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बेरोजगारों की भरमार, काबिलों की दरकार

Thu, 03 Dec 2020 12:11 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Dec 2020 12:11 AM IST
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Amar Ujala Exclusive ...
शामली में एक फैक्टरी में धुरा बनाते कर्मचारी। फाइल फोटो। - फोटो : SHAMLI
शामली। कोरोना काल में लोग बड़ी संख्या में बेरोजगार हुए हैं। इन्हें काम देने के लिए सरकार प्रयास कर रही है, लेकिन उद्योगों को प्रशिक्षित कामगार चाहिए। बेरोजगारों की भीड़ के बावजूद ओडीओपी में शामिल जनपद के रिम-धुरा उद्योग को कुशल कामगार नहीं मिल रहे हैं। एक इकाई में 30 टर्नर, वेल्डर, फिटर एवं अन्य तकनीक कुशल लोगों की जरूरत होती है, लेकिन उपलब्धता नहीं होने से कम लोगों के दम पर ही काम चलाया जा रहा है।
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जनपद में रिम-धुरे की करीब 31 इकाइयां संचालित हैं और इनका सालाना का टर्नओवर 100 करोड़ से ज्यादा का है। विभिन्न दिक्कतों के अलावा रिम-धुरा उद्योग इन दिनों कुशल कामगारों की कमी से जूझ रहा है। रिम-धुरा उद्योग एसोसिएशन के सचिव वेदप्रकाश आर्य बताते हैं कि एक इकाई में औसतन 50 लोग काम करते हैं। इसमें पांच-पांच टर्नर, फिटर और रोलिंगमैन, 10-10 प्रैसमैन, वेल्डर और 15 अकुशल कर्मचारियों की जरूरत होती है। कुशल कामगार नहीं मिलने से इकाइयों में जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।
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आईटीआई में मशीन देने का दिया था प्रस्ताव
शामली। उद्योग बंधु की बैठक में कुशल कामगारों की कमी का मामला हर बार उठता है। रिम-धुरा उद्योग एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रविंद जैन बताते हैं जिले की आईटीआई में इंडस्ट्री की ओर से मशीन भी देने का प्रस्ताव दिया गया। ताकि युवाओं को अच्छा प्रशिक्षण मिल सके, लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
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लखनऊ से भी नहीं भेजे गए कामगार
शामली। लॉकडाउन में बेरोजगार हुए लोगों की एक सूची आईआईए लखनऊ की ओर से जिले को भेजी गई थी। इनमें से कुशल कामगारों को चिह्नित कर उन्हें शामली भेजने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उनमें से कोई भी जिले की इकाइयों में काम करने नहीं आया।
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तकनीक में फेल हो रहे डिप्लोमा धारक
शामली। जिले में कैराना, थानाभवन और लिसाढ़ में तीन राजकीय आईटीआई संचालित हैं। थानाभवन की कक्षाएं अभी लिसाढ़ में चल रहीं हैं। इनमें टर्नर की एक भी सीट नहीं है। केवल थानाभवन में मशीनिष्ट की 21 सीटें हैं। फिटर की राजकीय आईटीआई में 21 और प्राइवेट में 500 सीटें हैं। वेल्डर की कुल 376 सीटें हैं। इनसे प्रतिवर्ष छात्र डिप्लोमा लेकर निकलते हैं, लेकिन उद्यमियों के मानकों पर खरे नहीं उतरते। रिम-धुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव वेदप्रकाश बताते हैं कि बहुत से डिप्लोमा धारकों को तो माप आदि की बेसिक जानकारी भी नहीं होती।

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अप्रेंटिस की सुविधा दें तो हल होगी समस्या
शामली। राजकीय आईटीआई कैराना के प्रधानाचार्य मंजुल मयंक का कहना है कि प्रशिक्षण में छात्रों को बेसिक जानकारी दी जाती है। जिले के रिम-धुुरा या अन्य उद्योगों में छात्रों को अप्रेंटिस नहीं कराई जाती। यदि उद्यमी आईटीआई प्रशिक्षितों को अपने यहां अप्रेंटिस कराएं तो उद्योगों की जरूरत के हिसाब से कुशल कामगार उन्हें मिल जाएंगे। दूसरी समस्या पर्याप्त वेतन की है। डिप्लोमाधारक अधिक वेतन चाहते हैं लेकिन उन्हें अपेक्षा के अनुरूप वेतन नहीं मिल पाता। स्थानीय उद्योगों में कुशल कामगारों की कमी का यह भी एक कारण हो सकता है।
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सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण की स्थिति
कुल पंजीकृत बेरोजगार : 10964
पंजीकृत पुरुष : 9852
पंजीकृत महिलाएं : 1112
कुशल पंजीकृत : 1082
अकुशल पंजीकृत : 9771
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