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होली के लिए बनने लगा मिलावटी मावा
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चौसाना में तैयार किया जा रहा नकली मावा।
- फोटो : SHAMLI
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होली के लिए बनने लगा मिलावटी मावा
चौसाना। होली पर्व नजदीक आते ही चौसाना क्षेत्र में मिलावटी मावे से मिठाई बनाने का काम शुरू हो गया है। मिठाई की दुकानों पर मिलावटी मावे से बनी मिठाई सज गई हैं। जिस पर खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की आंखें भी बंद हैं। नकली मावे से निर्मित मिठाई लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाती है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी व स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
होली रंगों का त्योहार है। गुंजिया सहित कई मिठाई होली की शोभा को बढ़ाती हैं। चौसाना में भी होली से पूर्व मिठाइयों के बाजार सज गए हैं। मिठाई के दुकानदारों ने अलग-अलग तरह की मिठाइयां बना रहे हैं। चौसाना में नकली मावा बड़ी मात्रा में तैयार किया जाता है। जिससे मिठाई का निर्माण होता है। त्योहारों के सीजन पर शुद्ध मावे की मिठाई न मिलने के कारण लोग मजबूर होकर बाजार से नकली मावे से बनी मिठाई खरीदते हैं। जो लोगों की सेहत को सीधा नुकसान पहुंचाती है। क्षेत्र में मिलावटी मिठाइयां बनाने वाले दुकानदारों के खिलाफ यूं तो कई बार सैंपल की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई दिन में होती है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।
पठानपुरा, चौसाना में बनता है नकली मावा
पठानपुरा जिसकी आबादी करीब 3500 है, यहां भट्ठियों पर मिलावटी मावा तैयार होता है। जो आसपास के देहात क्षेत्र में बेचा जाता है। यह कारोबार दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। चौसाना में मिलावटी मावा तैयार करने वाले इसे हरियाणा और गंगोह के बाजार में भेजते हैं। यह काम सीजन में अधिक होता है। होली का पर्व आने से पहले मिलावटी मावा बनाने का काम फिर से शुरू हो गया है।
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पाउडर और रिफाइंड से बनाया जा रहा मावा
जब से दूध के भाव आसमान को छूने लगे तभी से मिलावटी मावा भी बड़ी मात्रा में बनने लगा है। गांव में घूम-घूमकर दूध एकत्र कर बेचने वाले व्यापारी अब फेट की मात्रा पर दूध खरीदते हैं, जिससे किसान को भी फायदा होता है। मिलावटी मावा मूल रूप से पाउडर व बेहद घटिया किस्म के रिफाइंड से तैयार किया जाता है। पाउडर व रिफाइंड के मिश्रण को खौलते पानी में डालने पर एक घंटे में कई क्विंटल मावा तैयार हो जाता है। जिससे ईंधन की भी बचत होती है और समय की बर्बादी कम होती है। जो शुद्ध मावे से 50 से 70 रुपये सस्ता होता है। जिसके कारण मुनाफा अधिक होता है।
पांच के खिलाफ न्यायालय में चल रहे मुकदमे
चौसाना क्षेत्र में इस तरह का मावा बनाने वाली करीब 100 भट्ठियां संचालित हैं। जिन पर बड़ी मात्रा में रोजाना मिलावटी मावा तैयार किया जाता है। यह मिलावटी मावा हरियाणा के करनाल, पानीपत और यूपी में सहारनपुर क्षेत्र में खपाया जाता है। क्षेत्र के पांच लोगों पर ही पांच साल से अधिक समय से मुकदमे चल रहे हैं। जबकि कई स्थानों पर लिए गए सैंपल के मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विभाग समय-समय पर कार्रवाई कर सैंपल लेता है और जांच के लिए भेजता है। कई दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे भी चल रहे हैं। होली को देखते हुए रोकथाम के लिए सोमवार से सैंपल के लिए चौसाना में अभियान चलाया जाएगा और कड़ी कार्रवाई होगी - प्रजन कुमार, खाद्य निरीक्षक कैराना
