : नीले पत्ते वाली दवाई दे दो
संचालक: कुछ दिन पहले ही खत्म हो गई
संवाददाता: देख लो भाई, जरूरी है
संचालक : खत्म हो गई वरना जरूर दे देता।
संवाददाता : ओके।
दैनिक ग्राहक को तुरंत देने को तैयार हो गया, बाद में किया मना
संवाददाता ने एक दैनिक ग्राहक के माध्यम से भैंसवाल रोड पर एक मेडिकल स्टोर संचालक से प्रतिबंधित दवाई खरीदवाने का प्रयास किया। पहले तो मेडिकल स्टोर संचालक 100 रुपये में छह कैप्सूल देने को तैयार हो गया। मगर बाद में बाइक पर संवाददाता को देखकर कैप्सूल देने से मना कर दिया। इनके अलावा 12 अन्य मेडिकल स्टोर संचालकों ने काले या फिर नीले पत्ते की दवाई देने से साफ इनकार कर दिया।
पुराने ग्राहक को ही मिलती है दवाई
शामली के अलावा कांधला और थानाभवन क्षेत्र में कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों के यहां पर प्रतिबंधित गोलियों की खरीदारी करने वालों की लाइन लगती है। हालांकि, प्रतिदिन खरीदारी करने वालों को ही दवाइयां दी जाती हैं। अनजान व्यक्ति यदि दवाई लेने के लिए जाए तो उसे साफ मना कर दिया जाता है।
ड्रग इंस्पेक्टर निधि पांडेय ने बताया कि उन्होंने शामली में एक मेडिकल स्टोर पर छापामारी की। जहां से नशे में प्रयोग की जाने वाली करीब 500 गोलियां बरामद की गई। क्रय, विक्रय का रिकॉर्ड भी मेडिकल स्टोर संचालक नहीं दिखा पाया। सैंपल लेकर लखनऊ प्रयोगशाला भेज दिया गया है। मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लाइसेंस भी निरस्त होगा।
मेडिकल स्टोर पर बेचा जा रहा था ऑक्सीटोक्सीन इंजेक्शन
ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि बिडौली में गुल्लू के मेडिकल स्टोर पर छापामारी की गई थी, जहां पर पशुओं को लगाया जाने वाले ऑक्सीटोक्सीन इंजेक्शन की बिक्री की जा रही थी। प्रयोगशाला में भेजी गई रिपोर्ट में भी ऑक्सीटोक्सीन इंजेक्शन की पुष्टि हो गई है। जिस पर गुल्लू का लाइसेंस निरस्त किया गया है। जल्द ही कोर्ट में परिवाद दायर किया जाएगा।
प्रतिबंधित या फिर बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाई की बिक्री करने पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके तहत जहां मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। वहीं कम से कम तीन साल तक की सजा हो सकती है। लोगों से अपील है कि वह प्रतिबंधित दवाइयों की बिक्री करने वालों की सूचना मेरे मोबाइल नंबर 9582502680 नंबर पर दें, तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -निधि पांडेय, ड्रग इंस्पेक्टर शामली
यह है मामला
कुरुक्षेत्र नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने कुरुक्षेत्र के रहने वाले सतीश नाम के युवक को नशीली दवाइयों के साथ पकड़ा था। पूछताछ में उसने खुलासा किया गया कि वह शामली से नशीली दवाइयों को लेकर विभिन्न स्थानों पर सप्लाई करता है। दवाई का पत्ता यदि 110 रुपये में लाता है तो उसे 170 रुपये में बेचता है।