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यूक्रेन से बहन मानवी के साथ घर लौटा अंश
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शामली धीमानपुरा में यूक्रेन से अपने घर लौटी मानवी का तिलक करती दादी।
- फोटो : SHAMLI
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यूक्रेन से बहन मानवी के साथ घर लौटा अंश
शामली। यूक्रेन में फंसे भाई-बहन अंश भार्गव और मानवी मंगलवार को घर लौट आए। जिससे परिजनों के चेहरों पर खुशी लौट आई। दोनों के घर पहुंचने पर उनकी दादी ने आरती उतारी। अंश और मानवी ने बताया कि यूक्रेन के बॉर्डरों पर हालात बहुत खराब हैं। सरकार फ्लाइट की संख्या बढ़ाकर तत्काल वहां से सभी छात्र-छात्राओं को सुरक्षित निकाले।
धीमानपुरा निवासी प्रभात भार्गव का पुत्र अंश और पुत्री मानवी यूक्रेन पर हुए हमले में फंस गए थे। तभी से परिजनों को उनकी चिंता सता रही थी। अंश और मानवी ने बताया कि शनिवार को वह बस से रोमानिया बॉर्डर की ओर रवाना हुए थे। बॉर्डर पर करीब रात 10 बजे पहुंचे, वहां हजारों की संख्या में छात्र-छात्रा थे। करीब 22 घंटे वह बर्फ में फंसे रहे। पीने का पानी तक जम गया था। रोमानिया पुलिस ने वहां बेकाबू होते छात्रों पर रबड़ बुलेट और आंसू गैस के गोले दागे। जिससे वहां भगदड़ मच गई। वह अपने साथियों से बिछड़ गए। इस दौरान कई छात्र चोटिल भी हो गए। बॉर्डर क्रॉस करने के बाद उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। भारतीय दूतावास की टीम ने शानदार काम किया। अंश और मानवी को उनके पिता प्रभात भार्गव, मां रश्मि भार्गव और दादा अरविंद ने खूब प्यार दिया। दादी ने दोनों की आरती उतारी।
तिरंगा लगा देख किसी ने नहीं किया परेशान
अंश और मानवी ने बताया जब वह बस से बॉर्डर की ओर रवाना हुए तो काफी घबराए हुए थे। रास्ते में अनहोनी की आशंका उन्हें सता रही थी। कई जगह रास्ते में चेकिंग भी हुई। लेकिन तिरंगा लगा देख किसी ने उन्हें परेशान नहीं किया।
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शिवानी भी हुई बॉर्डर के लिए रवाना
कांधला। नाला गांव निवासी शिवानी भी अब यूक्रेन के मीकोलाइव से बॉर्डर की ओर रवाना हो गई है। परिजन अभी भी उसकी सलामती के लिए चिंतित हैं। शिवानी के पिता अजय पंवार ने बताया कि मंगलवार को दोपहर 12 बजे शिवानी से फोन पर वार्ता हुई । उसने बताया कि बेसमेंट में फंसे करीब 400 विद्यार्थियों को आज निकाला गया है। 4 बसों से उन्हें बॉर्डर की ओर ले जाया जा रहा है। उन्हें कुछ देर के लिए ही उनके फोन को ऑन करने के आदेश हैं। इसी बीच में वह परिवार के लोगों से वार्ता करती है। शिवानी ने बताया कि बॉर्डर की ओर सफर के दौरान लगातार धमाकों और गोलीबारी की आवाज से सभी लोग लोग सहमे हुए हैं। परिवार के लोग सभी भारतीयों विद्यार्थियों के सकुशल अपने वतन घर लौटने की दुआ कर रहे हैं।
हंगरी बॉर्डर पर पहुंचा झिंझाना का प्रशांत
यूक्रेन के युद्ध के कारण पिछले पांच दिन से बंकर में छिपा हुआ झिंझाना का छात्र सोमवार को अपने साथियों के साथ हंगरी बॉर्डर पर ट्रेन के जरिए पहुंच गया। रेलवे स्टेशन से करीब बारह किलोमीटर दूर हंगरी बॉर्डर पर पैदल यात्रा कर पहुंचा है। परिजनों में अब उम्मीद जग गई है कि जल्दी ही बेटा उनके पास होगा।
