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भाजपा को घेरने की चौतरफा कोशिश
Updated Sat, 26 May 2018 12:44 AM IST
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शामली। कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में विपक्षी दलों की तरफ से भाजपा की चौतरफा घेराबंदी करने की कोशिश की जा रही है। गठबंधन की तरफ से रालोद के सिंबल पर तबस्सुम हसन चुनाव लड़ रही हैं, तो सपा, कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी, निषाद पार्टी ने भी भाजपा की घेराबंदी शुरू कर दी है।
उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व सांसद दिवंगत हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को प्रत्याशी बनाया है, तो विपक्ष की तरफ से सपा विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा की घेराबंदी के लिए ही रालोद और सपा नेताओं की पूरी टीम लगी हुई है, तो कांग्रेस नेता भी गठबंधन के साथ आ चुके हैं। वहीं, भीम आर्मी की तरफ से भी गठबंधन का समर्थन कर दिया गया है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के जिला प्रवक्ता राजीव कुमार वशिष्ठ और अन्य लोगों ने शुक्रवार को ही गठबंधन का समर्थन कर दिया। उधर, भाजपा की घेराबंदी के लिए ही रालोद और कांग्रेस नेताओं ने प्रयास करके लोकदल प्रत्याशी कंवर हसन को मनाने में कामयाबी हासिल कर ली। ताकि मुसलिम मतदाताओं में बंटवारा न होने पाए और भाजपा की मजबूत घेराबंदी की जा सके। अब देखना यह है कि 28 मई को होने वाले मतदान पर भाजपा की घेराबंदी में विपक्षी महा गठबंधन कितना कामयाब हो पाता है। या फिर संगठन की ताकत के सहारे भाजपा कैराना सीट को अपने पास रखने में कामयाब हो पाएगी।
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उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व सांसद दिवंगत हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को प्रत्याशी बनाया है, तो विपक्ष की तरफ से सपा विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा की घेराबंदी के लिए ही रालोद और सपा नेताओं की पूरी टीम लगी हुई है, तो कांग्रेस नेता भी गठबंधन के साथ आ चुके हैं। वहीं, भीम आर्मी की तरफ से भी गठबंधन का समर्थन कर दिया गया है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के जिला प्रवक्ता राजीव कुमार वशिष्ठ और अन्य लोगों ने शुक्रवार को ही गठबंधन का समर्थन कर दिया। उधर, भाजपा की घेराबंदी के लिए ही रालोद और कांग्रेस नेताओं ने प्रयास करके लोकदल प्रत्याशी कंवर हसन को मनाने में कामयाबी हासिल कर ली। ताकि मुसलिम मतदाताओं में बंटवारा न होने पाए और भाजपा की मजबूत घेराबंदी की जा सके। अब देखना यह है कि 28 मई को होने वाले मतदान पर भाजपा की घेराबंदी में विपक्षी महा गठबंधन कितना कामयाब हो पाता है। या फिर संगठन की ताकत के सहारे भाजपा कैराना सीट को अपने पास रखने में कामयाब हो पाएगी।
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