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आज केबल पर देखने को नहीं मिलेंगे पेय चैनल

Thu, 31 Jan 2019 11:31 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 31 Jan 2019 11:31 PM IST
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आज केबल पर देखने को नहीं मिलेंगे पेय चैनल
अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। प्रसारण सेवाओं के लिए आज से शुरू हो रही नई शुल्क व्यवस्था को लेकर उपभोक्ता असमंजस की स्थिति में हैं। केबल आपरेटर्स का कहना है कि वर्तमान में उपभोक्ता जितने चैनल देख रहे हैं नई शुल्क व्यवस्था से उतने चैनल्स देखने को उन्हें पहले से तीन से चार गुना शुल्क देना पड़ सकता है। जाहिर है कि नई शुल्क व्यवस्था उपभोक्ताओं की अच्छी खासी जेब ढीली कराएगी।
शहर में ही करीब 10 हजार से केबल उपभोक्ता हैं। केबल आपरेटर सुभाष कुमार के अनुसार अभी तक 130 से 180 रुपये एक मुश्त शुल्क में उपभोक्ताओं को करीब 300 चैनल का प्रसारण दिया जा रहा है। इनमें कई पेड चैनल एचडी क्वालिटी के हैं। लेकिन आज से शुरू हो रही नई प्रसारण शुल्क व्यवस्था में केबल आपरेटर्स करीब 100 नॉन पेड चैनल्स दिखाने के लिए 130 रुपये और उस पर जीएसटी लेंगे। यानी नान पेड चैनल्स के लिए उपभोक्ता के करीब 154 रुपये तो फिक्स देने होंगे। इसके बाद वे अपनी मर्जी के पेड चैनल्स का पैक ले सकते हैं। इन सभी के रेट अलग अलग हैं। आपरेटर्स के अनुसार उनके द्वारा सभी उपभोक्ताओं को इस संबंध में अवगत करा दिया गया है लेेकिन अभी तक किसी भी उपभोक्ता ने चैनल्स पैक्स नहीं लिए हैं। दरअसल नई शुल्क व्यवस्था में ये काफी महंगे पडे़ंगे। आपरेटर्स के अनुसार वर्तमान में जो 300 के आसपास चैनल्स दिखा रहे हैं यदि ये सभी चैनल्स नई शुल्क व्यवस्था से केबिल उपभोक्ता देखना चाहते तो ये सभी चैनल्स 600 से भी अधिक में पडे़ंगे। इसी कारण उपभोक्ता भी कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। केबल आपरेटर्स सुभाष कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार मध्यरात्रि से वह अपने ग्राहकों को केवल फ्री चैनल्स वाले पैक ही दिखा सकेंगे।
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कार्टून शो देखने को नहीं मिलेगा
पेड चैनल का प्रसारण नहीं होने से क्रिकेट के शौकीन भारत न्यूजीलैंड सीरीज का लुत्फ नहीं ले सकेंगे। महिलाएं अपने पसंदीदा सीरियल नहीं देख सकेंगी तो बच्चों को भी कार्टून देखने को नहीं मिलेगा। कई पेड न्यूज चैनल्स भी देखने से लोग वंचित रह सकते हैं।
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निगरानी वाला कोई नहीं
पहले केबल आपरेटर्स पर मनोरंजन कर लगता था,लेकिन अब केबल व्यवसाय जीएसटी के दायरे में आ गया है। पहले मनोरंजन कर विभाग की निगरानी रहती थी लेकिन अब मनोरंजन कर विभाग का इनपर होल्ड नहीं है। ऐसे में इन आपरेटर्स पर पूरी निगरानी भी संभव नहीं है।
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