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चार साल पहले गायब हुए पाकिस्तानी युवक का नहीं लगा सुराग
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अमर उजाला ब्यूरो
शामली/ कैराना। सहारनपुर में जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों के पकड़े जाने के बाद जिला पुलिस भी अलर्ट हो गई है। सर्विलांस सैल को भी चौकस किया गया है। इंटरनेशनल कॉल्स भी निगरान के दायरे में हैं। उधर कैराना से चार साल पहले लापता हुआ पाकिस्तान युवक आज तक लापता है। वहीं, कस्बे में दिन भर एटीएस की छापेमारी का शोर मचता रहा।
सात मई 2015 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के जिला जंग सदर से नवेद अपनी मां रईसा और भाई नदीम के साथ कैराना के मोहल्ला पीपलोतला में अपनी मौसी के घर आया था। इनके पास 25 दिन का वीजा था। वीजा अवधि खत्म होने से पहले ही 19 मई को नवेद अचानक लापता हो गया था। पाकिस्तानी युवक के लापता होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट हो गई थी। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लगा। उसकी गुमशुदगी कैराना थाने में दर्ज कराई गई, लेकिन आज तक उसका कोई पता नहीं चला। सीओ राजेश तिवारी ने बताया कि युवक का पता नहीं चल सका था। उधर हथियार तस्करी और 2016 मेें नाभा जेल से आतंकी को भगाने के आरोपी का कस्बे में पकड़ा जाना और हथियार तस्करी के लिए चर्चित रहने की वजह से पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने कैराना में निगरानी बढ़ा दी है। 90 के दशक में कैराना के दामन पर पाकिस्तान से गठरी व्यवसाय, हथियारों की खेप और नकली करेंसी का बदनुमा दाग लगे थे। शनिवार को एटीएस की छापेमारी की चर्चाएं फैल गई, लेकिन पुष्टि नहीं हुई। उधर, कोतवाली प्रभारी राजेंद्र कुमार नागर का कहना है कि उन्हें छापेमारी की कोई जानकारी नहीं हैं।
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शामली/ कैराना। सहारनपुर में जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों के पकड़े जाने के बाद जिला पुलिस भी अलर्ट हो गई है। सर्विलांस सैल को भी चौकस किया गया है। इंटरनेशनल कॉल्स भी निगरान के दायरे में हैं। उधर कैराना से चार साल पहले लापता हुआ पाकिस्तान युवक आज तक लापता है। वहीं, कस्बे में दिन भर एटीएस की छापेमारी का शोर मचता रहा।
सात मई 2015 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के जिला जंग सदर से नवेद अपनी मां रईसा और भाई नदीम के साथ कैराना के मोहल्ला पीपलोतला में अपनी मौसी के घर आया था। इनके पास 25 दिन का वीजा था। वीजा अवधि खत्म होने से पहले ही 19 मई को नवेद अचानक लापता हो गया था। पाकिस्तानी युवक के लापता होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट हो गई थी। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लगा। उसकी गुमशुदगी कैराना थाने में दर्ज कराई गई, लेकिन आज तक उसका कोई पता नहीं चला। सीओ राजेश तिवारी ने बताया कि युवक का पता नहीं चल सका था। उधर हथियार तस्करी और 2016 मेें नाभा जेल से आतंकी को भगाने के आरोपी का कस्बे में पकड़ा जाना और हथियार तस्करी के लिए चर्चित रहने की वजह से पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने कैराना में निगरानी बढ़ा दी है। 90 के दशक में कैराना के दामन पर पाकिस्तान से गठरी व्यवसाय, हथियारों की खेप और नकली करेंसी का बदनुमा दाग लगे थे। शनिवार को एटीएस की छापेमारी की चर्चाएं फैल गई, लेकिन पुष्टि नहीं हुई। उधर, कोतवाली प्रभारी राजेंद्र कुमार नागर का कहना है कि उन्हें छापेमारी की कोई जानकारी नहीं हैं।
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