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कतई महफूज नहीं दिल्ली-शामली रूट पर ट्रेन का सफर
Updated Fri, 07 Jul 2017 12:39 AM IST
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शामली। दिल्ली-शामली-सहारनपुर रूट पर ट्रेन में यात्रा करना अपनी जान को जोखिम में डालने से कम नहीं है। ट्रेनों में सुरक्षा की पुख्ता गारंटी नहीं है। कब ट्रेन में बदमाश हथियारों के बल पर लूटपाट कर दें, कोई भरोसा नहीं। लुटेरे ही नहीं, इस रूट पर सीट को लेकर भी बवाल करने वालों की कमी नहीं है और जिनके हाथ किसी का खून बहाने से भी नहीं कंपकंपाते। इन हालातों में दिल्ली-शामली रूट पर ट्रेन में सफर आखिर कैसे किया जाए?
बुधवार की रात बाबरी क्षेत्र के गांव बंतीखेड़ा निवासी मनव्वर को दिल्ली से शामली लौटते समय ट्रेन में सीट पर बैठने को लेकर हुए विवाद पर ही गोली मार दी गई। मनव्वर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। उसका उपचार दिल्ली स्थित अस्पताल में चल रहा है, तो यहां परिवार के लोगों में गम का माहौल है। ट्रेन में मनव्वर को गोली मारने की घटना ने एक बार फिर दिल्ली-शामली रूट पर असुरक्षित ट्रेन के सफर को बयां किया है। सवाल यह है कि ट्रेनों में सुरक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी संभालने वाली जीआरपी अथवा स्टेशन पर सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम का दंभ भरने वाली आरपीएफ आखिर गंभीर क्यों नहीं है। ट्रेनों में तमंचे और चाकू सहित अवैध हथियार सहित लोग सवार कैसे हो जाते हैं। ट्रेनों में आए दिन यात्रियों से लूटपाट, मारपीट और छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन पुलिस पर इसका असर नहीं हो रहा है।
स्टेशन पर चेकिंग में बरती जा रही लापरवाही
ट्रेनों में घटनाएं आखिर क्यों न हों, पुलिस ने लापरवाही की चादर तान रखी है। शामली रेलवे स्टेशन पर चेकिंग को लेकर पुलिस कतई गंभीर नहीं है। वारदात करने वाले बदमाश तमंचे और चाकू लेकर ट्रेनों में सफर करते हैं, लेकिन जीआरपी और आरपीएफ की तरफ से रेलवे स्टेशन पर भी चेकिंग नहीं की जा रही है। चौंकाने वाली बात है कि बुधवार की रात हुई घटना के बावजूद बृहस्पतिवार को भी रेलवे स्टेशन पर चेकिंग की व्यवस्था तार तार नजर आई। मेन गेट के अलावा रेलवे लाइन के दूसरी तरफ से भी यात्री आते हैं और ट्रेनों में सवार होकर अपने गंतव्य की ओर निकल जाते हैं। रेलवे स्टेशन मेटल डिटेक्टर (डीएफएमडी) तक नहीं है, जिससे अवैध हथियार साथ लेकर जाने वालों की चेकिंग भी नहीं हो पाती है।
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ट्रेनों में हुई प्रमुख घटनाएं
-- दो मई 2015 -- दिल्ली से आते समय ट्रेन में कांधला के पास जमातियों के साथ कुछ असामाजिक तत्वों ने अभद्रता की और विरोध पर मारपीट कर दी। इसको लेकर कांधला में जमकर बवाल हुआ। रेलवे ट्रैक जाम करने के साथ ही कांधला थाने पर पहुंची भीड़ ने तोड़फोड़ और वाहनों में आग तक लगा दी थी। इस घटना में भी ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही सामने आई थी।
-- 30 अक्तूबर 2015 -- देहरादून के हर्बटपुर निवासी डाक्टर नाराय ण सिंह को दिल्ली-सहारनपुर पैसेंजर ट्रेन में बदमाशों ने लूटपाट का विरोध करने पर गोली मार दी थी। मेरठ स्थित अस्पताल में उपचार के दौरान डाक्टर नारायण सिंह ने दम तोड़ दिया था। तत्कालीन एडीजी रेलवे दलजीत सिंह ने भी शामली पहुंचकर सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता कराने का दावा किया था, मगर व्यवस्था फिर उसी ढर्रे पर आ गई।
-- 18 अक्तूबर 2016 -- दिल्ली से शामली लौटते समय ट्रेन में बदमाशों ने रिटायर्ड फौजी से मारपीट करने के बाद रिवाल्वर लूट ली। उस घटना का पुलिस खुलासा तक नहीं कर सकी।
-- 4 अक्तूबर 2016 -- गढ़ीपुख्ता थाना क्षेत्र के गांव मालैंडी निवासी अश्वनी शर्मा दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था। दिल्ली से शामली लौटते समय बागपत के निकट बदमाशों ने ट्रेन में ही गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी। घटना को हुए करीब नौ महीने बीत गए, लेकिन अब तक उसका खुलासा नहीं हुआ। पीड़ित परिवार के लोग जीआरपी थाने से लेकर उच्चाधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं।
----- वर्जन -----
ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता बरती जा रही है। शामली से दिल्ली के लिए और सहारनपुर के लिए भी दो ट्रनों में पुलिस एस्कोर्ट जाती है। इसके अलावा जनता एक्सप्रेस में सहारनपुर से पुलिस एस्कार्ट चलती है। पूर्व में जो घटनाएं हुई, उनका खुलासा हुआ। -- आशुतोष कुमार, थानाध्यक्ष, जीआरपी
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बुधवार की रात बाबरी क्षेत्र के गांव बंतीखेड़ा निवासी मनव्वर को दिल्ली से शामली लौटते समय ट्रेन में सीट पर बैठने को लेकर हुए विवाद पर ही गोली मार दी गई। मनव्वर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। उसका उपचार दिल्ली स्थित अस्पताल में चल रहा है, तो यहां परिवार के लोगों में गम का माहौल है। ट्रेन में मनव्वर को गोली मारने की घटना ने एक बार फिर दिल्ली-शामली रूट पर असुरक्षित ट्रेन के सफर को बयां किया है। सवाल यह है कि ट्रेनों में सुरक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी संभालने वाली जीआरपी अथवा स्टेशन पर सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम का दंभ भरने वाली आरपीएफ आखिर गंभीर क्यों नहीं है। ट्रेनों में तमंचे और चाकू सहित अवैध हथियार सहित लोग सवार कैसे हो जाते हैं। ट्रेनों में आए दिन यात्रियों से लूटपाट, मारपीट और छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन पुलिस पर इसका असर नहीं हो रहा है।
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स्टेशन पर चेकिंग में बरती जा रही लापरवाही
ट्रेनों में घटनाएं आखिर क्यों न हों, पुलिस ने लापरवाही की चादर तान रखी है। शामली रेलवे स्टेशन पर चेकिंग को लेकर पुलिस कतई गंभीर नहीं है। वारदात करने वाले बदमाश तमंचे और चाकू लेकर ट्रेनों में सफर करते हैं, लेकिन जीआरपी और आरपीएफ की तरफ से रेलवे स्टेशन पर भी चेकिंग नहीं की जा रही है। चौंकाने वाली बात है कि बुधवार की रात हुई घटना के बावजूद बृहस्पतिवार को भी रेलवे स्टेशन पर चेकिंग की व्यवस्था तार तार नजर आई। मेन गेट के अलावा रेलवे लाइन के दूसरी तरफ से भी यात्री आते हैं और ट्रेनों में सवार होकर अपने गंतव्य की ओर निकल जाते हैं। रेलवे स्टेशन मेटल डिटेक्टर (डीएफएमडी) तक नहीं है, जिससे अवैध हथियार साथ लेकर जाने वालों की चेकिंग भी नहीं हो पाती है।
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ट्रेनों में हुई प्रमुख घटनाएं
-- दो मई 2015 -- दिल्ली से आते समय ट्रेन में कांधला के पास जमातियों के साथ कुछ असामाजिक तत्वों ने अभद्रता की और विरोध पर मारपीट कर दी। इसको लेकर कांधला में जमकर बवाल हुआ। रेलवे ट्रैक जाम करने के साथ ही कांधला थाने पर पहुंची भीड़ ने तोड़फोड़ और वाहनों में आग तक लगा दी थी। इस घटना में भी ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही सामने आई थी।
-- 30 अक्तूबर 2015 -- देहरादून के हर्बटपुर निवासी डाक्टर नाराय ण सिंह को दिल्ली-सहारनपुर पैसेंजर ट्रेन में बदमाशों ने लूटपाट का विरोध करने पर गोली मार दी थी। मेरठ स्थित अस्पताल में उपचार के दौरान डाक्टर नारायण सिंह ने दम तोड़ दिया था। तत्कालीन एडीजी रेलवे दलजीत सिंह ने भी शामली पहुंचकर सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता कराने का दावा किया था, मगर व्यवस्था फिर उसी ढर्रे पर आ गई।
-- 18 अक्तूबर 2016 -- दिल्ली से शामली लौटते समय ट्रेन में बदमाशों ने रिटायर्ड फौजी से मारपीट करने के बाद रिवाल्वर लूट ली। उस घटना का पुलिस खुलासा तक नहीं कर सकी।
-- 4 अक्तूबर 2016 -- गढ़ीपुख्ता थाना क्षेत्र के गांव मालैंडी निवासी अश्वनी शर्मा दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था। दिल्ली से शामली लौटते समय बागपत के निकट बदमाशों ने ट्रेन में ही गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी। घटना को हुए करीब नौ महीने बीत गए, लेकिन अब तक उसका खुलासा नहीं हुआ। पीड़ित परिवार के लोग जीआरपी थाने से लेकर उच्चाधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं।
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ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता बरती जा रही है। शामली से दिल्ली के लिए और सहारनपुर के लिए भी दो ट्रनों में पुलिस एस्कोर्ट जाती है। इसके अलावा जनता एक्सप्रेस में सहारनपुर से पुलिस एस्कार्ट चलती है। पूर्व में जो घटनाएं हुई, उनका खुलासा हुआ। -- आशुतोष कुमार, थानाध्यक्ष, जीआरपी