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शामली। यूक्रेन में फंसे भाई-बहन अंश भार्गव और मानवी मंगलवार को घर लौट आए। जिससे परिजनों के चेहरों पर खुशी लौट आई। दोनों के घर पहुंचने पर उनकी दादी ने आरती उतारी। अंश और मानवी ने बताया कि यूक्रेन के बॉर्डरों पर हालात बहुत खराब हैं। सरकार फ्लाइट की संख्या बढ़ाकर तत्काल वहां से सभी छात्र-छात्राओं को सुरक्षित निकाले।
धीमानपुरा निवासी प्रभात भार्गव का पुत्र अंश और पुत्री मानवी यूक्रेन पर हुए हमले में फंस गए थे। तभी से परिजनों को उनकी चिंता सता रही थी। अंश और मानवी ने बताया कि शनिवार को वह बस से रोमानिया बॉर्डर की ओर रवाना हुए थे। बॉर्डर पर करीब रात 10 बजे पहुंचे, वहां हजारों की संख्या में छात्र-छात्रा थे। करीब 22 घंटे वह बर्फ में फंसे रहे। पीने का पानी तक जम गया था। रोमानिया पुलिस ने वहां बेकाबू होते छात्रों पर रबड़ बुलेट और आंसू गैस के गोले दागे। जिससे वहां भगदड़ मच गई। वह अपने साथियों से बिछड़ गए। इस दौरान कई छात्र चोटिल भी हो गए। बॉर्डर क्रॉस करने के बाद उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। भारतीय दूतावास की टीम ने शानदार काम किया। अंश और मानवी को उनके पिता प्रभात भार्गव, मां रश्मि भार्गव और दादा अरविंद ने खूब प्यार दिया। दादी ने दोनों की आरती उतारी।
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तिरंगा लगा देख किसी ने नहीं किया परेशान
अंश और मानवी ने बताया जब वह बस से बॉर्डर की ओर रवाना हुए तो काफी घबराए हुए थे। रास्ते में अनहोनी की आशंका उन्हें सता रही थी। कई जगह रास्ते में चेकिंग भी हुई। लेकिन तिरंगा लगा देख किसी ने उन्हें परेशान नहीं किया।
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शिवानी भी हुई बॉर्डर के लिए रवाना
कांधला। नाला गांव निवासी शिवानी भी अब यूक्रेन के मीकोलाइव से बॉर्डर की ओर रवाना हो गई है। परिजन अभी भी उसकी सलामती के लिए चिंतित हैं। शिवानी के पिता अजय पंवार ने बताया कि मंगलवार को दोपहर 12 बजे शिवानी से फोन पर वार्ता हुई । उसने बताया कि बेसमेंट में फंसे करीब 400 विद्यार्थियों को आज निकाला गया है। 4 बसों से उन्हें बॉर्डर की ओर ले जाया जा रहा है। उन्हें कुछ देर के लिए ही उनके फोन को ऑन करने के आदेश हैं। इसी बीच में वह परिवार के लोगों से वार्ता करती है। शिवानी ने बताया कि बॉर्डर की ओर सफर के दौरान लगातार धमाकों और गोलीबारी की आवाज से सभी लोग लोग सहमे हुए हैं। परिवार के लोग सभी भारतीयों विद्यार्थियों के सकुशल अपने वतन घर लौटने की दुआ कर रहे हैं।
हंगरी बॉर्डर पर पहुंचा झिंझाना का प्रशांत
यूक्रेन के युद्ध के कारण पिछले पांच दिन से बंकर में छिपा हुआ झिंझाना का छात्र सोमवार को अपने साथियों के साथ हंगरी बॉर्डर पर ट्रेन के जरिए पहुंच गया। रेलवे स्टेशन से करीब बारह किलोमीटर दूर हंगरी बॉर्डर पर पैदल यात्रा कर पहुंचा है। परिजनों में अब उम्मीद जग गई है कि जल्दी ही बेटा उनके पास होगा।