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श्रद्धा और विश्वास का केन्द्र है प्राचीन दुर्गा देवी मंदिर
Updated Tue, 26 Sep 2017 12:32 AM IST
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जलालाबाद।
कस्बा स्थित प्राचीन दुर्गा देवी मंदिर सिद्धपीठ है। आसपास क्षेत्र के श्रद्धालुओं की इसमें अगाध आस्था है। प्रतिदिन मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है। खासकर नवरात्र में विशेष पूजा अर्चना कर श्रद्धालु पुण्य लाभ कमाते हैं। यह मंदिर कस्बे में पूर्वी छोर पर स्थित है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण मंदिर पर पड़ती है। मंदिर का शिखर काफी ऊंचा है। मंदिर का निर्वाण वास्तुशास्त्र के अनुसार किया गया है। भवन के अंदर चित्रकारी का नमूना अनूठा है। मंदिर निर्माण में लोहे धातु का प्रयोग नहीं है। केवल चूना और लखोरी ईंटो का ही प्रयोग है। खासियत यह है कि गर्मी के मौसम में ठंडा और सर्दी के मौसम में गर्म रहता है। मंदिर के शिखर के चारों कोने पर बब्बर शेर और बंदरों की आकृति आकर्षक है। मंदिर परिसर में मां भद्रकाली, नौ दुर्गा, हनुमान जी की मूर्तियां विराजित हैं।
मंदिर के पुजारी पंडित चंद्रमोहन शास्त्री ने बताया कि मंदिर में दोनों समय शंख ध्वनि, आरती के साथ प्रत्येक चतुर्दशी को हवन यज्ञ होता है। इसमें कस्बे और क्षेत्र के श्रद्धालु हिस्सा लेते है। दुर्गा देवी मंदिर में प्रतिवर्ष अशोजशुदी चतुर्दशी को दस दिन का विशाल मेला लगता है। इसमें दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और मां को प्रसाद चुनरी, नारियल चढ़ाकर भक्तिभाव से पूजा अर्चना करते हैं।
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कस्बा स्थित प्राचीन दुर्गा देवी मंदिर सिद्धपीठ है। आसपास क्षेत्र के श्रद्धालुओं की इसमें अगाध आस्था है। प्रतिदिन मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है। खासकर नवरात्र में विशेष पूजा अर्चना कर श्रद्धालु पुण्य लाभ कमाते हैं। यह मंदिर कस्बे में पूर्वी छोर पर स्थित है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण मंदिर पर पड़ती है। मंदिर का शिखर काफी ऊंचा है। मंदिर का निर्वाण वास्तुशास्त्र के अनुसार किया गया है। भवन के अंदर चित्रकारी का नमूना अनूठा है। मंदिर निर्माण में लोहे धातु का प्रयोग नहीं है। केवल चूना और लखोरी ईंटो का ही प्रयोग है। खासियत यह है कि गर्मी के मौसम में ठंडा और सर्दी के मौसम में गर्म रहता है। मंदिर के शिखर के चारों कोने पर बब्बर शेर और बंदरों की आकृति आकर्षक है। मंदिर परिसर में मां भद्रकाली, नौ दुर्गा, हनुमान जी की मूर्तियां विराजित हैं।
मंदिर के पुजारी पंडित चंद्रमोहन शास्त्री ने बताया कि मंदिर में दोनों समय शंख ध्वनि, आरती के साथ प्रत्येक चतुर्दशी को हवन यज्ञ होता है। इसमें कस्बे और क्षेत्र के श्रद्धालु हिस्सा लेते है। दुर्गा देवी मंदिर में प्रतिवर्ष अशोजशुदी चतुर्दशी को दस दिन का विशाल मेला लगता है। इसमें दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और मां को प्रसाद चुनरी, नारियल चढ़ाकर भक्तिभाव से पूजा अर्चना करते हैं।
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