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निष्पक्षता से काम होता तो जीत का अंतर बहुत ज्यादा होता
Updated Thu, 15 Nov 2018 12:10 AM IST
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निष्पक्षता से काम होता तो ज्यादा वोट से जीतती
ाकैराना। कैराना लोकसभा क्षेत्र से रालोद सांसद तबस्सुम हसन ने कहा कि यदि शामली में कैराना उपचुनाव के दौरान निष्पक्षता से काम होता तो उनकी जीत का अंतर काफी ज्यादा होता।
कैराना सांसद ने जारी बयान में बताया कि 21 मई 2018 को चुनाव प्रक्रिया के आरंभ से ही तत्कालीन जिला निर्वाचन अधिकारी जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह का पक्षपाती रवैया सामने आ रहा था। अधिकारियों के पक्षपात की लगातार शिकायत उन्होंने की। वोटिंग वाले दिन तो पक्षपात की हद हो गई थी। जिला निर्वाचन अधिकारी उनका फोन तक रिसीव नहीं कर रहे थे। न ही वोटिंग मशीन की गड़बड़ी दूर करने को तकनीकी स्टाफ भेजा जा रहा था।
वीवीपैट गड़बड़ी वाले बूथों पर मशीन को ठीक कराने के लिए कोई टेक्निकल स्टाफ भेज रहे थे। चुनाव वाले दिन पहले चुनाव प्रक्रिया में लगे सेक्टर मजिस्ट्रेट के फोन नंबर देने से भी उन्हें इंकार कर दिया गया था। हालांकि सहारनपुर के जिलाधिकारी ने समस्त प्रक्रिया का पालन किया। यदि जनपद शामली में भी निष्पक्षता से काम होता तो यहां पर पुनर्मतदान जनपद सहारनपुर से ज्यादा बूथों पर होता। वोटों की गिनती के दिन हम उनके तौर तरीकों से पहले ही सतर्क थे। काउंटिंग के दौरान भी कर्मियों पर अपना दबाव बनाया और हमारी जीत के अंतर को बेहद कम किया। सबसे अधिक कैराना विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में गड़बड़ी हुई। डीएम के तबादले से उनकी शिकायतों को बल मिलता है। यदि शामली में निष्पक्षता से काम होता तो उनकी जीत का अंतर ओर अधिक होता।
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ाकैराना। कैराना लोकसभा क्षेत्र से रालोद सांसद तबस्सुम हसन ने कहा कि यदि शामली में कैराना उपचुनाव के दौरान निष्पक्षता से काम होता तो उनकी जीत का अंतर काफी ज्यादा होता।
कैराना सांसद ने जारी बयान में बताया कि 21 मई 2018 को चुनाव प्रक्रिया के आरंभ से ही तत्कालीन जिला निर्वाचन अधिकारी जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह का पक्षपाती रवैया सामने आ रहा था। अधिकारियों के पक्षपात की लगातार शिकायत उन्होंने की। वोटिंग वाले दिन तो पक्षपात की हद हो गई थी। जिला निर्वाचन अधिकारी उनका फोन तक रिसीव नहीं कर रहे थे। न ही वोटिंग मशीन की गड़बड़ी दूर करने को तकनीकी स्टाफ भेजा जा रहा था।
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वीवीपैट गड़बड़ी वाले बूथों पर मशीन को ठीक कराने के लिए कोई टेक्निकल स्टाफ भेज रहे थे। चुनाव वाले दिन पहले चुनाव प्रक्रिया में लगे सेक्टर मजिस्ट्रेट के फोन नंबर देने से भी उन्हें इंकार कर दिया गया था। हालांकि सहारनपुर के जिलाधिकारी ने समस्त प्रक्रिया का पालन किया। यदि जनपद शामली में भी निष्पक्षता से काम होता तो यहां पर पुनर्मतदान जनपद सहारनपुर से ज्यादा बूथों पर होता। वोटों की गिनती के दिन हम उनके तौर तरीकों से पहले ही सतर्क थे। काउंटिंग के दौरान भी कर्मियों पर अपना दबाव बनाया और हमारी जीत के अंतर को बेहद कम किया। सबसे अधिक कैराना विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में गड़बड़ी हुई। डीएम के तबादले से उनकी शिकायतों को बल मिलता है। यदि शामली में निष्पक्षता से काम होता तो उनकी जीत का अंतर ओर अधिक होता।
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