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श्रद्धा व भक्ति का केंद्र है प्राचीन शिव मंदिर जाल वाला
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जलालाबाद का प्राचीन शिव मंदिर।
- फोटो : SHAMLI
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श्रद्धा व भक्ति का केंद्र है प्राचीन शिव मंदिर जाल वाला
जलालाबाद। कस्बे को धर्म नगरी के नाम से दूर दूर तक पहचान मिली हुई है। इस नगर में हर धर्म संप्रदाय के त्योहार आपसी भाईचारे के साथ एक-दूसरे के सहयोग से मनाए जाते हैं।
कस्बे में जैनियों का पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र है। दुनिया का प्रसिद्ध अरबी उर्दू भाषा का मदरसा मिफ्ता उल उलूम है। जिसमें देश, विदेश के छात्र भाषा, धर्म की शिक्षा ग्रहण करने आते है। जबकि मराठा कालीन शिव मंदिर जालवाला विश्वविख्यात है। कस्बे में यूं तो कई प्रसिद्ध शिवालय हैं। उनमें मराठा कालीन 550 वर्ष प्राचीन शिव मंदिर जाल वाला के नाम से विख्यात है। बताया जाता है कि पर मराठों की सेना ने अपने शिविर लगाए थे और मुगलों की सेना पर विजय प्राप्ति के लिए भगवान शिव की आराधना की थी।
मान्यता है कि मंदिर में लगातार 40 दिन तक पूजा करने, विशेष रूप से जलाभिषेक कर रुद्राष्टक का पाठ करने से वंश व सुख, शांति, समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस शिवालय की पूजा पाठ व देखरेख प्रबंध का कार्य कस्बे का ही योगी परिवार कई पीढ़ियों से करता चला आ रहा है। इसके अलावा कस्बे में प्राचीन देतेश्वर महादेव मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर मिट्ठी कुई, प्राचीन शिव मंदिर गांधी चौक, प्राचीन शिव मंदिर बावरी वालों का आदि कई शिवालय हैं, जो नगर की प्राचीनता को दर्शाते हैं।
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जलालाबाद। कस्बे को धर्म नगरी के नाम से दूर दूर तक पहचान मिली हुई है। इस नगर में हर धर्म संप्रदाय के त्योहार आपसी भाईचारे के साथ एक-दूसरे के सहयोग से मनाए जाते हैं।
कस्बे में जैनियों का पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र है। दुनिया का प्रसिद्ध अरबी उर्दू भाषा का मदरसा मिफ्ता उल उलूम है। जिसमें देश, विदेश के छात्र भाषा, धर्म की शिक्षा ग्रहण करने आते है। जबकि मराठा कालीन शिव मंदिर जालवाला विश्वविख्यात है। कस्बे में यूं तो कई प्रसिद्ध शिवालय हैं। उनमें मराठा कालीन 550 वर्ष प्राचीन शिव मंदिर जाल वाला के नाम से विख्यात है। बताया जाता है कि पर मराठों की सेना ने अपने शिविर लगाए थे और मुगलों की सेना पर विजय प्राप्ति के लिए भगवान शिव की आराधना की थी।
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मान्यता है कि मंदिर में लगातार 40 दिन तक पूजा करने, विशेष रूप से जलाभिषेक कर रुद्राष्टक का पाठ करने से वंश व सुख, शांति, समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस शिवालय की पूजा पाठ व देखरेख प्रबंध का कार्य कस्बे का ही योगी परिवार कई पीढ़ियों से करता चला आ रहा है। इसके अलावा कस्बे में प्राचीन देतेश्वर महादेव मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर मिट्ठी कुई, प्राचीन शिव मंदिर गांधी चौक, प्राचीन शिव मंदिर बावरी वालों का आदि कई शिवालय हैं, जो नगर की प्राचीनता को दर्शाते हैं।
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