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दारूल उलूम देवबंद में कार्यक्रम को बनाई रणनीति
Updated Sun, 14 Jan 2018 11:41 PM IST
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उलमा की बैठक में देश के मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता और उनकी अहमियत पर दारुल उलूम देवबंद में प्रस्तावित 21 मार्च के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए रणनीति बनाई जाएगी। उलमा ने कहा कि मदरसों में दीन और अमन-चैन की शिक्षा दी जाती है।
दीनी शिक्षण संस्थान मदरसा जामिअतुस्सादह में जिले के उलमा की बैठक का शुभारंभ कारी रब्बान की कुरान ख्वानी व असदुल्लाह की नात-ए-पाक से हुआ। इस अवसर पर मदरसा सुलेमानिया ईदगाह कांधला के मोहतमिम मुफ्ती अबुल हसन अरशद ने कहा कि विश्वविख्यात इल्म की नगरी दारुल उलूम देवबंद के इस सराहनीय कदम को गांव दर गांव तक पहुंचाया जाएगा, जिसके लिए ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में समितियां गठित कर दारुल उलूम के प्रयासों को पूरा किया जाएगा, जिसके लिए 21 मार्च को प्रस्तावित महत्वपूर्ण कार्यक्रम में तमाम मदरसों के जिम्मेदारों को कार्यक्रम में भाग लेने का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मदरसों में अमन-शांति और दीन की शिक्षा दी जाती है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के पश्चिमी उप्र के अध्यक्ष एवं जामिया बदरूल उलूम गढीदौलत के मोहतमिम मौलाना आकिल ने कहा कि इस्लामी मदरसों के पीछे आज पूरी दुनिया केवल इसीलिए पड़ी हुई है कि इन मदरसों की शिक्षा और सभ्यता भिन्न है। मदरसों में कुरान व हदीस की शिक्षा दी जाती है। कहा, हमारे पूर्वजों ने मदरसों की स्थापना के लिए अपना खून-पसीना बहाया है, जिसके लिए बड़ा संघर्ष कर हर परिस्थितियों में मदरसों को चलाया। मौलाना सैयद अतहर बल्ला मजरा ने कहा कि मदरसों के जिम्मेदारों को एक प्लेटफार्म पर आने की जरूरत है। दारुल उलूम देवबंद में मार्च में होने वाले मदरसों को लेकर कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचना होगा। मदरसा प्रबंध संचालक मौलाना इरफान साकिब कासमी ने दारुल उलूम को पूर्ण समर्थन किया और उलमा को धन्यवाद दिया। बैठक का संचालन मौलाना आबिद रशीदी ने किया। इस अवसर पर मौलाना अकरम, मौलाना अब्दुल सत्तार, मुफ्ती अकरम, मौलाना अशरफ, मौलाना मोहम्मद उमर, कारी अकबर, मास्टर समीउल्लाह, मौलाना बशीर अहमद, मौलाना खुर्शीद, मुफ्ती अब्दुल्ला, मुफ्ती शाहिद, मौलाना तहसीन, मौलाना फिरोज, मौलाना इमरान, मुफ्ती कमर, मौलाना असदुल्लाह आदि मौजूद रहे।
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उलमा की बैठक में देश के मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता और उनकी अहमियत पर दारुल उलूम देवबंद में प्रस्तावित 21 मार्च के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए रणनीति बनाई जाएगी। उलमा ने कहा कि मदरसों में दीन और अमन-चैन की शिक्षा दी जाती है।
दीनी शिक्षण संस्थान मदरसा जामिअतुस्सादह में जिले के उलमा की बैठक का शुभारंभ कारी रब्बान की कुरान ख्वानी व असदुल्लाह की नात-ए-पाक से हुआ। इस अवसर पर मदरसा सुलेमानिया ईदगाह कांधला के मोहतमिम मुफ्ती अबुल हसन अरशद ने कहा कि विश्वविख्यात इल्म की नगरी दारुल उलूम देवबंद के इस सराहनीय कदम को गांव दर गांव तक पहुंचाया जाएगा, जिसके लिए ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में समितियां गठित कर दारुल उलूम के प्रयासों को पूरा किया जाएगा, जिसके लिए 21 मार्च को प्रस्तावित महत्वपूर्ण कार्यक्रम में तमाम मदरसों के जिम्मेदारों को कार्यक्रम में भाग लेने का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मदरसों में अमन-शांति और दीन की शिक्षा दी जाती है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के पश्चिमी उप्र के अध्यक्ष एवं जामिया बदरूल उलूम गढीदौलत के मोहतमिम मौलाना आकिल ने कहा कि इस्लामी मदरसों के पीछे आज पूरी दुनिया केवल इसीलिए पड़ी हुई है कि इन मदरसों की शिक्षा और सभ्यता भिन्न है। मदरसों में कुरान व हदीस की शिक्षा दी जाती है। कहा, हमारे पूर्वजों ने मदरसों की स्थापना के लिए अपना खून-पसीना बहाया है, जिसके लिए बड़ा संघर्ष कर हर परिस्थितियों में मदरसों को चलाया। मौलाना सैयद अतहर बल्ला मजरा ने कहा कि मदरसों के जिम्मेदारों को एक प्लेटफार्म पर आने की जरूरत है। दारुल उलूम देवबंद में मार्च में होने वाले मदरसों को लेकर कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचना होगा। मदरसा प्रबंध संचालक मौलाना इरफान साकिब कासमी ने दारुल उलूम को पूर्ण समर्थन किया और उलमा को धन्यवाद दिया। बैठक का संचालन मौलाना आबिद रशीदी ने किया। इस अवसर पर मौलाना अकरम, मौलाना अब्दुल सत्तार, मुफ्ती अकरम, मौलाना अशरफ, मौलाना मोहम्मद उमर, कारी अकबर, मास्टर समीउल्लाह, मौलाना बशीर अहमद, मौलाना खुर्शीद, मुफ्ती अब्दुल्ला, मुफ्ती शाहिद, मौलाना तहसीन, मौलाना फिरोज, मौलाना इमरान, मुफ्ती कमर, मौलाना असदुल्लाह आदि मौजूद रहे।
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