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चौसाना। होली पर्व नजदीक आते ही चौसाना क्षेत्र में मिलावटी मावे से मिठाई बनाने का काम शुरू हो गया है। मिठाई की दुकानों पर मिलावटी मावे से बनी मिठाई सज गई हैं। जिस पर खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की आंखें भी बंद हैं। नकली मावे से निर्मित मिठाई लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाती है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी व स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
होली रंगों का त्योहार है। गुंजिया सहित कई मिठाई होली की शोभा को बढ़ाती हैं। चौसाना में भी होली से पूर्व मिठाइयों के बाजार सज गए हैं। मिठाई के दुकानदारों ने अलग-अलग तरह की मिठाइयां बना रहे हैं। चौसाना में नकली मावा बड़ी मात्रा में तैयार किया जाता है। जिससे मिठाई का निर्माण होता है। त्योहारों के सीजन पर शुद्ध मावे की मिठाई न मिलने के कारण लोग मजबूर होकर बाजार से नकली मावे से बनी मिठाई खरीदते हैं। जो लोगों की सेहत को सीधा नुकसान पहुंचाती है। क्षेत्र में मिलावटी मिठाइयां बनाने वाले दुकानदारों के खिलाफ यूं तो कई बार सैंपल की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई दिन में होती है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।
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पठानपुरा, चौसाना में बनता है नकली मावा
पठानपुरा जिसकी आबादी करीब 3500 है, यहां भट्ठियों पर मिलावटी मावा तैयार होता है। जो आसपास के देहात क्षेत्र में बेचा जाता है। यह कारोबार दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। चौसाना में मिलावटी मावा तैयार करने वाले इसे हरियाणा और गंगोह के बाजार में भेजते हैं। यह काम सीजन में अधिक होता है। होली का पर्व आने से पहले मिलावटी मावा बनाने का काम फिर से शुरू हो गया है।
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पाउडर और रिफाइंड से बनाया जा रहा मावा
जब से दूध के भाव आसमान को छूने लगे तभी से मिलावटी मावा भी बड़ी मात्रा में बनने लगा है। गांव में घूम-घूमकर दूध एकत्र कर बेचने वाले व्यापारी अब फेट की मात्रा पर दूध खरीदते हैं, जिससे किसान को भी फायदा होता है। मिलावटी मावा मूल रूप से पाउडर व बेहद घटिया किस्म के रिफाइंड से तैयार किया जाता है। पाउडर व रिफाइंड के मिश्रण को खौलते पानी में डालने पर एक घंटे में कई क्विंटल मावा तैयार हो जाता है। जिससे ईंधन की भी बचत होती है और समय की बर्बादी कम होती है। जो शुद्ध मावे से 50 से 70 रुपये सस्ता होता है। जिसके कारण मुनाफा अधिक होता है।
पांच के खिलाफ न्यायालय में चल रहे मुकदमे
चौसाना क्षेत्र में इस तरह का मावा बनाने वाली करीब 100 भट्ठियां संचालित हैं। जिन पर बड़ी मात्रा में रोजाना मिलावटी मावा तैयार किया जाता है। यह मिलावटी मावा हरियाणा के करनाल, पानीपत और यूपी में सहारनपुर क्षेत्र में खपाया जाता है। क्षेत्र के पांच लोगों पर ही पांच साल से अधिक समय से मुकदमे चल रहे हैं। जबकि कई स्थानों पर लिए गए सैंपल के मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विभाग समय-समय पर कार्रवाई कर सैंपल लेता है और जांच के लिए भेजता है। कई दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे भी चल रहे हैं। होली को देखते हुए रोकथाम के लिए सोमवार से सैंपल के लिए चौसाना में अभियान चलाया जाएगा और कड़ी कार्रवाई होगी - प्रजन कुमार, खाद्य निरीक्षक कैराना