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अंगद ने लंका के शूरवीरों और रावण का घमंड किया चूर
Updated Sat, 30 Sep 2017 01:16 AM IST
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गढ़ीपुख्ता ।
कच्ची गढ़ी में मां शक्ति स्वरूपा और भगवान विष्णु की आरती के बाद रंगमंच पर रामदल से शांतिदूत के रूप में अंगद को लंका में भेजा गया। अंगद ने श्रीराम की ओर से सीता को वापस करने का आग्रह किया। रावण के इंकार करने पर अंगद ने लंका के दरबारी शूरवीरों और रावण का घमंड चूर किया। रंगमंच में मेघनाद, लक्ष्मण का युद्ध दर्शाया गया। युद्ध में मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते है। जिससे रामदल में शोक छा जाता है। श्रीराम के आदेश पर हनुमान जी द्रोणाचल पर्वत को उठा कर ले आते है। संजीवनी बूटी से लक्ष्मण को जीवित किया जाता है। श्रीराम हनुमान जी के कार्य की सराहना करते हुए उन्हें अमर-अजर का वरदान देते है। हनुमान जी के द्रोणाचल पर्वत को लाने वाले दृश्य से सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। अभिनय कलाकर-गौतम शर्मा, आशू, दीपक, गौतम, शेखर सैनी, नरेन्द्र प्रधान, देवेन्द्र कश्यप, चमन लाल , जोगिंद्र कश्यप, मिंटू, रामबीर आदि मौजूद रहे।
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कच्ची गढ़ी में मां शक्ति स्वरूपा और भगवान विष्णु की आरती के बाद रंगमंच पर रामदल से शांतिदूत के रूप में अंगद को लंका में भेजा गया। अंगद ने श्रीराम की ओर से सीता को वापस करने का आग्रह किया। रावण के इंकार करने पर अंगद ने लंका के दरबारी शूरवीरों और रावण का घमंड चूर किया। रंगमंच में मेघनाद, लक्ष्मण का युद्ध दर्शाया गया। युद्ध में मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते है। जिससे रामदल में शोक छा जाता है। श्रीराम के आदेश पर हनुमान जी द्रोणाचल पर्वत को उठा कर ले आते है। संजीवनी बूटी से लक्ष्मण को जीवित किया जाता है। श्रीराम हनुमान जी के कार्य की सराहना करते हुए उन्हें अमर-अजर का वरदान देते है। हनुमान जी के द्रोणाचल पर्वत को लाने वाले दृश्य से सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। अभिनय कलाकर-गौतम शर्मा, आशू, दीपक, गौतम, शेखर सैनी, नरेन्द्र प्रधान, देवेन्द्र कश्यप, चमन लाल , जोगिंद्र कश्यप, मिंटू, रामबीर आदि मौजूद रहे।