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मदरसा पोर्टल लगाएगा भ्रष्टाचार- गड़बड़ियों पर अकुंश
Updated Fri, 01 Sep 2017 12:28 AM IST
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शामली।
मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या सहित अन्य जानकारियाें को मदरसा पोर्टल पर 15 सितंबर तक ऑनलाइन फीड किया जाना है। जिले के 46 मान्यता प्राप्त मदरसों में से अभी तक पांच मदरसे ही अभी तक इस कार्य को कर सके हैं। बाकी से भी इसे शीघ्र निपटाने का निर्देश दिया गया है।
पूर्व में मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति, वेतन, उनकी संख्या, छात्रों की संख्या, छात्रवृत्ति, अन्य अनुदान आदि को लेकर विवाद की स्थिति बनी रहती थी, जिससे भ्रष्टाचार के संकेत भी मिलते थे। उत्तर प्रदेश शासन ने मदरसा पोर्टल की स्थापना कर मदरसों की जानकारी ऑनलाइन फीड कराने का निर्देश दिया है। मदरसा पोर्टल पर जिले के सभी मान्यता प्राप्त मदरसा, आधुनिक मदरसे, अनुदानित मदरसों की संख्या, उनमें पढ़ाने वाले शिक्षक और पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का पूरा ब्योरा दर्ज कराना है।
जिला अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रसून राय ने बताया कि जिले में 46 मान्यता प्राप्त मदरसों में छह हजार छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें 18 मदरसे आधुनिकीकरण के तहत संचालित हो रहे हैं। आधुनिकीकरण के तहत मदरसों में प्रबंध समिति शिक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव शासन को करती है। शासन मदरसा संचालकों की नियुक्ति प्रस्ताव पर मंजूूूरी देता है। जिसमें शासन केंद्रांश व राज्यांश वेतन के रूप में जारी करता है। 15 सितंबर तक जिले के सभी मदरसे मदरसा पोर्टल पर अपडेट हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि फिलहाल पांच मदरसे ऑनलाइन हो चुके हैं। 15 सितंबर तक आनलाइन न होने वाले मदरसों की मान्यता रद्द की जाएगी।
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सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से पहुंच गई थी डबल छात्रवृत्ति
शामली। तीन साल पूर्व मदरसों के छात्र-छात्राओं के खातों में छात्रवृत्ति की डबल धनराशि पहुंच गई थी। मामला शासन स्तर तक पहुंच गया था। इसके चलते तत्कालीन डीएम पीके सिंह ने इसकी जांच कराकर मदरसों के खातों से छात्रवृत्ति की धनराशि की रिकवरी कराने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी थी।
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मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या सहित अन्य जानकारियाें को मदरसा पोर्टल पर 15 सितंबर तक ऑनलाइन फीड किया जाना है। जिले के 46 मान्यता प्राप्त मदरसों में से अभी तक पांच मदरसे ही अभी तक इस कार्य को कर सके हैं। बाकी से भी इसे शीघ्र निपटाने का निर्देश दिया गया है।
पूर्व में मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति, वेतन, उनकी संख्या, छात्रों की संख्या, छात्रवृत्ति, अन्य अनुदान आदि को लेकर विवाद की स्थिति बनी रहती थी, जिससे भ्रष्टाचार के संकेत भी मिलते थे। उत्तर प्रदेश शासन ने मदरसा पोर्टल की स्थापना कर मदरसों की जानकारी ऑनलाइन फीड कराने का निर्देश दिया है। मदरसा पोर्टल पर जिले के सभी मान्यता प्राप्त मदरसा, आधुनिक मदरसे, अनुदानित मदरसों की संख्या, उनमें पढ़ाने वाले शिक्षक और पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का पूरा ब्योरा दर्ज कराना है।
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जिला अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रसून राय ने बताया कि जिले में 46 मान्यता प्राप्त मदरसों में छह हजार छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें 18 मदरसे आधुनिकीकरण के तहत संचालित हो रहे हैं। आधुनिकीकरण के तहत मदरसों में प्रबंध समिति शिक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव शासन को करती है। शासन मदरसा संचालकों की नियुक्ति प्रस्ताव पर मंजूूूरी देता है। जिसमें शासन केंद्रांश व राज्यांश वेतन के रूप में जारी करता है। 15 सितंबर तक जिले के सभी मदरसे मदरसा पोर्टल पर अपडेट हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि फिलहाल पांच मदरसे ऑनलाइन हो चुके हैं। 15 सितंबर तक आनलाइन न होने वाले मदरसों की मान्यता रद्द की जाएगी।
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सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से पहुंच गई थी डबल छात्रवृत्ति
शामली। तीन साल पूर्व मदरसों के छात्र-छात्राओं के खातों में छात्रवृत्ति की डबल धनराशि पहुंच गई थी। मामला शासन स्तर तक पहुंच गया था। इसके चलते तत्कालीन डीएम पीके सिंह ने इसकी जांच कराकर मदरसों के खातों से छात्रवृत्ति की धनराशि की रिकवरी कराने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी थी।