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पांच दिवसीय वार्षिकोत्सव पर श्री शिव कथा का शुभारंभ
Updated Sun, 05 Aug 2018 10:33 PM IST
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शामली। श्री सदा शिव मंदिर का पांच दिवसीय वार्षिकोत्सव कलश यात्रा के साथ रविवार को शुरू हुआ। कथा व्यास पंडित दिनेश पाठक ने शिव की कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि उनकी कृपा से जीव को सुख, आनंद की प्राप्ति होती है।
कलश यात्रा किसान धर्मशाला से सुुबह दस बजे शुरू होकर धीमानपुरा फाटक से सुभाष चौक से होते हुए रेलपार के शिव मंदिर में समाप्त हुई। जगह-जगह भव्य कलश यात्रा का स्वागत किया गया। शाम तीन बजे सिद्धपीठ प्राचीन श्री सदा शिव मंदिर में श्री शिवकथा की अमृत वर्षा करते हुए कथा वाचक पंडित दिनेश पाठक ने कहा कि भगवान शिव शंकर के भजनों का ध्यान करेगा। शिव उसका कल्याण करेगा। चाहे सारा जग हो बैैरी, रक्षा वो भगवान करेगा। भगवान शिव की कृपा से जीव को सुख, आनंद की प्राप्ति होती हैं। शिव का परिवार विराजमान है। वहां सभी जीवो में बैर भाव खत्म हो जाता है। मनुष्य शिव पूजा और जलाभिषेक तो करते है, मगर आपस का बैैर भाव नहीं त्याग करते हैं। शिव कथा मनुष्यों में बैर भाव त्याग करने व प्रेम भाव की प्रेरणा देती है। मौके पर कथा के यजमान यशपाल निर्वाल के परिवार ने शिवपुुराण का पूजन किया। कार्यक्रम का संचालक डॉ. हरिओम पाठक द्वारा किया गया है। कार्यक्रम संयोजक चौधरी महाराज सिंह, सुरेश निर्वाल, सचिन निर्वाल, जितेंद्र चौधरी, बाबूराम, अनेंद्र निर्वाल, योगेंद्र निर्वाल, अजय चौधरी का सहयोग रहा।
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कलश यात्रा किसान धर्मशाला से सुुबह दस बजे शुरू होकर धीमानपुरा फाटक से सुभाष चौक से होते हुए रेलपार के शिव मंदिर में समाप्त हुई। जगह-जगह भव्य कलश यात्रा का स्वागत किया गया। शाम तीन बजे सिद्धपीठ प्राचीन श्री सदा शिव मंदिर में श्री शिवकथा की अमृत वर्षा करते हुए कथा वाचक पंडित दिनेश पाठक ने कहा कि भगवान शिव शंकर के भजनों का ध्यान करेगा। शिव उसका कल्याण करेगा। चाहे सारा जग हो बैैरी, रक्षा वो भगवान करेगा। भगवान शिव की कृपा से जीव को सुख, आनंद की प्राप्ति होती हैं। शिव का परिवार विराजमान है। वहां सभी जीवो में बैर भाव खत्म हो जाता है। मनुष्य शिव पूजा और जलाभिषेक तो करते है, मगर आपस का बैैर भाव नहीं त्याग करते हैं। शिव कथा मनुष्यों में बैर भाव त्याग करने व प्रेम भाव की प्रेरणा देती है। मौके पर कथा के यजमान यशपाल निर्वाल के परिवार ने शिवपुुराण का पूजन किया। कार्यक्रम का संचालक डॉ. हरिओम पाठक द्वारा किया गया है। कार्यक्रम संयोजक चौधरी महाराज सिंह, सुरेश निर्वाल, सचिन निर्वाल, जितेंद्र चौधरी, बाबूराम, अनेंद्र निर्वाल, योगेंद्र निर्वाल, अजय चौधरी का सहयोग रहा।
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