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कांवड़ यात्रा की चहुंओर धूम, उद्योग- व्यापार हुआ बेदम

Wed, 19 Jul 2017 12:28 AM IST
Updated Wed, 19 Jul 2017 12:28 AM IST
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कांवड़ यात्रा की चहुंओर धूम, उद्योग- व्यापार हुआ बेदम
जिले में कारोबार हुआ बेदम
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शामली। कांवड़ यात्रा के चलते रूट बंद होने से कारोबार पर प्रभाव पड़ रहा है। कच्चा माल आ नहीं रहा है तो फैक्ट्रियों में तैयार माल की सप्लाई भी बंद हो गई है। कपड़ा से लेकर रिम धुरा और अन्य तमाम कारोबार प्रभावित हो रहे हैं। प्रतिदिन 30 करोड़ रुपये से ज्यादा का फटका लग रहा है।
हरिद्वार कांवड़ यात्रा दस जुलाई से 21 जुलाई तक चलेगी। 13 जुलाई से कांवड़ियों की संख्या बढ़ने के बाद ही रूट बंद होने लगे थे। शनिवार रात से रूट डायवर्जन व्यवस्था लागू होने से अन्य प्रदेशों से आने वाले माल वाहक वाहनों की आवाजाही भी बंद हो गई। शामली के उद्यमियों का माल जिले से बाहर नहीं जा रहा है। बर्तन, कपड़ा, ज्वैलरी और रेडिमेड गारमेंट्स का प्रतिदिन 50 लाख से ज्यादा का कारोबार होता था, जो 50 प्रतिशत तक घट गया है।
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शहर के नेहरू मार्केट में कपड़ा व्यापारी जितेंद्र जैन का कहना है कि जीएसटी लगने के कारण कपड़ा उद्योग प्रभावित हो रहा है। मुंबई, सूरत, अहमदाबाद में कपड़ा उद्योग की हड़ताल से प्रभावित हो रहा था। अब कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग बंद हो जाने से माल नहीं आ रहा है। कपड़ा व्यापार करीब 50 प्रतिशत घट गया है। शहर में करीब 400 कपड़ा व्यापारी हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में 50 हजार से एक लाख रुपये तक दुकानदारी हो जाती थी। अब मात्र 25 से 50 हजार रुपये तक रह गई है।
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नेहरू मार्केट में ही व्यापारी ललित जैन का कहना है कि हैंडलूम के आठ दस दुुकानदार है। दो लाख प्रतिदिन की दुकानदारी हो जाती थी, अब रूट बंद होने से पानीपत से हैंडलूम का सामान नहीं आ रहा है, जिस कारण 50 प्रतिशत बिक्री प्रभावित हो रही है।
बर्तन व्यापारी अरुण कुमार का कहना है कि शहर में बर्तनों की 50 से ज्यादा दुकानें हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान बर्तन व्यापार पर 25 प्रतिशत तक असर पड़ा है। इलेक्ट्रिक सामान विक्रेता डॉक्टर अनिल कुमार बंसल का कहना है कि पूर्व में प्रतिदिन तीन हजार रुपये तक बिक्री हो रही थी, लेकिन अब एक हजार रुपये की दुकानदारी रह गई है।
आईआईए के चेयरमैन वेदप्रकाश आर्य ने बताया कि शामली में रिम धुरा, कागज, लोहा- इस्पात,प्लास्टिक गिलासों की करीब 40 इकाइयां स्थित है, जिनसे प्रतिमाह 300 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश में ट्रकों से माल भेजा जाता है। साथ ही गाजियाबाद, दिल्ली, उड़ीसा व गुजरात से कच्चा माल मंगाया जाता है। कांवड़ यात्रा के दौरान बाहर से कच्चा माल नहीं आ पा रहा है। बना हुआ माल बाहर भी नहीं भेज पा रहे हैं उद्यमी। वहीं, बॉर्डर पर ट्रांसपोर्ट में माल फंसने पर एक हजार रुपये प्रतिदिन ट्रांसपोर्टर को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे दोहरी मार पड़ रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम दास गर्ग के मुताबिक पहले से ही जीएसटी के कारण व्यापार पर असर था। कांवड़ यात्रा के दौरान सिर्फ कांवड़ एवं शिवभक्तों ासे संबंधित सामान की बिक्री हो रही है।

केला हुआ महंगा
शामली। मंडी के फल आढ़ती गौरव का कहना है कि कांवड़ यात्रा में केले की जबरदस्त मांग है। इस कारण दाम भी महंगा हो गया है। जो दुकानदार प्रतिदिन 30 से लेकर 40 दर्जन केला बेचता था, कांवड़ मेले में वह 80 से 100 दर्जन केला बेच रहा है। बाजार में केले का पहले भाव 30 रुपये से लेकर चालीस रुपये दर्जन था, अब यह केला 50 रुपये से लेकर 70 रुपये दर्जन बिक रहा है।
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